मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित बालगृह से तीन नाबालिग बच्चों के फरार होने की घटना ने एक बार फिर संस्थान की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना नागझिरी क्षेत्र के लालपुर बालगृह की है, जहां बच्चों ने बाथरूम की ग्रिल तोड़कर फरार होने की वारदात को अंजाम दिया।
जानकारी के अनुसार, बुधवार शाम करीब 7 बजे जब बालगृह में बच्चों की नियमित गिनती की गई, तो तीन बच्चे गायब पाए गए। इसके बाद स्टाफ में हड़कंप मच गया और तत्काल पूरे परिसर में तलाश शुरू कर दी गई, लेकिन देर रात तक उनका कोई सुराग नहीं मिल सका।

बाथरूम की ग्रिल तोड़कर भागे बच्चे
जांच में सामने आया है कि तीनों बच्चों ने बाथरूम की खिड़की और ग्रिल को तोड़कर बाहर निकलने का रास्ता बनाया। इसके बाद वे बालगृह से फरार हो गए। फरार होने वाले बच्चों में दो उज्जैन के और एक शाजापुर जिले का बताया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, शाजापुर का बच्चा करीब एक सप्ताह पहले ही बालगृह में लाया गया था, जबकि उज्जैन के दोनों बच्चे पिछले लगभग छह महीने से यहां रह रहे थे।

पुलिस की सर्चिंग जारी
घटना की जानकारी मिलते ही नागझिरी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस ने रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और शहर के अन्य संभावित ठिकानों पर सर्चिंग अभियान चलाया, लेकिन देर रात तक बच्चों का कोई पता नहीं चल पाया।
पहले भी हो चुकी हैं फरार होने की घटनाएं
यह कोई पहली घटना नहीं है जब इस बालगृह से बच्चे फरार हुए हों। इससे पहले 20 जनवरी 2026 को भी दो नाबालिग बच्चे बाथरूम की ग्रिल और वेंटिलेशन तोड़कर फरार हो गए थे। वे सुबह करीब 5 बजे भागे थे और अब तक उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
इसके अलावा नवंबर 2023 में भी इसी बालगृह से तीन नाबालिग बच्चे कमरे की ग्रिल तोड़कर भाग गए थे। इनमें एक बच्चा मुंबई और दो राजस्थान के रहने वाले बताए गए थे, जो आज तक लापता हैं।
सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल
लगातार हो रही इन घटनाओं ने बालगृह की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बार-बार बच्चों के फरार होने की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि संस्थान में निगरानी और सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं हैं।
स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि बालगृह जैसी संवेदनशील जगहों पर मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी और नियमित निरीक्षण बेहद जरूरी है, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
प्रशासन की जिम्मेदारी पर उठे सवाल
लगातार घटनाओं के बावजूद प्रभावी सुधार न होने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। अब देखना होगा कि इस बार प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।