इटावा मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार व्यवस्था को लेकर नई पहल !

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इटावा मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार की व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित, पर्यावरण अनुकूल और किफायती बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल की गई है। यहां लोहे का एक विशेष प्लेटफार्म स्थापित किया गया है, जिससे अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को आसान बनाया जा सकेगा और लकड़ी की खपत में भी कमी आएगी। यह व्यवस्था पहले मुक्तिधाम से लोहे के गर्डर चोरी हो जाने के बाद उत्पन्न हुई व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के रूप में विकसित की गई है।

जानकारी के अनुसार, पहले मुक्तिधाम में चिता सजाने के लिए लोहे के गर्डर उपयोग में लिए जाते थे, जिससे कम लकड़ी में अंतिम संस्कार संपन्न हो जाता था। लेकिन कुछ समय पूर्व ये लोहे के गर्डर चोरी हो गए। इसके बाद चिता सीधे जमीन पर सजानी पड़ रही थी, जिससे अधिक लकड़ी की आवश्यकता पड़ने लगी। इससे न केवल अंतिम संस्कार में समय अधिक लग रहा था, बल्कि शोकाकुल परिजनों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ गया था।

समाजसेवी की पहल से मिला समाधान

इन समस्याओं को देखते हुए समाजसेवी सचिन जैन ने पहल करते हुए एक विशेष कास्ट आयरन फ्यूनरल बेड (लोहे का प्लेटफार्म) तैयार करवाया। नगरपालिका के सहयोग से इस प्लेटफार्म को इटावा मुक्तिधाम में स्थापित किया गया है। यह प्लेटफार्म चिता को जमीन से ऊपर रखेगा, जिससे हवा का प्रवाह बेहतर होगा और लकड़ी कम मात्रा में उपयोग करनी पड़ेगी। इससे अंतिम संस्कार की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और सम्मानजनक तरीके से संपन्न हो सकेगी।

एक महीने तक होगा परीक्षण

इस लोहे के प्लेटफार्म का उपयोग फिलहाल एक महीने तक परीक्षण के तौर पर किया जाएगा। इस दौरान इसे निजी स्तर पर निगरानी में रखा जाएगा, ताकि इसके व्यावहारिक पहलुओं और उपयोगिता का आकलन किया जा सके। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो भविष्य में ऐसे पांच और प्लेटफार्म तैयार कर मुक्तिधाम में लगाए जाने की योजना है। इससे मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार के लिए एक स्थायी और टिकाऊ व्यवस्था विकसित हो सकेगी।

लकड़ी की बचत और स्वच्छता में सुधार

इस प्लेटफार्म के उपयोग से लकड़ी की खपत में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। चिता के जलने के बाद राख स्वतः नीचे गिर जाएगी, जिससे राख को छानने और समेटने की प्रक्रिया भी आसान हो जाएगी। इससे समय की बचत होगी और मुक्तिधाम परिसर में स्वच्छता बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।

पर्यावरण और मानवता को ध्यान में रखकर पहल

समाजसेवी सचिन जैन ने बताया कि यह पहल मानवता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए की गई है। लकड़ी की बचत से पेड़ों की कटाई कम होगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को अंतिम संस्कार में कम खर्च करना पड़ेगा, जिससे उन्हें राहत मिलेगी।

स्थानीय लोगों और नगरवासियों ने इस पहल की सराहना की है और उम्मीद जताई है कि यह व्यवस्था भविष्य में अन्य मुक्तिधामों के लिए भी एक आदर्श मॉडल साबित होगी।

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