सागर। संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर महाराज से वर्ष 2006 में दीक्षित आर्यिकाश्री उपशममति माताजी एवं श्रुतमति माताजी की सड़क दुर्घटना में हुई समाधि के बाद जैन समाज में गहरा शोक और आक्रोश व्याप्त है। इस दुखद घटना को लेकर समाज के लोगों में संवेदना के साथ-साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने को लेकर चिंता भी दिखाई दे रही है। इसी क्रम में श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में श्रद्धांजलि स्वरूप विनयांजलि सभा का आयोजन किया गया।
सभा का आयोजन धर्म और आध्यात्मिक वातावरण के बीच हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभा का सानिध्य उदार सागर महाराज, उपशांत सागर महाराज, उत्साह सागर महाराज एवं उपकार सागर महाराज को प्राप्त हुआ। संतों और वक्ताओं ने आर्यिकाओं के तप, त्याग और साधना को स्मरण करते हुए उन्हें भावभीनी विनयांजलि अर्पित की।
सभा को संबोधित करते हुए आचार्यश्री उदार सागर महाराज ने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक शोभा उसके साधु-संतों से होती है। संतों की चर्या, विहार और तपस्या समाज की श्रद्धा और सहयोग पर निर्भर रहती है। उन्होंने कहा कि केवल शोक व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज को यह संकल्प लेना होगा कि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। यही सच्ची विनयांजलि होगी।
मुनिश्री उपशांत सागर महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि अब समय केवल चर्चा और संवेदना व्यक्त करने का नहीं, बल्कि ठोस निर्णय लेने और अधिक सावधान होने का है। उन्होंने कहा कि साधु-संत समाज के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का केंद्र होते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा और सम्मान समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

सभा में मौजूद वक्ताओं ने सड़क सुरक्षा और संतों के विहार के दौरान विशेष व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। कई वक्ताओं ने कहा कि तीर्थ क्षेत्रों और संत विहार मार्गों पर प्रशासन और समाज के संयुक्त प्रयासों से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाएं न हों।
इस अवसर पर अंकित धनेटा, विकास रहली, अशोक जैन, उदय चंद्र शास्त्री और पवन दीवान ने भी अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने आर्यिकाओं के त्यागमय जीवन और धर्म साधना को स्मरण करते हुए कहा कि उनका जीवन समाज के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
सभा में अमरचंद जैन, सुनील शाहगढ़, एमसी जैन, मनोज जैन लालो और अभय कर्रापुर सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर आर्यिकाओं को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।
पूरे आयोजन के दौरान वातावरण अत्यंत भावुक और श्रद्धामय बना रहा। श्रद्धालुओं ने कहा कि आर्यिकाओं का तप, संयम और साधना का जीवन सदैव समाज को धर्ममार्ग पर चलने की प्रेरणा देता रहेगा। साथ ही समाज ने यह भी संकल्प लिया कि संतों और साध्वियों की सुरक्षा एवं सम्मान के लिए जागरूकता और आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर आगे और गंभीर प्रयास किए जाएंगे।