सागर, रहली।
जिले के रहली में खाद की कालाबाज़ारी और अवैध भंडारण का बड़ा मामला सामने आया है। प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने बुधवार को छापामार कार्रवाई करते हुए 350 बोरी खाद जब्त की। चौंकाने वाली बात यह रही कि इस खाद की खरीद-फरोख्त फर्जी टैक्स इनवॉइस के माध्यम से की जा रही थी। मामले के खुलासे के बाद कृषि विभाग की शिकायत पर तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

ट्रैक्टर से पकड़ी गई पहली खेप
वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि रहली क्षेत्र में अवैध रूप से खाद का भंडारण किया जा रहा है। सूचना के आधार पर संयुक्त टीम ने एक ट्रैक्टर को रोका। ट्रैक्टर से 50 बोरी डीएपी खाद बरामद हुई। पूछताछ में चालक इंद्रजीत सिंह ने खुलासा किया कि यह खाद वह सोमवती तिवारी के घर से भाड़े पर लेकर आया था।
घर से बरामद हुई 300 बोरी खाद
इंद्रजीत की जानकारी पर टीम ने खमरिया स्थित सोमवती तिवारी के घर पर दबिश दी। यहां टीम भी चौंक गई जब घर के अंदर 300 बोरी जिप्सम ग्रैन्युल्स खाद का भंडारण मिला। ये खाद कमरे के भीतर छुपाकर रखी गई थी।
फर्जी टैक्स इनवॉइस से होता रहा कारोबार
जांच में सामने आया कि खाद की सप्लाई मेसर्स पीके ट्रेडर्स, कैराना (उत्तर प्रदेश) के नाम से जारी टैक्स इनवॉइस पर की जा रही थी। लेकिन कृषि विभाग की जांच में यह फर्म अस्तित्वहीन पाई गई। यानी टैक्स इनवॉइस पूरी तरह से फर्जी थे। अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से इसी तरीके से खाद की अवैध खरीद-फरोख्त की जा रही थी।

सैंपल जांच के लिए भेजे
बरामद खाद का सैंपल लेकर उसे प्रयोगशाला भेजा गया है। अधिकारियों ने बताया कि जांच रिपोर्ट से यह भी स्पष्ट होगा कि जब्त की गई खाद की गुणवत्ता क्या है और कहीं किसानों को नकली खाद तो नहीं बेची जा रही थी।
तीन आरोपियों पर केस दर्ज
कृषि विभाग की शिकायत पर रहली थाना पुलिस ने
- पंकज दुबे
- सोमवती तिवारी
- मेसर्स पीके ट्रेडर्स (फर्जी फर्म)
के खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत केस दर्ज किया है।
थाना प्रभारी सुनील शर्मा ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है और जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
किसानों को होने वाला नुकसान
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह का अवैध खाद भंडारण और फर्जी इनवॉइस से किया जाने वाला कारोबार किसानों के लिए घातक है। यदि खाद की आपूर्ति समय पर न हो या नकली खाद पहुंचाई जाए तो उनकी फसलों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
निचोड़
रहली में खाद की कालाबाज़ारी और फर्जी बिलिंग का यह मामला साफ दर्शाता है कि मुनाफाखोर तत्व किसानों की मेहनत और सरकारी व्यवस्था के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे रैकेट के तार कहां तक खींच पाता है और दोषियों को कितनी सख्त सज़ा मिलती है।