इंदौर EV हादसा: चार्जिंग के दौरान बैटरी ब्लास्ट से लगी आग, 8 की मौत
मध्यप्रदेश के इंदौर में हुए भीषण ईवी हादसे को लेकर बिजली कंपनी की जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा सामने आया है। शुरुआती जांच में दावा किया गया है कि घर में लगी इलेक्ट्रिक कार की चार्जिंग के दौरान ओवरचार्जिंग के कारण बैटरी फट गई, जिससे आग भड़क उठी और देखते ही देखते पूरे मकान को अपनी चपेट में ले लिया। इस दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 4 लोग घायल हुए हैं।
यह घटना शहर के बंगाली चौराहे के पास ग्रेटर बृजेश्वरी कॉलोनी में तड़के करीब 3:30 से 4 बजे के बीच हुई। मृतकों में कारोबारी मनोज पुगलिया, उनकी गर्भवती बहू समेत परिवार के अन्य सदस्य शामिल हैं। बताया गया है कि घर में मौजूद 6 रिश्तेदार हाल ही में बिहार से आए थे और हादसे के समय सभी सो रहे थे।

बिजली कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, घटना के समय घर में खड़ी इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग पर लगी हुई थी। स्मार्ट मीटर के डिजिटल डेटा से यह पुष्टि हुई है कि रात के समय नियमित रूप से कार को चार्ज किया जाता था। हादसे वाली रात भी कार रात 11 बजे से सुबह 3 बजे तक चार्जिंग पर थी।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, चार्जिंग के दौरान पहले ऑटो कट-ऑफ हुआ, जिससे बिजली सप्लाई बंद हो गई थी, लेकिन करीब आधे घंटे बाद चार्जिंग दोबारा शुरू हो गई। इसके बाद अचानक बैटरी में विस्फोट हुआ, जिसे अधिकारियों ने “बम जैसी स्थिति” बताया है। इसी विस्फोट के कारण आग तेजी से फैल गई।
हालांकि, इस मामले में कुछ विरोधाभास भी सामने आए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगने की शुरुआत करीब 3 से 3:15 बजे के बीच ही हो गई थी। पड़ोस में रहने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि उसने कार के बोनट से धुआं निकलते देखा और तुरंत आसपास के लोगों को जगाया। फायर ब्रिगेड को भी सूचना दी गई, लेकिन दमकल दल को मौके पर पहुंचने में काफी समय लग गया।
बिजली कंपनी की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि घर में 15 किलोवॉट का लोड स्वीकृत था, जबकि सामान्य उपयोग 2 से 9 किलोवॉट के बीच ही रहता था। यानी ओवरलोडिंग की संभावना कम थी। इसके बावजूद बैटरी ब्लास्ट की बात सामने आना जांच को और जटिल बना रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी में यदि किसी कारण से अत्यधिक गर्मी या तकनीकी खराबी उत्पन्न हो जाए, तो वह तेजी से आग पकड़ सकती है। खासतौर पर यदि चार्जिंग सिस्टम में कोई गड़बड़ी हो या बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम सही तरीके से काम न करे, तो इस तरह की घटनाएं संभव हैं।
इस हादसे में आग इतनी तेजी से फैली कि घर के अंदर रखे गैस सिलेंडर भी इसकी चपेट में आ गए। सिलेंडरों में एक के बाद एक विस्फोट होने लगे, जिससे मकान का एक हिस्सा ढह गया। घर में लगे डिजिटल लॉक भी समय पर नहीं खुल सके, जिसके कारण अंदर सो रहे लोग बाहर नहीं निकल पाए।

परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि समय पर फायर ब्रिगेड पहुंच जाती, तो नुकसान कम हो सकता था। वहीं मृतक के बेटे ने यह दावा किया है कि आग इलेक्ट्रिक वाहन से नहीं, बल्कि पास के बिजली पोल से निकली चिंगारी के कारण लगी थी। उसने यह भी आरोप लगाया कि बिजली बंद किए बिना आग बुझाने की कोशिश की गई, जिससे हादसा और बढ़ गया।
इस मामले में बिजली कंपनी की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, कुछ वरिष्ठ अधिकारी अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि जिम्मेदारी तय न हो सके। हालांकि, आधिकारिक रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
फिलहाल पुलिस, बिजली विभाग और फायर सेफ्टी टीम संयुक्त रूप से पूरे मामले की जांच कर रही हैं। घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए तकनीकी विश्लेषण भी किया जा रहा है।
यह हादसा इलेक्ट्रिक वाहनों की सुरक्षा और चार्जिंग सिस्टम को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईवी चार्जिंग के दौरान सावधानी बरतना बेहद जरूरी है, खासकर घरों में स्थापित चार्जिंग पॉइंट्स के मामले में।
इंदौर की यह घटना न केवल एक बड़े पारिवारिक नुकसान की कहानी है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि नई तकनीकों के साथ सुरक्षा मानकों का पालन कितना जरूरी है।