टॉप-10 कंपनियों में से 9 की मार्केट वैल्यू ₹3.12 लाख करोड़ घटी, रिलायंस को सबसे बड़ा नुकसान !

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मुंबई में शेयर बाजार के लिए बीता सप्ताह भारी उतार-चढ़ाव भरा रहा। देश की मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से शीर्ष 10 कंपनियों में से 9 कंपनियों की कुल मार्केट वैल्यू में भारी गिरावट दर्ज की गई। बीते कारोबारी सप्ताह में इन कंपनियों की संयुक्त मार्केट वैल्यू करीब ₹3.12 लाख करोड़ घट गई। सबसे ज्यादा नुकसान Reliance Industries को हुआ, जिसकी मार्केट वैल्यू अकेले ₹1.34 लाख करोड़ कम हो गई।

शेयर बाजार में कमजोरी का असर लगभग सभी बड़े सेक्टर्स पर दिखाई दिया। बैंकिंग, आईटी, फाइनेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के शेयरों में गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में भी बड़ी कमी आई। वहीं, इस गिरावट के बीच सिर्फ Bharti Airtel ऐसी कंपनी रही, जिसकी मार्केट वैल्यू में बढ़ोतरी दर्ज की गई।

रिलायंस इंडस्ट्रीज को सबसे बड़ा झटका

देश की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल Reliance Industries की मार्केट वैल्यू सप्ताहभर में ₹1.34 लाख करोड़ घटकर ₹18.08 लाख करोड़ रह गई। यह गिरावट निवेशकों के लिए भी बड़ा झटका मानी जा रही है, क्योंकि रिलायंस के शेयरों में बड़ी संख्या में खुदरा और संस्थागत निवेशकों का पैसा लगा हुआ है।

विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक बाजारों में कमजोरी, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और बाजार में मुनाफावसूली के कारण रिलायंस सहित कई ब्लूचिप शेयरों में दबाव देखने को मिला।

SBI और TCS की वैल्यू में भी भारी गिरावट

State Bank of India की मार्केट वैल्यू में ₹52,245 करोड़ की गिरावट आई। इसके बाद बैंक का कुल मार्केट कैप घटकर ₹8.89 लाख करोड़ रह गया।

वहीं देश की प्रमुख आईटी कंपनी Tata Consultancy Services यानी TCS की मार्केट वैल्यू ₹47,415 करोड़ घटकर ₹8.19 लाख करोड़ पर पहुंच गई। आईटी सेक्टर में कमजोरी और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता का असर टीसीएस समेत अन्य टेक कंपनियों पर भी देखने को मिला।

इन कंपनियों को भी हुआ नुकसान

बीते सप्ताह कई अन्य बड़ी कंपनियों की मार्केट वैल्यू में भी गिरावट दर्ज की गई। इनमें बैंकिंग, फाइनेंस और एफएमसीजी सेक्टर की कंपनियां शामिल हैं।

  • Bajaj Finance की मार्केट वैल्यू ₹27,892 करोड़ घटी
  • HDFC Bank को ₹20,630 करोड़ का नुकसान हुआ
  • ICICI Bank की वैल्यू ₹14,290 करोड़ कम हुई
  • Larsen & Toubro का मार्केट कैप ₹9,078 करोड़ घटा
  • Hindustan Unilever की वैल्यू ₹3,970 करोड़ कम हुई
  • Life Insurance Corporation of India यानी LIC की मार्केट वैल्यू ₹2,182 करोड़ घट गई

एयरटेल रही सबसे बड़ी फायदे वाली कंपनी

जहां ज्यादातर कंपनियों की मार्केट वैल्यू में गिरावट आई, वहीं Bharti Airtel ने इस दौरान शानदार प्रदर्शन किया। कंपनी की मार्केट वैल्यू ₹42,470 करोड़ बढ़कर ₹11.60 लाख करोड़ पर पहुंच गई।

विश्लेषकों का मानना है कि टेलीकॉम सेक्टर में मजबूत प्रदर्शन और निवेशकों के भरोसे के कारण एयरटेल के शेयरों में तेजी देखने को मिली।

बीते सप्ताह सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट

भारतीय शेयर बाजार में पिछले सप्ताह लगातार दबाव बना रहा। BSE Sensex सप्ताहभर में करीब 2,090 अंक यानी 2.7% गिर गया। वहीं Nifty 50 में 532 अंकों यानी 2.2% की गिरावट दर्ज की गई।

सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन शुक्रवार को सेंसेक्स 516 अंक टूटकर 77,328 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 150 अंक गिरकर 24,176 के स्तर पर पहुंच गया।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक आर्थिक संकेत, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और ब्याज दरों को लेकर चिंता की वजह से बाजार में दबाव बना रहा।

क्या होता है मार्केट कैपिटलाइजेशन?

मार्केट कैपिटलाइजेशन यानी मार्केट कैप किसी कंपनी के कुल बाजार मूल्य को दर्शाता है। इसे कंपनी के कुल आउटस्टैंडिंग शेयरों की संख्या को एक शेयर की मौजूदा कीमत से गुणा करके निकाला जाता है।

उदाहरण के तौर पर यदि किसी कंपनी के बाजार में 1 करोड़ शेयर मौजूद हैं और एक शेयर की कीमत ₹20 है, तो कंपनी की कुल मार्केट वैल्यू ₹20 करोड़ होगी।

मार्केट कैप बढ़ने और घटने का मतलब

किसी कंपनी का मार्केट कैप उसके शेयर प्राइस के अनुसार बदलता रहता है। जब शेयर की कीमत बढ़ती है तो मार्केट वैल्यू भी बढ़ जाती है। वहीं शेयरों में गिरावट आने पर मार्केट कैप कम हो जाता है।

मार्केट कैप बढ़ने के प्रमुख कारण

  • कंपनी का मजबूत वित्तीय प्रदर्शन
  • अच्छे तिमाही नतीजे
  • सकारात्मक खबरें
  • निवेशकों का बढ़ता भरोसा
  • बाजार में तेजी

मार्केट कैप घटने के कारण

  • खराब वित्तीय परिणाम
  • शेयर बाजार में गिरावट
  • नकारात्मक खबरें
  • विदेशी निवेशकों की बिकवाली
  • आर्थिक अनिश्चितता

निवेशकों और कंपनियों पर क्या पड़ता है असर?

मार्केट कैप बढ़ने से निवेशकों की संपत्ति बढ़ती है, क्योंकि उनके पास मौजूद शेयरों की कीमत भी बढ़ जाती है। वहीं गिरावट आने पर निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ता है।

कंपनियों के लिए भी बड़ा मार्केट कैप काफी महत्वपूर्ण होता है। इससे उन्हें बाजार से पैसा जुटाने, लोन लेने और नई कंपनियों का अधिग्रहण करने में आसानी होती है। दूसरी ओर मार्केट वैल्यू कम होने से कंपनी की वित्तीय ताकत कमजोर पड़ सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि शेयर बाजार में इस तरह की गिरावट अल्पकालिक उतार-चढ़ाव का हिस्सा होती है, लेकिन निवेशकों को सोच-समझकर और लंबी अवधि की रणनीति के साथ निवेश करना चाहिए।

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