- 25 एकड़ का परिसर: यह नवरात्रि पंडाल सामान्य धार्मिक आयोजनों से कई गुना बड़ा है। इसमें देवी दुर्गा के साथ-साथ देशभर के 12 ज्योतिर्लिंगों की भव्य प्रतिकृतियां स्थापित की गई हैं।
- 550 से अधिक कारीगर: तीन महीनों तक दिन-रात मेहनत करके कलाकारों ने इस आयोजन स्थल को तैयार किया है।
- पंडाल में विशाल झांकियां और आकर्षक लाइटिंग श्रद्धालुओं को आध्यात्मिकता के साथ-साथ दृश्य सौंदर्य का अनुभव कराती है।

2. आध्यात्मिक साधना और विशेष धार्मिक क्रियाएं
- आयोजन का नाम रखा गया है – सनातन सिद्धि नवरात्रि महोत्सव।
- इसमें 11 दिनों तक होने वाली साधनाओं में शामिल हैं:
- 1 करोड़ मंत्र जाप
- 1 करोड़ कुमकुम अर्चन
- 10 लाख हवन आहुतियां
- 11 हजार स्वर्ण-लेपित अष्टलक्ष्मी कलश: प्रत्येक कलश को इन मंत्रों और आहुतियों से “सिद्ध” किया जा रहा है।
3. 11 हजार कलश और उनमें दिव्य सामग्रियां
- प्रत्येक कलश में 451 दिव्य वस्तुएं रखी जा रही हैं, जिनमें शामिल हैं:
- दक्षिणावर्ती शंख
- नव रत्न और 32 प्रकार के उपरत्न
- दो दुर्लभ रुद्राक्ष
- पंचधातु (सोना, चांदी, तांबा, पीतल, कांसा)
- 154 प्रकार की दुर्लभ औषधियां
- 999 शुद्धता वाला 5 ग्राम का चांदी का सिक्का (महालक्ष्मी मुद्रित)
- इन कलशों को महालक्ष्मी को आकर्षित करने और साधकों के लिए दिव्य ऊर्जा का केंद्र माना गया है।

4. सामाजिक कल्याण की पहल
यह आयोजन केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें समाज upliftment पर भी जोर दिया गया है:
- 108 इलेक्ट्रिक ऑटो का दान: आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए।
- ₹300 करोड़ का हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज: सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को सुरक्षित स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए।
- हजारों स्वयंसेवकों की सेवा: भोजन प्रसादी, संस्कार केंद्र और सामाजिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी।

5. अध्यात्म और भव्यता का अनूठा संगम
- आयोजन में उपयोग हो रहा है:
- 300 क्विंटल शुद्ध मेवे और औषधियां
- 70 क्विंटल देशी गाय का घी
- 20 क्विंटल चंदनादि वृक्षों की समिधाएं
- खजूर, किशमिश, आंवला, दुर्लभ जड़ी-बूटियां
- यह सब मिलकर हवन और पूजा को दिव्य ऊर्जा से भरने का काम करता है।
6. सांस्कृतिक और सामाजिक समरसता
- प्रतिदिन भजन संध्या, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और विशेष साधनाएं होंगी।
- श्रद्धालुओं को संत दर्शन और आध्यात्मिक मार्गदर्शन का अवसर मिलेगा।
- बच्चे, युवा और बुजुर्ग—सभी के लिए खेल, संस्कार और सेवा मंच की व्यवस्था।

7. धार्मिक और सामाजिक संदेश
- यह आयोजन केवल आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि इसका मुख्य संदेश है – धर्म के साथ समाजसेवा।
- भक्ति और सेवा दोनों को एक साथ जोड़कर इसे “आध्यात्मिक कल्याण + सामाजिक कल्याण” का आदर्श बनाया गया है।
- नवरात्रि का यह महोत्सव दिखाता है कि आस्था केवल मंदिरों में नहीं, बल्कि लोगों के जीवन सुधारने में भी व्यक्त हो सकती है।