पहलवान विनेश फोगाट विवाद: बयान के बाद सियासत गरमाई, बृजभूषण का पलटवार !

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हरियाणा से जुड़े कुश्ती विवाद में एक बार फिर बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। पहलवान और विधायक Vinesh Phogat ने गोंडा में आयोजित सीनियर नेशनल ओपन कुश्ती चैंपियनशिप में हुए घटनाक्रम के बीच कड़े शब्दों में कहा कि “इन बेशर्मों को क्या फर्क पड़ता है”, जिसके बाद मामला खेल से आगे बढ़कर राजनीतिक और संगठनात्मक टकराव में बदल गया है।

गोंडा में पहुंचीं लेकिन नहीं लड़ पाईं कुश्ती

विनेश फोगाट मंगलवार सुबह हरियाणा लौट गईं, जबकि उन्होंने पहले गोंडा में होने वाली चैंपियनशिप में भाग लेने की घोषणा की थी। वे सोमवार को नंदनी नगर स्टेडियम पहुंचीं, लेकिन वहां ट्रेनिंग सेंटर बंद मिलने के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

विनेश ने आरोप लगाया कि उनके साथ निष्पक्ष व्यवहार नहीं किया जा रहा है और उन्हें खेलने से रोका जा रहा है। इसके बाद उन्होंने बिना मुकाबला खेले ही वापस लौटने का फैसला किया।

WFI का रुख: “टूर्नामेंट में नहीं खेल सकतीं”

भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) ने कहा कि Wrestling Federation of India के नियमों के तहत विनेश को कारण बताओ नोटिस दिया गया है और जब तक जवाब संतोषजनक नहीं मिलता, उन्हें प्रतियोगिता में खेलने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

WFI अध्यक्ष संजय सिंह ने यह भी कहा कि विनेश दर्शक के तौर पर प्रतियोगिता देख सकती हैं, लेकिन खिलाड़ी के रूप में हिस्सा नहीं ले सकतीं।

विनेश का बयान और भावनात्मक प्रतिक्रिया

विनेश ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें बार-बार ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है जिससे उनका मनोबल प्रभावित हो रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके जवाब देने के बावजूद उन्हें दोषी मान लिया गया।

उनके बयान “इन बेशर्मों को क्या फर्क पड़ता है” के बाद विवाद और बढ़ गया, जिसे कई लोगों ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया माना।

बृजभूषण और उनके समर्थकों का पलटवार

पूर्व WFI प्रमुख और पूर्व सांसद Brij Bhushan Sharan Singh ने इस विवाद पर टिप्पणी करते हुए कहा कि “जो रायता फैलाया गया है, उसे अब वही लोग सुलझा रहे हैं।”

उनके बेटे और सांसद ने भी विनेश के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें मर्यादा में रहने की सलाह दी और आलोचना की।

साक्षी मलिक का समर्थन

इस पूरे विवाद में पहलवान Sakshi Malik ने विनेश फोगाट का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों के लिए नियम आसान होने चाहिए, ताकि महिलाएं मातृत्व के बाद भी खेल में वापसी कर सकें और देश के लिए पदक जीत सकें।

डोपिंग और नियमों पर सवाल

विवाद का एक बड़ा हिस्सा डोपिंग और व्हेयरअबाउट्स नियमों से भी जुड़ा है। WFI और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के बीच नियमों के पालन और कार्रवाई की समय-सीमा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

कुछ रिपोर्टों के अनुसार, पहले उल्लंघन पर सीधे प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया पर भी बहस चल रही है, जिसे लेकर खेल प्रशासन पर सवाल उठे हैं।

राजनीतिक और खेल टकराव का बढ़ता असर

यह मामला अब केवल कुश्ती तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें:

खिलाड़ी अधिकार
फेडरेशन की कार्यप्रणाली
राजनीतिक बयानबाजी
और महिला खिलाड़ियों के करियर की सुरक्षा

जैसे मुद्दे भी जुड़ गए हैं।

Vinesh Phogat का यह विवाद एक बार फिर भारतीय कुश्ती व्यवस्था में पारदर्शिता और खिलाड़ियों के अधिकारों को लेकर बड़ी बहस खड़ी कर रहा है। एक तरफ वे खुद को अन्याय का शिकार बता रही हैं, तो दूसरी तरफ WFI और उसके समर्थक नियमों का हवाला दे रहे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने खेल और राजनीति के बीच की दूरी को और धुंधला कर दिया है, और आने वाले दिनों में यह मामला और भी तेज़ी पकड़ सकता है।

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