मध्य प्रदेश के इंदौर के गांधी नगर क्षेत्र से एक दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां एक 55 वर्षीय टेलर ने कथित मानसिक प्रताड़ना और लगातार मिल रही धमकियों से परेशान होकर जहर खाकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद परिवार ने पड़ोसी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि मृतक को लंबे समय से धमकाया जा रहा था, जिसके कारण वह गहरे तनाव में थे।
जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान गजानंद (55) पुत्र नाथूसिंह के रूप में हुई है, जो गांधी नगर थाना क्षेत्र की शंकर कॉलोनी में रहते थे और सिलाई का काम कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। मंगलवार को उन्होंने एक खेत में जहरीला पदार्थ खा लिया। हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें तत्काल इलाज के लिए अरविंदो अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन देर रात उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
17 दिन पहले हुई थी मारपीट
परिजनों और रिश्तेदारों के मुताबिक, करीब 17 दिन पहले यानी 10 मई को गजानंद के साथ उनके पड़ोसी मेहताब सिंह ने मारपीट की थी। घटना घर के पास हुई थी, जिसमें गजानंद गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनके सिर में गहरी चोट आई थी और करीब 10 टांके लगे थे।

घटना के बाद परिवार ने गांधी नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर पुलिस ने कार्रवाई भी की थी। हालांकि आरोप है कि आरोपी जमानत पर बाहर आने के बाद लगातार गजानंद को धमका रहा था।
“पुलिस भी मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकती”
परिजनों का आरोप है कि आरोपी मेहताब सिंह जमानत पर छूटने के बाद गजानंद को डराने-धमकाने लगा था। वह अक्सर कहता था कि “पुलिस भी मेरा कुछ नहीं बिगाड़ पाई।” इसी वजह से गजानंद मानसिक रूप से टूट गए थे और लगातार तनाव में रहने लगे थे।
परिवार का कहना है कि गजानंद शांत स्वभाव के व्यक्ति थे और मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का पालन करते थे। लेकिन मारपीट की घटना और उसके बाद लगातार मिल रही धमकियों ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया।
परिवार में पसरा मातम
गजानंद अपने पीछे पत्नी और दो बेटों को छोड़ गए हैं। घटना के बाद पूरे परिवार में मातम का माहौल है। रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। परिवार का कहना है कि यदि समय रहते आरोपी पर कठोर कार्रवाई होती और धमकियों को गंभीरता से लिया जाता, तो शायद गजानंद की जान बचाई जा सकती थी।
पुलिस कर रही जांच
गांधी नगर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि मामले में परिवार के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिवार के बयानों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। यदि जांच में प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने जैसी बातें सामने आती हैं, तो आरोपी के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया जा सकता है।
मानसिक प्रताड़ना बन रही गंभीर समस्या
यह घटना एक बार फिर इस बात को उजागर करती है कि लगातार धमकी, डर और मानसिक प्रताड़ना किसी व्यक्ति को अंदर से तोड़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पीड़ितों को समय पर कानूनी और मानसिक सहयोग मिलना बेहद जरूरी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि समाज में छोटी-छोटी विवाद की घटनाएं अब हिंसा और मानसिक दबाव का रूप लेती जा रही हैं, जिसका खामियाजा कई बार निर्दोष लोगों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ता है।