मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल की एक अदालत ने घरेलू हिंसा और प्रताड़ना से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पत्नी और उसके नाबालिग बेटे को राहत प्रदान की है। कोर्ट ने पति को आदेश दिया है कि वह पत्नी को हर महीने 3 हजार रुपए और बेटे को 2 हजार रुपए भरण-पोषण के रूप में अदा करे। इसके अलावा अदालत ने मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के लिए पत्नी को 2 लाख रुपए एकमुश्त मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है।
अदालत ने दोनों पक्षों के बयान, प्रस्तुत साक्ष्यों और परिस्थितियों का परीक्षण करने के बाद माना कि महिला घरेलू हिंसा और मानसिक उत्पीड़न का शिकार हुई है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चे के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी और पिता बिना अनुमति सीधे बेटे से संपर्क नहीं कर सकेगा।

आईपीएल सट्टेबाजी बना परिवार टूटने की वजह
मामले की सुनवाई के दौरान पत्नी ने अदालत को बताया कि उसका पति इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में सट्टा खेलने का आदी था। शुरुआत में यह आदत धीरे-धीरे बढ़ती गई और बाद में गंभीर आर्थिक संकट का कारण बन गई। पत्नी के अनुसार, पति लगातार ऑनलाइन और अवैध सट्टेबाजी में पैसा लगाता रहा, जिससे उस पर करीब डेढ़ करोड़ रुपए का कर्ज हो गया।
महिला ने कोर्ट में बताया कि जब भी पति को सट्टे में नुकसान होता था, वह गुस्से में आकर उसके साथ मारपीट करता था और मानसिक रूप से प्रताड़ित करता था। घर में आए दिन विवाद होने लगे थे। पति की गलत आदतों का असर पूरे परिवार पर पड़ने लगा था।
कर्जदार घर पहुंचकर करते थे परेशान
पत्नी ने अदालत को बताया कि पति के ऊपर भारी कर्ज होने के कारण कर्ज देने वाले लोग लगातार घर पहुंचने लगे थे। वे पैसे की मांग करते हुए परिवार को परेशान करते थे। स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि महिला को अपने बेटे की सुरक्षा और मानसिक शांति के लिए घर छोड़ना पड़ा।
महिला ने कहा कि वह मजबूरी में अपने बेटे के साथ भोपाल स्थित मायके लौट आई थी। इसके बावजूद पति की आदतों में कोई सुधार नहीं आया।
2008 में हुई थी शादी
मामले के अनुसार, कोलार रोड निवासी कंचन जैन की शादी 7 जुलाई 2008 को जयपुर निवासी कपूर जैन से हुई थी। शादी के एक वर्ष बाद बेटे का जन्म हुआ। पति गांधीधाम में नौकरी करता था, इसलिए वर्ष 2010 में पत्नी भी उसके साथ गांधीधाम रहने चली गई।
पत्नी ने कोर्ट को बताया कि शादी के शुरुआती कुछ समय बाद ही पति का व्यवहार बदलने लगा था। वह अक्सर झगड़ा करता और प्रताड़ित करने लगा। समय बीतने के साथ उसकी सट्टेबाजी की लत और बढ़ गई, जिससे परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति बिगड़ती चली गई।
2019 में पति हुआ फरार
पत्नी ने अदालत में बताया कि वर्ष 2019 में कर्ज का दबाव बढ़ने पर पति अचानक लापता हो गया। काफी समय तक उसका कोई पता नहीं चला। परेशान होकर पत्नी ने गांधीधाम में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी।
पति के गायब होने के बाद महिला अपने बेटे के साथ भोपाल लौट आई। करीब तीन महीने बाद पति ने एक अज्ञात नंबर से संपर्क किया और बताया कि वह दिल्ली में है।
हालांकि कुछ समय बाद पति भोपाल आया, लेकिन उसकी आदतों में कोई बदलाव नहीं हुआ। महिला के अनुसार, वह दोबारा सट्टेबाजी में लग गया और कर्ज चुकाने के लिए पत्नी के गहने तक बेचने लगा। लगातार प्रताड़ना और आर्थिक संकट से परेशान होकर महिला ने आखिरकार अदालत का दरवाजा खटखटाया।
कोर्ट ने माना घरेलू हिंसा का मामला
अदालत ने पूरे मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि महिला को शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार की प्रताड़ना झेलनी पड़ी। कोर्ट ने माना कि पति की सट्टेबाजी की आदत, आर्थिक गैर-जिम्मेदारी और हिंसक व्यवहार ने पत्नी और बच्चे के जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित किया।
इसी आधार पर अदालत ने पत्नी और नाबालिग बेटे के भरण-पोषण के लिए मासिक राशि तय की। साथ ही मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के लिए 2 लाख रुपए का मुआवजा देने का आदेश भी दिया।
बेटे से मिलने पर लगाई शर्त
कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि नाबालिग बच्चा वर्तमान में मां के साथ रह रहा है और उसका संरक्षण मां के पास ही रहेगा। बच्चे के हित को ध्यान में रखते हुए अदालत ने निर्देश दिया कि पिता सीधे बेटे से संपर्क नहीं करेगा।
यदि पति बेटे से मिलना चाहता है, तो इसके लिए पत्नी और अदालत की अनुमति आवश्यक होगी। अदालत का मानना था कि बच्चे का मानसिक और भावनात्मक विकास सुरक्षित वातावरण में होना जरूरी है।
समाज के लिए बड़ा संदेश
यह मामला केवल घरेलू हिंसा का नहीं, बल्कि ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए की लत से बर्बाद होते परिवारों की गंभीर तस्वीर भी सामने लाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आईपीएल और अन्य खेल आयोजनों के दौरान ऑनलाइन सट्टेबाजी तेजी से बढ़ रही है, जिससे कई परिवार आर्थिक और मानसिक संकट में फंस रहे हैं।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अदालत का यह फैसला उन महिलाओं के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश है जो घरेलू हिंसा और आर्थिक प्रताड़ना का सामना कर रही हैं। यदि किसी महिला के साथ अन्याय होता है, तो कानून उसे सुरक्षा और न्याय प्रदान करने के लिए मौजूद है।