श्योपुर/छतरपुर। नेपाल की राजधानी काठमांडू में भड़की हिंसा और आगजनी के बीच तीन दिन तक दहशत में फंसे श्योपुर और छतरपुर के युवक और परिवार आखिरकार सकुशल भारत लौट आए। लौटते वक्त उनकी आंखों में अब भी उस खौफनाक मंजर की तस्वीरें तैर रही थीं, जब पूरा काठमांडू धधक रहा था, सड़कें उपद्रवियों के कब्जे में थीं और मौत का साया हर पल उन पर मंडरा रहा था।

72 घंटे खौफ में कैद रहे श्योपुर के चार युवक
श्योपुर के शाहरुख खान, हर्ष दंडोतिया, अनूप दंडोतिया और विक्की निर्मल अपने दिल्ली निवासी दोस्त राहुल राजपूत के साथ 3 सितंबर को काठमांडू घूमने गए थे। वापसी 9 सितंबर को होनी थी, लेकिन 7 सितंबर को हिंसा भड़क गई और वे उसी शहर में फंस गए।
- चारों युवकों ने बताया कि जैसे ही उपद्रव बढ़ा, उन्होंने तुरंत होम स्टे में शरण ली।
- इंटरनेट बंद था, भारतीय नेटवर्क कभी-कभार ही पकड़ पाता था। परिवार से संपर्क करना बेहद मुश्किल था।
- तीन दिन तक वे मकान मालिक से जो भी भोजन मिला, उसी पर गुजारा करते रहे।
- भारतीय दूतावास से मदद नहीं मिली।
शाहरुख खान ने लौटकर कहा:
“तीन दिन हमें हर पल ऐसा लगा कि अब शायद बचकर नहीं निकल पाएंगे। सड़क पर दंगे और आगजनी थी, गोलियों की आवाजें आती थीं। लौटते वक्त भारत की जमीन पर कदम रखते ही राहत की सांस ली।”
छतरपुर के 4 परिवारों को नेपाली सेना ने सुरक्षित पहुंचाया
छतरपुर से घूमने गए चार परिवार भी हिंसा की चपेट में आ गए थे। परिवारों के सदस्यों में व्यापारी निर्देश अग्रवाल और राजीव मातेले भी शामिल थे।
- सभी परिवार अपनी दो गाड़ियों से लौट रहे थे। उनके साथ अन्य भारतीय पर्यटकों की दो गाड़ियां भी जुड़ गईं।
- काठमांडू से कुछ दूरी पर नेपाली सेना ने उन्हें रोका, पूछताछ की और फिर सुरक्षा का जिम्मा ले लिया।
- भारतीय वाहनों के काफिले के साथ नेपाली सेना की एक गाड़ी लगाई गई और सैन्य टुकड़ी ने उन्हें सुरक्षित सीमा तक पहुंचाया।
- अंततः सभी परिवार रक्सौल-बीरगंज बॉर्डर से भारत में प्रवेश कर गए।
व्यापारी राजीव मातेले ने बताया:
“हमने भारतीय दूतावास को सड़क मार्ग से लौटने की सूचना दी थी। सेना ने हमें सुरक्षित रास्ते से सीमा तक छोड़ा। उस दौरान पूरा सफर मौत के डर के साए में ही गुजरा।”
काठमांडू का हाल
- दंगाइयों ने कई बाजार और सरकारी दफ्तरों को आग के हवाले कर दिया।
- सड़कों पर वाहनों को तोड़ा गया और जगह-जगह आगजनी होती रही।
- पूरे शहर में कर्फ्यू जैसे हालात थे।
- पर्यटक अपने-अपने ठिकानों में छिपे रहे।
निष्कर्ष
नेपाल की हिंसा ने भारतीय पर्यटकों के लिए जानलेवा हालात बना दिए थे। श्योपुर के युवक और छतरपुर के परिवार जब सुरक्षित लौटे, तब जाकर उनके परिजनों की सांसें थमीं। लेकिन उनके बयान बताते हैं कि उन 72 घंटों का खौफ वे जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे।