भोपाल में डेयरी उद्योग से जुड़े एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने “मिल्क मैजिक” ब्रांड से जुड़े करोड़ों रुपए के कथित घोटाले में भोपाल स्थित जयश्री गायत्री फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके प्रबंध निदेशक किशन मोदी के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत अभियोजन शिकायत दर्ज की है।
ईडी की जांच में सामने आया कि कंपनी दूध से बनने वाले उत्पादों में असली मिल्क फैट की जगह पाम ऑयल और अन्य मिलावटी पदार्थों का इस्तेमाल कर रही थी। इन उत्पादों को “मिल्क मैजिक” ब्रांड नाम से देश और विदेश दोनों बाजारों में बेचा जा रहा था।

फर्जी लैब रिपोर्ट के जरिए मिला निर्यात का लाइसेंस
जांच एजेंसी के अनुसार कंपनी ने विदेशी बाजारों में डेयरी उत्पाद भेजने के लिए प्रतिष्ठित प्रयोगशालाओं की नकली टेस्ट रिपोर्ट तैयार करवाईं। इन रिपोर्ट्स के आधार पर निर्यात की मंजूरी हासिल की गई। जब ईडी ने संबंधित लैब्स से रिपोर्ट का सत्यापन कराया, तब कई दस्तावेज फर्जी पाए गए।
ईडी का कहना है कि इन फर्जी रिपोर्टों और मिलावटी उत्पादों की बिक्री के जरिए कंपनी ने लगभग 19.69 करोड़ रुपए की अवैध कमाई की। यह राशि कंपनी के बैंक खातों के माध्यम से संचालित की गई, जिसे एजेंसी ने “अपराध की आय” (Proceeds of Crime) माना है।
कंपनी की संपत्तियां अटैच
मामले की गंभीरता को देखते हुए ईडी पहले ही कंपनी की कई अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर चुकी है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा अवैध कमाई कहां-कहां निवेश की गई।
दो बड़े अधिकारी गिरफ्तार
इस मामले में ईडी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कंपनी के एमडी किशन मोदी को 13 मार्च 2026 को गिरफ्तार किया था। इसके बाद कंपनी के तत्कालीन CEO सुनील त्रिपाठी को 20 अप्रैल 2026 को गिरफ्तार किया गया। दोनों आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
पुलिस और EOW की FIR के बाद शुरू हुई जांच
यह पूरा मामला भोपाल के हबीबगंज थाना और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) में दर्ज FIR के बाद सामने आया। कंपनी के निदेशकों और अधिकारियों के खिलाफ IPC की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किए गए थे।
खाद्य सुरक्षा पर उठे सवाल
इस खुलासे के बाद खाद्य सुरक्षा और डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि डेयरी उत्पादों में पाम ऑयल और अन्य मिलावटी पदार्थों का उपयोग उपभोक्ताओं की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
ईडी ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं तथा कंपनी के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच जारी है।