मध्यप्रदेश के इंदौर में पारिवारिक रिश्तों और वैवाहिक जीवन से जुड़ा एक ऐसा सामाजिक पहलू सामने आया है, जिस पर आमतौर पर खुलकर बात नहीं होती। शहर में सिंधी समाज द्वारा गठित मध्यस्ता केंद्र में पहुंचे वैवाहिक विवादों में बड़ी संख्या ऐसे मामलों की रही, जिनकी जड़ पति-पत्नी के बीच शारीरिक संबंधों को लेकर असंतुष्टि रही।
समाज की पंचायत और काउंसलिंग व्यवस्था की मदद से अब तक 800 से अधिक पारिवारिक विवादों को सुलझाया जा चुका है। इनमें कई ऐसे परिवार भी शामिल हैं, जो तलाक और अलगाव की कगार पर पहुंच चुके थे।
फिजिकल रिलेशन से नाराज पत्नी ने मांगा तलाक
इसी तरह का एक मामला इंदौर में सामने आया, जहां एक महिला शादी के बाद पति के साथ संबंधों से संतुष्ट नहीं थी और हर हाल में तलाक चाहती थी। पति और उसका परिवार रिश्ता बचाना चाहते थे, लेकिन घर के अंदर शुरू हुआ विवाद धीरे-धीरे गंभीर होता गया।

मामला बढ़ने पर दोनों परिवारों ने समाज की पंचायत का सहारा लिया। यहां दोनों पक्षों की बात सुनी गई। महिला द्वारा लगाए गए आरोपों की मेडिकल जांच कराई गई और विशेषज्ञों की राय ली गई। इसके बाद काउंसलिंग और समझाइश के जरिए मामला सुलझाया गया। अब दोनों पति-पत्नी साथ रह रहे हैं।
800 से ज्यादा विवादों की सुनवाई
सिंधी समाज द्वारा 17 जुलाई 2023 से शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य समाज में बढ़ते पारिवारिक विवादों को अदालत तक पहुंचने से पहले बातचीत और समझाइश के जरिए सुलझाना है।
मध्यस्ता केंद्र के संस्थापक सदस्य किशोर कोडवानी के अनुसार अब तक 800 से अधिक मामलों की सुनवाई की जा चुकी है। इनमें सबसे ज्यादा विवाद दाम्पत्य जीवन से जुड़े रहे हैं।
60% दाम्पत्य विवादों की वजह ‘सेक्स असंतुष्टि’
केंद्र के आंकड़ों के अनुसार कुल मामलों में करीब 48 प्रतिशत विवाद पति-पत्नी के रिश्तों से जुड़े हैं। इनमें से लगभग 60 प्रतिशत मामलों में शारीरिक संबंधों को लेकर असंतोष मुख्य कारण के रूप में सामने आया।
इन मामलों में मेडिकल समस्याएं, मानसिक तनाव, लाइफ स्टाइल, पारिवारिक दबाव, आपसी समझ की कमी और मनोवैज्ञानिक कारण प्रमुख रहे। कई बार पति-पत्नी खुलकर अपनी समस्याएं साझा नहीं कर पाते, जिससे छोटे विवाद बड़े तनाव में बदल जाते हैं।
डॉक्टर और मनोवैज्ञानिक भी कर रहे मदद
मध्यस्ता केंद्र में आने वाले मामलों को केवल सामाजिक नजरिए से नहीं देखा जाता, बल्कि जरूरत पड़ने पर डॉक्टरों और मनोवैज्ञानिकों की भी मदद ली जाती है।
यदि किसी विवाद के पीछे मेडिकल कारण होते हैं तो समाज के डॉक्टरों से परामर्श कराया जाता है। वहीं मानसिक तनाव या व्यवहार संबंधी समस्याओं के मामलों में काउंसलिंग कराई जाती है।
किशोर कोडवानी का कहना है कि हर परिवार और हर विवाद अलग होता है, इसलिए हर मामले को संवेदनशीलता और अलग दृष्टिकोण से सुलझाने की कोशिश की जाती है।
आर्थिक और सामाजिक अंतर भी बन रहे विवाद की वजह
समाज के सामने आने वाले विवादों में केवल वैवाहिक असंतोष ही नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक अंतर भी बड़ी वजह बनकर उभर रहे हैं।
कई मामलों में देखा गया कि लड़की आर्थिक रूप से संपन्न परिवार से होती है, जबकि लड़के का परिवार अपेक्षाकृत कमजोर होता है। ऐसे में दोनों परिवारों की जीवनशैली, रहन-सहन और अपेक्षाओं में अंतर आने लगता है, जो बाद में विवाद का कारण बनता है।
इसके अलावा रीति-रिवाज, पारिवारिक संस्कार और आधुनिक जीवनशैली से जुड़े मतभेद भी रिश्तों में तनाव बढ़ा रहे हैं।
विवाह योग्य युवाओं का सर्वे भी चौंकाने वाला
सिंधी पंचायत द्वारा विवाह योग्य युवक-युवतियों का एक सर्वे भी कराया गया, जिसमें कई दिलचस्प आंकड़े सामने आए।
सर्वे के अनुसार 22 से 29 वर्ष आयु वर्ग में 34 प्रतिशत लड़के और 39 प्रतिशत लड़कियां अविवाहित हैं। यानी इस वर्ग में लड़कों की तुलना में 5 प्रतिशत अधिक लड़कियां अब भी अविवाहित हैं।
वहीं 30 से 40 वर्ष आयु वर्ग में 60 प्रतिशत पुरुष और 57 प्रतिशत महिलाएं अविवाहित पाई गईं। समाज के लोगों का मानना है कि बदलती जीवनशैली, करियर प्राथमिकता और रिश्तों को लेकर बढ़ती अपेक्षाएं इसके पीछे प्रमुख कारण हैं।
बदलते समाज का संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक दौर में वैवाहिक रिश्तों में संवाद की कमी, मानसिक तनाव और व्यक्तिगत अपेक्षाओं का बढ़ना रिश्तों को प्रभावित कर रहा है। ऐसे में समाज स्तर पर काउंसलिंग और मध्यस्ता जैसी पहल कई परिवारों को टूटने से बचा सकती है।
इंदौर में सिंधी समाज की यह पहल अब अन्य समुदायों के लिए भी उदाहरण बनती जा रही है, जहां अदालत और कानूनी लड़ाई से पहले बातचीत और समझाइश के जरिए रिश्तों को बचाने की कोशिश की जा रही है।