भोपाल, 18 सितंबर 2025
भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) और उससे जुड़े हमीदिया अस्पताल में हार्ट अटैक मरीजों के लिए बड़ा बदलाव होने जा रहा है। यहां आने वाले मरीजों में से आधे 49 साल से कम उम्र के होते हैं। ऐसे में अस्पताल प्रशासन ने अब ‘गोल्डन आवर मैनेजमेंट’ का नया प्रोटोकॉल तैयार किया है, जिससे मरीजों की जान बचाने की संभावना चार गुना तक बढ़ जाएगी।
यह प्रोटोकॉल 15 अक्टूबर से नई एडवांस कैथलैब के शुभारंभ के साथ लागू किया जाएगा। इससे पहले 1 अक्टूबर से लैब का ट्रायल शुरू होगा और आपातकालीन विभाग व कार्डियोलॉजी टीम को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

क्यों जरूरी है ‘गोल्डन आवर प्रोटोकॉल’?
कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. अजय शर्मा बताते हैं कि जब हार्ट अटैक आता है, तो ब्लॉकेज के कारण दिल के किसी हिस्से में खून का प्रवाह रुक जाता है। इससे उस हिस्से की मांसपेशियां (मसल्स) डेड होने लगती हैं। अगर 90 मिनट से 2 घंटे (गोल्डन आवर) के भीतर एंजियोप्लास्टी कर दी जाए और ब्लड सप्लाई बहाल हो जाए तो मसल्स रिवाइव हो जाती हैं और दिल पूरी तरह पहले जैसी स्थिति में लौट सकता है। लेकिन देरी होने पर यह नुकसान स्थायी हो जाता है।
वर्तमान स्थिति: गोल्डन आवर निकल जाता है
अभी स्थिति यह है कि मरीज इमरजेंसी से कार्डियोलॉजी विभाग तक पहुंचने और फिर पुरानी कैथलैब तक ले जाने में दो घंटे से ज्यादा का समय लग जाता है।
- 750 मीटर का रास्ता स्ट्रेचर या व्हीलचेयर से तय करना पड़ता है।
- रास्ते में चढ़ाई, ढलान और निर्माण कार्य की वजह से 15-20 मिनट का अतिरिक्त समय लग जाता है।
- बारिश या धूप से बचाव की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे मरीज और परिजन परेशान होते हैं।
यही वजह है कि हमीदिया अस्पताल में हर साल आने वाले 1200 से ज्यादा मरीजों में से कई लोग समय पर इलाज न मिलने से स्थायी हृदय रोग का शिकार हो जाते हैं।

नया बदलाव: सेकंड्स में शुरू होगा इलाज
नई कैथलैब हमीदिया अस्पताल के नए भवन की तीसरी मंजिल पर बनाई गई है।
- इसके ठीक सामने कार्डियक आईसीयू है।
- दोनों के बीच की दूरी महज 70 फीट है।
- मरीज को आईसीयू से लैब तक पहुंचाने में अब सिर्फ सेकंड्स लगेंगे।
- 5 से 7 मिनट में प्रोसीजर शुरू हो सकेगा।
नई लैब में अत्याधुनिक मशीनें लगी हैं, जिनसे सर्जरी अधिक सटीक और तेज होगी।
प्रोटोकॉल कैसे काम करेगा?
- एम्बुलेंस और अन्य अस्पतालों से समन्वय:
– हार्ट अटैक लक्षण वाले मरीज की जानकारी पहले से कार्डियोलॉजी विभाग को भेजी जाएगी।
– विभाग इलाज की तैयारी मरीज आने से पहले कर लेगा। - इमरजेंसी में तुरंत पहचान:
– इमरजेंसी विभाग में स्टाफ को प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि हार्ट अटैक के लक्षण वाले मरीज को तुरंत कार्डियोलॉजी टीम को रेफर किया जा सके। - ड्यूटी रोस्टर:
– कार्डियोलॉजी विभाग का एक डॉक्टर हर समय इमरजेंसी ड्यूटी पर रहेगा। - स्पेशल लिफ्ट:
– मरीजों के लिए एक लिफ्ट सिर्फ कार्डियक पेशेंट्स के लिए रिजर्व रखी जाएगी, जिससे उन्हें तेजी से तीसरी मंजिल तक पहुंचाया जा सके।
अगले चरण की योजना: जिलों तक बढ़ेगी व्यवस्था
पहले चरण में भोपाल और आसपास के मरीजों को इसका फायदा मिलेगा। दूसरे चरण में आसपास के जिलों को जोड़ा जाएगा। जहां मरीजों को अस्पताल तक पहुंचने में 2 घंटे से ज्यादा लगते हैं, वहां रास्ते में ही टीएनके-टीपीए इंजेक्शन देने की व्यवस्था की जाएगी। यह इंजेक्शन रक्त के थक्कों को घोलता है और दिल की मांसपेशियों को होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोक देता है।
एक मरीज की मिसाल: कैसे निकल गया गोल्डन आवर
कोलार निवासी अनमोल (37) को हाल ही में अचानक सीने में तेज दर्द हुआ। हमीदिया अस्पताल पहुंचने तक उनके लक्षण बढ़ चुके थे। जांच के बाद उन्हें एंजियोग्राफी के लिए 750 मीटर दूर पुरानी कैथलैब ले जाया गया। स्टेंट डाले जाने तक उनका गोल्डन आवर निकल चुका था, जिसके कारण उनके दिल की मांसपेशियों को स्थायी नुकसान हो गया। डॉक्टरों ने चेताया है कि अब उन्हें जिंदगीभर सावधानी बरतनी होगी।
भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में हार्ट अटैक मरीजों के लिए नया प्रोटोकॉल: ‘गोल्डन आवर’ में इलाज से चार गुना बढ़ेगी जिंदगी बचने की संभावना
भोपाल, 18 सितंबर 2025
भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) और उससे जुड़े हमीदिया अस्पताल में हार्ट अटैक मरीजों के लिए बड़ा बदलाव होने जा रहा है। यहां आने वाले मरीजों में से आधे 49 साल से कम उम्र के होते हैं। ऐसे में अस्पताल प्रशासन ने अब ‘गोल्डन आवर मैनेजमेंट’ का नया प्रोटोकॉल तैयार किया है, जिससे मरीजों की जान बचाने की संभावना चार गुना तक बढ़ जाएगी।
यह प्रोटोकॉल 15 अक्टूबर से नई एडवांस कैथलैब के शुभारंभ के साथ लागू किया जाएगा। इससे पहले 1 अक्टूबर से लैब का ट्रायल शुरू होगा और आपातकालीन विभाग व कार्डियोलॉजी टीम को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
क्यों जरूरी है ‘गोल्डन आवर प्रोटोकॉल’?
कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. अजय शर्मा बताते हैं कि जब हार्ट अटैक आता है, तो ब्लॉकेज के कारण दिल के किसी हिस्से में खून का प्रवाह रुक जाता है। इससे उस हिस्से की मांसपेशियां (मसल्स) डेड होने लगती हैं। अगर 90 मिनट से 2 घंटे (गोल्डन आवर) के भीतर एंजियोप्लास्टी कर दी जाए और ब्लड सप्लाई बहाल हो जाए तो मसल्स रिवाइव हो जाती हैं और दिल पूरी तरह पहले जैसी स्थिति में लौट सकता है। लेकिन देरी होने पर यह नुकसान स्थायी हो जाता है।
वर्तमान स्थिति: गोल्डन आवर निकल जाता है
अभी स्थिति यह है कि मरीज इमरजेंसी से कार्डियोलॉजी विभाग तक पहुंचने और फिर पुरानी कैथलैब तक ले जाने में दो घंटे से ज्यादा का समय लग जाता है।
- 750 मीटर का रास्ता स्ट्रेचर या व्हीलचेयर से तय करना पड़ता है।
- रास्ते में चढ़ाई, ढलान और निर्माण कार्य की वजह से 15-20 मिनट का अतिरिक्त समय लग जाता है।
- बारिश या धूप से बचाव की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे मरीज और परिजन परेशान होते हैं।
यही वजह है कि हमीदिया अस्पताल में हर साल आने वाले 1200 से ज्यादा मरीजों में से कई लोग समय पर इलाज न मिलने से स्थायी हृदय रोग का शिकार हो जाते हैं।
नया बदलाव: सेकंड्स में शुरू होगा इलाज
नई कैथलैब हमीदिया अस्पताल के नए भवन की तीसरी मंजिल पर बनाई गई है।
- इसके ठीक सामने कार्डियक आईसीयू है।
- दोनों के बीच की दूरी महज 70 फीट है।
- मरीज को आईसीयू से लैब तक पहुंचाने में अब सिर्फ सेकंड्स लगेंगे।
- 5 से 7 मिनट में प्रोसीजर शुरू हो सकेगा।
नई लैब में अत्याधुनिक मशीनें लगी हैं, जिनसे सर्जरी अधिक सटीक और तेज होगी।
प्रोटोकॉल कैसे काम करेगा?
- एम्बुलेंस और अन्य अस्पतालों से समन्वय:
– हार्ट अटैक लक्षण वाले मरीज की जानकारी पहले से कार्डियोलॉजी विभाग को भेजी जाएगी।
– विभाग इलाज की तैयारी मरीज आने से पहले कर लेगा। - इमरजेंसी में तुरंत पहचान:
– इमरजेंसी विभाग में स्टाफ को प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि हार्ट अटैक के लक्षण वाले मरीज को तुरंत कार्डियोलॉजी टीम को रेफर किया जा सके। - ड्यूटी रोस्टर:
– कार्डियोलॉजी विभाग का एक डॉक्टर हर समय इमरजेंसी ड्यूटी पर रहेगा। - स्पेशल लिफ्ट:
– मरीजों के लिए एक लिफ्ट सिर्फ कार्डियक पेशेंट्स के लिए रिजर्व रखी जाएगी, जिससे उन्हें तेजी से तीसरी मंजिल तक पहुंचाया जा सके।
अगले चरण की योजना: जिलों तक बढ़ेगी व्यवस्था
पहले चरण में भोपाल और आसपास के मरीजों को इसका फायदा मिलेगा। दूसरे चरण में आसपास के जिलों को जोड़ा जाएगा। जहां मरीजों को अस्पताल तक पहुंचने में 2 घंटे से ज्यादा लगते हैं, वहां रास्ते में ही टीएनके-टीपीए इंजेक्शन देने की व्यवस्था की जाएगी। यह इंजेक्शन रक्त के थक्कों को घोलता है और दिल की मांसपेशियों को होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोक देता है।
एक मरीज की मिसाल: कैसे निकल गया गोल्डन आवर
कोलार निवासी अनमोल (37) को हाल ही में अचानक सीने में तेज दर्द हुआ। हमीदिया अस्पताल पहुंचने तक उनके लक्षण बढ़ चुके थे। जांच के बाद उन्हें एंजियोग्राफी के लिए 750 मीटर दूर पुरानी कैथलैब ले जाया गया। स्टेंट डाले जाने तक उनका गोल्डन आवर निकल चुका था, जिसके कारण उनके दिल की मांसपेशियों को स्थायी नुकसान हो गया। डॉक्टरों ने चेताया है कि अब उन्हें जिंदगीभर सावधानी बरतनी होगी।