मॉडल से साध्वी बनीं हर्षानंद का बड़ा आरोप: “कुछ संत प्रवचन रोकना चाहते थे”, उज्जैन में उमड़ी भारी भीड़ !

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मॉडल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर से साध्वी बनीं हर्षानंद गिरि एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उज्जैन के लक्ष्मीपुरा में आयोजित सात दिवसीय देवी प्रवचन कार्यक्रम के समापन पर उन्होंने कुछ संतों पर उनके प्रवचन को रोकने और समय कम करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

गुरुवार को मंच से संबोधित करते हुए हर्षानंद ने कहा कि पिछले दो-तीन दिनों से उन्हें रोकने के प्रयास किए जा रहे थे, लेकिन मां भगवती की कृपा से वे डटी रहीं। उन्होंने कहा,
“जिस पर मां भगवती का आशीर्वाद हो, उसे कोई नहीं रोक सकता। किसी भी राक्षस में इतना सामर्थ्य नहीं कि वह धर्म के मार्ग को रोक सके।”

वीडियो जारी कर दोहराए आरोप

कार्यक्रम समाप्त होने के बाद जारी एक वीडियो में हर्षानंद ने अपने आरोपों को फिर दोहराया। उन्होंने कहा कि शुरुआती तीन दिनों तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन जैसे-जैसे श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई और महिलाओं की भागीदारी अधिक होने लगी, चौथे दिन से उनके प्रवचन का समय कम किया जाने लगा।

उन्होंने दावा किया कि कुछ संत नहीं चाहते थे कि उनका प्रवचन लंबे समय तक चले। हालांकि उन्होंने किसी संत का नाम सार्वजनिक रूप से नहीं लिया।

भीषण गर्मी में भी उमड़ी भारी भीड़

उज्जैन से करीब 22 किलोमीटर दूर लक्ष्मीपुरा में 8 मई से 108 कुंडीय यज्ञ और देवी प्रवचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। सात दिनों तक चले इस आयोजन में भीषण गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

हर्षानंद ने दावा किया कि श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ के कारण आयोजन स्थल का पंडाल दो बार बढ़ाना पड़ा, लेकिन अंतिम दिनों तक भी लोगों की भीड़ कम नहीं हुई। उन्होंने इसे मां भगवती की कृपा और “नारी शक्ति” का समर्थन बताया।

युवतियों को दिलाई शपथ, बांटी तलवारें

कार्यक्रम के दौरान हर्षानंद ने मंच से मौजूद युवतियों को ‘लव जिहाद’ से सतर्क रहने, परिवार और सनातन परंपरा के प्रति समर्पित रहने की शपथ भी दिलाई। साथ ही उन्होंने युवतियों को तलवारबाजी, घुड़सवारी और शस्त्र प्रशिक्षण सीखने की सलाह दी।

समापन कार्यक्रम में करणी सेना की ओर से युवतियों को तलवारें भी वितरित की गईं। आयोजन में 101 तलवारें बांटने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन सीमित उपलब्धता के कारण मंच से 11 युवतियों को तलवारें सौंपी गईं।

एक महीने पहले लिया संन्यास

करीब एक माह पहले हर्षा रिछारिया ने उज्जैन स्थित पंचायती निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर सुमनानंद गिरि से संन्यास लिया था। संन्यास के बाद उन्होंने “स्वामी हर्षानंद गिरि” नाम अपनाया और अब धार्मिक व आध्यात्मिक प्रवचन कर रही हैं।

वह निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि की शिष्या भी हैं।

सोशल मीडिया से अध्यात्म तक का सफर

हर्षानंद का परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के झांसी का रहने वाला है, लेकिन वर्तमान में भोपाल में रहता है। उनके पिता दिनेश बस कंडक्टर हैं, जबकि मां किरण रिछारिया बुटीक चलाती हैं।

अध्यात्म की राह पकड़ने से पहले हर्षानंद मॉडलिंग, स्टेज एंकरिंग और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसिंग से जुड़ी थीं। इंस्टाग्राम और फेसबुक पर उनके लाखों फॉलोअर्स हैं। इंस्टाग्राम पर उनके करीब 10 लाख फॉलोअर्स बताए जाते हैं, जहां वे धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों से जुड़े वीडियो साझा करती हैं।

उन्होंने ग्रेजुएशन के साथ अहमदाबाद से योग का विशेष कोर्स भी किया है। अब वे सनातन संस्कृति और धार्मिक विषयों पर प्रवचन दे रही हैं।

चर्चा में बना हुआ आयोजन

उज्जैन में आयोजित यह कार्यक्रम अब धार्मिक और सामाजिक दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर बड़ी संख्या में श्रद्धालु हर्षानंद के प्रवचनों को समर्थन दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके बयानों और कार्यक्रम के दौरान दिए गए संदेशों को लेकर भी बहस शुरू हो गई है।

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