सागर।
सागर-खुरई मार्ग पर गुरुवार रात एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, लेकिन इसके कारण पूरे इलाके में 16 घंटे तक यातायात पूरी तरह ठप रहा। दरअसल, राखड़ से भरा एक भारी ट्राला पुलिया के नीचे फंस गया, जिसे निकालने में पुलिस और प्रशासन को घंटों मशक्कत करनी पड़ी। शुक्रवार दोपहर को जब क्रेन और हाइड्रा की मदद से ट्राले को बाहर निकाला गया, तब जाकर यातायात बहाल हो सका।

घटना कैसे हुई?
जानकारी के मुताबिक, गुरुवार रात करीब 8 बजे भीलवाड़ा से कटनी जा रहा राखड़ (सीमेंट पाउडर) से लदा ट्राला पुलिया में फंस गया। सागर-बीना रेल लाइन पर स्थित श्री देव ठाकुर बाबा मंदिर के नीचे बने रेलवे फाटक को अप-डाउन ट्रैक पर तीसरी लाइन के ओवरहालिंग कार्य के लिए 11 दिनों के लिए बंद किया गया है।
इस वजह से सागर-खुरई मार्ग पर आने-जाने वाले वाहनों को पास की पुलिया से होकर गुजरना पड़ रहा है। लेकिन पुलिया की हालत बेहद खराब है। उसमें पानी और कीचड़ भरा हुआ है। ट्राला जैसे ही पुलिया में उतरा, भारी वजन के कारण कीचड़ में धंस गया और बीच में ही फंस गया।
यातायात पूरी तरह बाधित
ट्राला फंसने के कारण सागर-खुरई रोड पूरी तरह बंद हो गया। राहगीरों और अन्य वाहनों को मजबूरन वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ा। जरुआखेड़ा होकर खुरई और मालथौन होकर सागर जाने वाले रास्तों पर गाड़ियों की भीड़ बढ़ गई।
स्थानीय लोगों ने बताया कि करीब 16 घंटे तक यातायात बाधित रहा। इस दौरान न सिर्फ यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ी बल्कि जरूरी सामान ढोने वाले ट्रक और बसें भी फंसी रहीं।

ट्राले को निकालने में आई मुश्किलें
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन रात में अंधेरा और पुलिया में पानी भरे होने के कारण राहत कार्य शुरू नहीं किया जा सका। शुक्रवार सुबह क्रेन और हाइड्रा मशीनों की मदद से ट्राले को बाहर निकालने की कोशिश शुरू हुई। लगातार कई घंटों की मेहनत के बाद करीब 12 बजे ट्राला बाहर निकाला जा सका।
ट्राला चालक छोटेलाल ने बताया कि उसे रेलवे फाटक बंद होने की जानकारी नहीं थी। वह अन्य वाहनों के पीछे-पीछे पुलिया में उतरा था। लेकिन कीचड़ और पानी के कारण ट्राला फंस गया।
रेलवे और प्रशासन पर सवाल
इस पूरी घटना ने रेलवे और प्रशासन की लापरवाही को उजागर कर दिया। फाटक बंद करने के दौरान रेलवे ने कोई वैकल्पिक मार्ग तैयार नहीं कराया, न ही सड़क की मरम्मत की गई। नतीजा यह हुआ कि भारी वाहनों को खतरनाक पुलिया से होकर गुजरना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पुलिया की मरम्मत की जाती और सुरक्षित मार्ग बनाया जाता तो यह स्थिति नहीं बनती।

वैकल्पिक मार्गों की जानकारी
- बीना से सागर आने वाले वाहन: मालथौन होकर सफर कर सकते हैं।
- सागर से खुरई, राहतगढ़, किशनपुरा जाने वाले वाहन: इन्हीं मार्गों से होकर आवागमन करना होगा।
- जरुआखेड़ा से बांदरी-मालथौन मार्ग: बीना पहुंचने का विकल्प रहेगा।
लगातार हादसों का खतरा
स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही वैकल्पिक और सुरक्षित मार्ग नहीं बनाया गया तो ऐसी घटनाएं बार-बार होंगी। पुलिया की खराब हालत और पानी-कीचड़ की वजह से छोटे वाहन भी हर समय खतरे में रहते हैं।

📍 निष्कर्ष:
सागर-खुरई मार्ग मध्यप्रदेश का एक अहम संपर्क मार्ग है। ट्राला फंसने की यह घटना महज एक चेतावनी है कि बिना ठोस इंतजाम किए रेलवे या प्रशासनिक कार्यों के लिए फाटक बंद करना कितनी बड़ी परेशानी खड़ी कर सकता है। अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि रेलवे और प्रशासन इस लापरवाही से सबक लेकर आगे क्या कदम उठाते हैं।