छतरपुर जिले के ढोढन गांव में केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर विस्थापित ग्रामीणों और प्रशासन के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। बुधवार को अतिक्रमण हटाने पहुंची प्रशासनिक टीम पर हुए हमले के बाद गुरुवार को हालात फिर बिगड़ गए। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए गांव पहुंची पुलिस टीम पर प्रदर्शनकारियों ने जमकर पथराव कर दिया, जिसके बाद पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।
जानकारी के अनुसार बुधवार को प्रशासन और पुलिस टीम बांध निर्माण क्षेत्र में कार्रवाई के लिए पहुंची थी। इसी दौरान विस्थापित ग्रामीणों और आंदोलनकारियों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए पुलिस और प्रशासनिक अमले पर हमला कर दिया था। पथराव और तोड़फोड़ की इस घटना के बाद किशनगढ़ थाने में मामला दर्ज किया गया था।

गिरफ्तारी के लिए पहुंची पुलिस पर फिर हमला
गुरुवार को पुलिस टीम बुधवार की घटना में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए ढोढन गांव पहुंची थी। इसी दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। अचानक हुई हिंसक स्थिति से मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और अतिरिक्त बल बुलाया गया। जानकारी के मुताबिक बांध निर्माण स्थल और आसपास के क्षेत्रों में 500 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।
पूरा इलाका बना पुलिस छावनी
घटना के बाद ढोढन गांव और आसपास के क्षेत्र को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। गांव में भारी पुलिस बल तैनात है और आने-जाने वाले लोगों पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन उपद्रव और पथराव में शामिल लोगों की पहचान कर कार्रवाई में जुटा हुआ है।
150 लोगों पर दर्ज हुआ मामला
बुधवार को हुए उपद्रव के मामले में किशनगढ़ थाने में आंदोलन से जुड़े नेताओं और ग्रामीणों के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस ने आंदोलन की अगुवाई कर रहे अमित भटनागर, दिव्या अहिरवार और हिसाबी राजपूत सहित 50 नामजद तथा करीब 150 अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

सभी आरोपियों पर बलवा, हत्या के प्रयास, शासकीय कार्य में बाधा, आपराधिक षड्यंत्र और सरकारी एवं निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।
बांध निर्माण कार्य प्रभावित
लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शन और हिंसक घटनाओं के कारण बांध निर्माण कार्य फिलहाल प्रभावित हो गया है। इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है और प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है।
विस्थापित ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें उचित पुनर्वास और मुआवजा दिए बिना हटाया जा रहा है, जबकि प्रशासन का कहना है कि परियोजना के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।