सागर। युवा नेता Aviraj Singh ने कहा है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में आर्थिक राष्ट्रवाद केवल एक विचार नहीं, बल्कि देश को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा देशवासियों से किए गए आर्थिक राष्ट्रवाद के आह्वान का समर्थन करते हुए कहा कि आज प्रत्येक भारतीय नागरिक को राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए अपने व्यवहार, उपभोग और जीवनशैली में बदलाव लाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध, आर्थिक अस्थिरता तथा पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का प्रभाव सीधे भारत की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देता है। ऐसे समय में देश को आर्थिक रूप से सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाए रखने के लिए केवल सरकारों के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि जनभागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि नागरिक छोटे-छोटे स्तर पर ईंधन, ऊर्जा और संसाधनों की बचत को अपनी आदत बना लें, तो इसका बड़ा सकारात्मक प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
विदेशी तेल पर निर्भरता बड़ी चुनौती
अविराज सिंह ने कहा कि भारत अपनी आवश्यकता का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। इसके कारण हर वर्ष देश को भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी प्रकार का युद्ध, तनाव या आर्थिक संकट उत्पन्न होता है, तब सबसे पहले कच्चे तेल की कीमतें प्रभावित होती हैं और इसका सीधा असर भारत जैसे विकासशील देशों पर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि तेल की कीमतों में वृद्धि केवल पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसका प्रभाव परिवहन, उद्योग, कृषि और बाजार व्यवस्था पर भी दिखाई देता है। परिणामस्वरूप खाद्य पदार्थों से लेकर दैनिक उपयोग की वस्तुओं तक की कीमतें बढ़ने लगती हैं, जिससे आम नागरिक का जीवन प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में ईंधन की बचत केवल व्यक्तिगत लाभ का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाती है।
छोटी बचत से मजबूत होगी अर्थव्यवस्था
अविराज सिंह ने कहा कि यदि देश के करोड़ों नागरिक प्रतिदिन थोड़ी-थोड़ी ईंधन बचत का संकल्प लें, तो यह भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में ऐतिहासिक योगदान साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि आम नागरिक अपने दैनिक जीवन में कई छोटे बदलाव कर ईंधन की खपत कम कर सकते हैं।
उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि छोटी दूरी के लिए मोटर वाहनों के बजाय पैदल चलने या साइकिल का उपयोग किया जा सकता है। जहां संभव हो, लोग सार्वजनिक परिवहन जैसे बस, मेट्रो और लोकल ट्रेनों का अधिक उपयोग करें। इसके अलावा कार-पूलिंग जैसी व्यवस्था को अपनाने से न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि यातायात और प्रदूषण की समस्या में भी कमी आएगी।
उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि लोग सुविधा के साथ-साथ जिम्मेदारी को भी समझें। यदि प्रत्येक व्यक्ति केवल अपनी जरूरत के अनुसार संसाधनों का उपयोग करे, तो देश की बड़ी आर्थिक चुनौतियों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
आत्मनिर्भर भारत में जनभागीदारी जरूरी
युवा नेता अविराज सिंह ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का सपना केवल सरकारी योजनाओं और नीतियों से पूरा नहीं होगा। इसके लिए देश के 140 करोड़ नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और पूरी दुनिया भारत की आर्थिक शक्ति को गंभीरता से देख रही है।
उन्होंने कहा कि जब देश के नागरिक राष्ट्रहित को ध्यान में रखते हुए एक दिशा में आगे बढ़ते हैं, तब वह आंदोलन दुनिया का सबसे बड़ा जनआंदोलन बन जाता है। भारत की ताकत उसकी जनसंख्या नहीं, बल्कि उसकी जागरूक और जिम्मेदार जनता है। यदि लोग अपने व्यवहार में अनुशासन और जिम्मेदारी को शामिल करें, तो देश को आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि आज देश को ऐसे नागरिकों की आवश्यकता है जो केवल अधिकारों की बात न करें, बल्कि अपने कर्तव्यों को भी समझें। राष्ट्र निर्माण केवल सरकारों का दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है।
आर्थिक राष्ट्रवाद का व्यापक अर्थ
अविराज सिंह ने कहा कि आर्थिक राष्ट्रवाद का अर्थ केवल आर्थिक नीतियों तक सीमित नहीं है। यह एक ऐसी सोच है, जिसमें देश के संसाधनों, उत्पादन और आर्थिक हितों को प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने कहा कि जब नागरिक स्वदेशी उत्पादों को अपनाते हैं, अनावश्यक खर्च कम करते हैं और संसाधनों का जिम्मेदारी से उपयोग करते हैं, तब वे प्रत्यक्ष रूप से देश की आर्थिक मजबूती में योगदान देते हैं।
उन्होंने कहा कि आर्थिक राष्ट्रवाद का उद्देश्य किसी अन्य देश का विरोध करना नहीं, बल्कि अपने देश की आर्थिक क्षमता को मजबूत करना है। यदि भारत को विश्व की सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होना है, तो हमें आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना होगा।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा संरक्षण, ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी अभियान मानने की गलती नहीं करनी चाहिए। यह आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा विषय है। यदि आज संसाधनों का संतुलित उपयोग नहीं किया गया, तो भविष्य में गंभीर आर्थिक और पर्यावरणीय संकट उत्पन्न हो सकते हैं।
युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण
अविराज सिंह ने कहा कि देश के युवाओं की भूमिका इस अभियान में सबसे महत्वपूर्ण है। युवा वर्ग यदि जागरूक होकर ईंधन बचत, स्वदेशी उत्पादों के उपयोग और जिम्मेदार जीवनशैली को अपनाता है, तो यह पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन सकता है। उन्होंने कहा कि आज सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी युवाओं को आर्थिक राष्ट्रवाद का संदेश फैलाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को केवल आधुनिक सुविधाओं का उपभोक्ता नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक बनना होगा। देश के विकास में युवाओं की ऊर्जा और भागीदारी सबसे बड़ी शक्ति बन सकती है।
देशहित में सामूहिक संकल्प की आवश्यकता
अपने संदेश के अंत में अविराज सिंह ने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि सभी लोग मिलकर यह संकल्प लें कि वे ईंधन की बचत करेंगे, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देंगे, संसाधनों का जिम्मेदारी से उपयोग करेंगे और आर्थिक रूप से मजबूत भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएंगे।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित में की गई छोटी-सी बचत भी देश की बड़ी शक्ति बन सकती है। यदि प्रत्येक भारतीय यह सोच ले कि उसकी छोटी आदतें भी देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती हैं, तो भारत को आत्मनिर्भर और विश्व की अग्रणी आर्थिक शक्ति बनने से कोई नहीं रोक सकता।
उन्होंने कहा कि यही सच्ची राष्ट्रसेवा है और यही विकसित तथा आत्मनिर्भर भारत की सबसे बड़ी ताकत बनेगी।