प्रारंभिक जीवन और जन्म स्थान
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हुआ था। वे भारतीय राजनीति के एक ऐसे अद्वितीय नेता थे, जिन्होंने अपनी दृढ़ता, वाणी और विचारधारा से देशवासियों के दिलों में अपनी अमिट छाप छोड़ी। उनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी एक शिक्षक और कवि थे, जिनसे अटल जी को लेखन और साहित्य का गुण मिला।

राजनीतिक सफर का प्रारंभ
अटल बिहारी वाजपेयी ने अपनी राजनीति की शुरुआत 1951 में भारतीय जनसंघ के गठन के साथ की। वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रमुख संस्थापक सदस्यों में से एक थे और दशकों तक पार्टी का बड़ा चेहरा बने रहे। उनका राजनीतिक जीवन न केवल एक नेता बल्कि एक कुशल वक्ता, कूटनीतिज्ञ और कवि के रूप में भी उभरा।
तीन बार प्रधानमंत्री का कार्यकाल
अटल बिहारी वाजपेयी भारत के तीन बार प्रधानमंत्री रहे।
- 1996: पहली बार वे 13 दिनों के लिए प्रधानमंत्री बने। इस दौरान बहुमत साबित नहीं कर पाने के कारण उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
- 1998-1999: दूसरी बार वे 13 महीने के लिए प्रधानमंत्री बने। सहयोगी पार्टियों के समर्थन वापस लेने के कारण सरकार गिर गई, और 1999 में फिर से आम चुनाव हुए।
- 1999-2004: 13 अक्टूबर 1999 को अटल बिहारी वाजपेयी तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। इस बार उन्होंने 5 साल का कार्यकाल पूरा किया और भारत के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने, जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया।

विदेश नीति और कूटनीति में योगदान
1977 से 1979 तक वाजपेयी मोराजी देसाई के मंत्रिमंडल में विदेश मंत्री रहे। इस दौरान उन्होंने भारत के विदेश संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1998 में पोखरण परमाणु परीक्षण उनके प्रधानमंत्री काल का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय था, जिसने भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत और आत्मनिर्भर देश के रूप में स्थापित किया।

भारतीय राजनीति में उनका योगदान
अटल बिहारी वाजपेयी दशकों तक भारतीय राजनीति में एक आदर्श नेता के रूप में खड़े रहे। उन्होंने साफ-सुथरी राजनीति की मिसाल पेश की। 1996 में बहुमत साबित न कर पाने पर उन्होंने खरीद-फरोख्त का सहारा लेने के बजाय इस्तीफा देना उचित समझा।
उनकी सरकार के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना (गोल्डन क्वाड्रिलेटरल), सर्व शिक्षा अभियान, और ग्रामीण विकास की कई योजनाएं शुरू की गईं, जिन्होंने देश के विकास में मील का पत्थर साबित किया।
सम्मान और उपलब्धियां
अटल बिहारी वाजपेयी को उनके योगदान के लिए 27 मार्च 2015 को भारत रत्न से सम्मानित किया गया। यह देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।

अटल जी का निधन और स्मरण
16 अगस्त 2018 को दिल्ली के एम्स अस्पताल में 93 वर्ष की उम्र में अटल बिहारी वाजपेयी का निधन हो गया। उनकी समाधि “सदैव अटल” दिल्ली में स्थित है।
100वीं जयंती पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम
आज, 25 दिसंबर 2024 को उनकी 100वीं जयंती के अवसर पर दिल्ली स्थित उनकी समाधि “सदैव अटल” पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और कई अन्य गणमान्य नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अटल जी को याद करते हुए लिखा कि 25 दिसंबर का यह दिन सुशासन का “अटल दिवस” है। उन्होंने अटल जी के स्वच्छ और आदर्श राजनीति के प्रति समर्पण को सराहा।

अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के एक अद्वितीय और प्रेरणादायक व्यक्तित्व थे। उनके विचार, नेतृत्व और योगदान आज भी देश को प्रेरित करते हैं। उनके आदर्श और विचारधारा आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा मार्गदर्शक रहेंगे।