आजीवन कारावास की सजा के एक दिन बाद कैदी ने छत से कूदकर दी जान, प्रशासनिक जांच के आदेश !

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छतरपुर जिला जेल से गुरुवार को एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। पॉक्सो एक्ट के तहत आजीवन कारावास की सजा पाए एक युवक कैदी ने जेल परिसर में छत से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। घायल अवस्था में उसे तत्काल जिला अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद जेल प्रशासन से लेकर जिला प्रशासन तक में हड़कंप मच गया है।

एक दिन पहले ही सुनाई गई थी आजीवन कारावास की सजा

मृतक कैदी की पहचान 22 वर्षीय शंकर पिता शंकर प्रजापति, निवासी गढ़ीमलहरा थाना क्षेत्र के रूप में हुई है। शंकर वर्ष 2022 से पॉक्सो एक्ट के एक मामले में जिला जेल में बंद था और पिछले तीन वर्षों से विचाराधीन कैदी के रूप में सजा काट रहा था। बुधवार को जिला न्यायालय ने उसे नाबालिग से संबंधित अपराध में दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

बैरक से छत पर चढ़कर लगाई छलांग

जेल सूत्रों के अनुसार, गुरुवार को शंकर ने जिला जेल की बैरक नंबर-1 में पीछे की ओर बने बाथरूम के रास्ते से छत पर चढ़ने का रास्ता बनाया। वहां से वह जेल की महिला सेल की ओर स्थित गैलरी में पहुंचा, जहां का फर्श आरसीसी कंक्रीट का बना हुआ है। इसी गैलरी से उसने सीधे जेल अस्पताल के सामने छलांग लगा दी। गिरने के दौरान उसके सिर में गंभीर चोट आई, जिससे मौके पर ही उसकी हालत नाजुक हो गई।

अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने किया मृत घोषित

घटना की जानकारी मिलते ही जेल प्रशासन ने आनन-फानन में शंकर को जिला अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कर शव परिजनों को सौंपने की तैयारी की जा रही है।

सजा से मानसिक रूप से था बेहद आहत

जेल प्रशासन का कहना है कि सजा सुनाए जाने के बाद से ही शंकर मानसिक रूप से बेहद परेशान और अवसाद में था। बताया गया है कि सजा के बाद उसे बैरक नंबर-4 में शिफ्ट किया गया था। प्रारंभिक तौर पर यह माना जा रहा है कि आजीवन कारावास की सजा से आहत होकर ही उसने यह आत्मघाती कदम उठाया।

नाबालिग को भगाने का था आरोप

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2022 में शंकर पर गांव की ही 12 वर्षीय नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर भगाकर ले जाने का आरोप लगा था। इस मामले में नाबालिग लड़की के परिजनों की शिकायत पर गढ़ीमलहरा थाने में पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने आरोपी शंकर को गिरफ्तार कर जिला जेल भेज दिया था।

सजा के बाद नाबालिग की कराई गई दूसरी शादी

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, शंकर को सजा सुनाए जाने के बाद नाबालिग लड़की के परिजनों ने उसकी शादी गांव के ही युवक राहुल यादव से करा दी। हालांकि लड़की के नाबालिग होने के कारण यह शादी भी कानून के दायरे में अपराध मानी गई। इस मामले में पुलिस ने राहुल यादव के खिलाफ भी पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज कर उसे 7 दिसंबर 2025 को जेल भेज दिया है।

कलेक्टर ने गठित की जांच समिति

घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं। कलेक्टर द्वारा अपर कलेक्टर (ADM) मिलिंद नागदेव की अध्यक्षता में एक जांच समिति गठित की गई है। यह समिति जेल की सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी में हुई चूक, कैदी की मानसिक स्थिति और घटना के पूरे घटनाक्रम की जांच करेगी।

उठे जेल सुरक्षा और निगरानी पर सवाल

इस घटना के बाद जिला जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सवाल यह है कि कैदी बैरक से छत तक कैसे पहुंचा और इतने संवेदनशील स्थान पर निगरानी क्यों नहीं थी। जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि यह घटना लापरवाही का नतीजा थी या किसी गंभीर चूक का।

फिलहाल पुलिस और प्रशासन पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रहा है। जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

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