बीना: नाबालिग लड़की से दुष्कर्म का मामला, दोषी युवक को 20 साल की सजा !

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बीना: नाबालिग लड़की से दुष्कर्म का मामला, दोषी युवक को 20 साल की सजा

बीना। चार वर्ष पुराने नाबालिग दुष्कर्म मामले में बीना कोर्ट ने सख्त फैसला सुनाते हुए आरोपी मोहित बेरागी को 20 वर्ष की कठोर कारावास की सजा और 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। शुक्रवार शाम को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने इस मामले में फैसला सुनाया, जिससे पीड़िता परिवार और क्षेत्र के लोगों में राहत की लहर दौड़ गई।

घटना 7 जून 2022 की है

इस पूरे मामले की शुरुआत 7 जून 2022 को हुई थी। बीना थाना क्षेत्र की 17 वर्षीय नाबालिग लड़की अचानक घर से लापता हो गई। परेशान परिजनों ने तुरंत बीना थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। लड़की के पिता ने शिकायत में बताया कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनकी नाबालिग बेटी को बहला-फुसलाकर घर से भगा लिया है। पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी।

पुलिस की तेज कार्रवाई के चलते मात्र 15 दिन बाद 23 जून 2022 को लड़की को देवास जिले से बरामद किया गया। जब पुलिस ने लड़की से विस्तार से पूछताछ की तो सदमा पहुंचाने वाला खुलासा हुआ। लड़की ने बताया कि आरोपी मोहित बेरागी ने उसे प्रेम जाल में फंसाकर बहला-फुसलाया और देवास ले गया। वहां आरोपी ने उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया।

मेडिकल जांच रिपोर्ट, लड़की का बयान और अन्य सबूतों के आधार पर पुलिस ने मोहित बेरागी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट, दुष्कर्म और नाबालिग लड़की को बहकाने की धाराओं में मजबूत मामला तैयार किया। जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई।

4 वर्ष तक चली सुनवाई

इस मामले की सुनवाई बीना जिला एवं सत्र न्यायालय में लगभग 4 वर्ष तक चली। दौरान कोर्ट में कुल 18 गवाह पेश किए गए। पीड़िता लड़की, उसकी मां, पिता, मेडिकल विशेषज्ञ, जांच अधिकारी समेत कई महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज हुए। सरकारी वकील आशीष राठौर ने कोर्ट में मजबूत दलीलें पेश कीं।

अदालत ने सभी पहलुओं — पीड़िता के बयान, मेडिकल रिपोर्ट, फॉरेंसिक साक्ष्य और आरोपी के बचाव पक्ष को विस्तार से सुना। अंत में कोर्ट ने मोहित बेरागी को सभी आरोपों में दोषी पाया।

कोर्ट का फैसला

शुक्रवार शाम को सुनाए गए फैसले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने आरोपी मोहित बेरागी को 20 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 15 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। जुर्माना न चुकाने पर आरोपी को अतिरिक्त 6 महीने की जेल की सजा भी भुगतनी पड़ेगी।

परिजनों की प्रतिक्रिया

पीड़िता परिवार ने फैसले का स्वागत किया है। पीड़िता के पिता ने कहा, “हम 4 साल से न्याय की लड़ाई लड़ रहे थे। आज कोर्ट ने हमें न्याय दिलाया है। हमारी बेटी की जिंदगी बर्बाद हो गई थी, लेकिन अब हमें कुछ राहत मिली है।”

समाज में चर्चा

यह फैसला नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा और दुष्कर्म के मामलों में सख्ती का संदेश देता है। बीना सहित आसपास के क्षेत्रों में इस फैसले की काफी चर्चा हो रही है। सामाजिक संगठनों ने कोर्ट के इस फैसले की सराहना की है और कहा है कि ऐसे जघन्य अपराधों में सख्त सजा ही एकमात्र समाधान है।

पुलिस की भूमिका

बीना थाने की पुलिस टीम ने शुरुआती जांच में तेजी दिखाई थी। तत्कालीन थाना प्रभारी और जांच अधिकारी की मेहनत से ही आरोपी तक पहुंच बन पाई और सबूत इकट्ठा हो सके। पुलिस ने इस पूरे मामले को काफी संवेदनशीलता से हैंडल किया।

कानूनी पहलू

यह मामला पॉक्सो एक्ट (Protection of Children from Sexual Offences Act) के अंतर्गत आता है, जिसमें नाबालिग के साथ दुष्कर्म पर न्यूनतम 20 वर्ष की सजा का प्रावधान है। कोर्ट ने ठीक इसी प्रावधान के तहत अधिकतम सजा दी है।

यह फैसला सिर्फ एक मामले का फैसला नहीं है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि नाबालिग बच्चों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या दुष्कर्म बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पीड़िता परिवार अब न्याय मिलने के बाद सामान्य जीवन जीने की कोशिश कर रहा है, जबकि आरोपी को अब 20 वर्ष जेल में बिताने होंगे।

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