इंदौर, 11 सितम्बर 2025
इंदौर शहर से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। कर्ज के बोझ और सूदखोरों की प्रताड़ना से तंग आकर एक युवक ने जहर खाकर आत्महत्या का प्रयास किया। युवक के पास से बरामद सुसाइड नोट ने पूरे मामले को और भी सनसनीखेज बना दिया ह
नेहरू स्टेडियम के पास निगला जहर
संयोगितागंज पुलिस के अनुसार, बुधवार शाम दीपेश पंवार (पुत्र राजेंद्र पंवार, निवासी मयूर नगर) ने नेहरू स्टेडियम के पास जहर खा लिया। हालत बिगड़ने पर राहगीर रोहित ने इंसानियत दिखाते हुए तुरंत उसे एमवाय अस्पताल पहुंचाया। वर्तमान में दीपेश अस्पताल की पांचवीं मंजिल के वार्ड नंबर 27 में गंभीर हालत में भर्ती है।

62 लाख से ज्यादा का कर्ज
पुलिस को दीपेश के कपड़ों से एक सुसाइड नोट मिला है। इसमें उसने लिखा है कि उस पर लगभग 62 लाख रुपए से अधिक का कर्ज है। नोट में दीपेश ने दावा किया है कि उसने सभी कर्जदारों को ब्याज समेत रकम लौटा दी है, इसके बावजूद कुछ लोग उसे लगातार प्रताड़ित कर रहे हैं।
सात लोगों के नाम लिखे
नोट में दीपेश ने सात लोगों के नाम भी दर्ज किए हैं। उसने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि यही लोग उसे बार-बार तंग कर रहे हैं। हालांकि, पुलिस ने अभी तक उन नामों का खुलासा नहीं किया है। जांच टीम नोट की सत्यता और उल्लेखित लोगों की भूमिका की बारीकी से पड़ताल कर रही है।
बयान लेने अस्पताल पहुंची पुलिस
संयोगितागंज पुलिस का कहना है कि वे अस्पताल पहुंचकर दीपेश के बयान दर्ज करने की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन उसकी स्थिति गंभीर होने के कारण बयान दर्ज नहीं किए जा सके। फिलहाल पुलिस ने सुसाइड नोट को केस डायरी में शामिल कर लिया है और आगे की कार्रवाई में जुट गई है।

पहले भी कई शिकायतें दर्ज
इधर, पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक दीपेश के खिलाफ पहले भी कई शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। आरोप है कि वह व्यापार के सिलसिले में झूठे दावे कर कई लोगों से कर्ज लेता था। कई बार वह उधार लेकर रकम लौटाने में देर करता और इसको लेकर विवाद खड़े होते रहे हैं।
शहर में बढ़ते सूदखोरी के मामले
यह मामला सिर्फ एक युवक की मजबूरी नहीं, बल्कि शहर में बढ़ते सूदखोरी और कर्ज के दलदल की तस्वीर भी सामने लाता है। इंदौर सहित प्रदेश के कई हिस्सों में ब्याजखोरी और गैरकानूनी उधारी देने वालों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की मांग लगातार उठती रही है।
पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई
फिलहाल पुलिस ने सुसाइड नोट के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है। प्राथमिक जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार:
- दीपेश के खिलाफ कई लोगों की शिकायतें पहले से दर्ज हैं।
- नोट में दर्ज सात नामों को आधार बनाकर पूछताछ की जाएगी।
- अस्पताल में स्थिति सुधरने के बाद दीपेश का बयान लिया जाएगा, जिससे मामले की असलियत साफ हो सके।

निष्कर्ष
दीपेश पंवार का यह कदम शहर में कर्ज, सूदखोरी और आर्थिक दबाव से टूटते जीवन की काली हकीकत उजागर करता है। सवाल यह भी है कि अगर युवक ने कर्ज चुका दिया था तो फिर प्रताड़ना क्यों जारी रही? क्या वह वास्तव में निर्दोष है या उसके व्यापारिक व्यवहार ने ही उसे इस अंधे मोड़ पर ला खड़ा किया?