मध्यप्रदेश के इंदौर में जिला न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति के आयकर रिटर्न (IT Return) उपलब्ध हैं, तो आय साबित करने के लिए किसी अन्य दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होती। इसी आधार पर सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले चार कारोबारियों के परिजनों को बीमा कंपनी द्वारा कुल 3 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा देने का आदेश दिया गया है।
यह मामला 25 अक्टूबर 2024 को हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे से जुड़ा है। मृतक इंदौर से अजमेर दरगाह शरीफ के दर्शन कर लौट रहे थे, तभी जावदा-नागदा रोड पर उनकी इनोवा कार को एक तेज रफ्तार कंटेनर ने जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।
हादसे में चार लोगों की मौत
इस दुर्घटना में जिनकी मौत हुई, वे सभी अपने-अपने क्षेत्र के कारोबारी और जिम्मेदार व्यक्ति थे—
- मो. आसिफ मंसूरी (आर्टिफिशियल ज्वेलरी कारोबारी)
- अब्दुल मन्नान कुरैशी (बिल्डर)
- इमरान मंसूरी (व्यवसायी)
- समीद खान (सुपरवाइजर)
घायलों में मो. जुबेर और मो. ओसामा शामिल थे, जिनका इलाज जारी रहा।

अदालत में छह अलग-अलग याचिकाएं
इस मामले में मृतकों और घायलों के परिजनों ने कुल छह अलग-अलग याचिकाएं 9 नवंबर 2024 को जिला कोर्ट में दायर की थीं। सभी मामलों की एक साथ सुनवाई की गई और 29 अप्रैल 2026 को फैसला सुनाया गया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट राजेश खंडेलवाल ने कोर्ट में दलील दी कि मृतक नियमित रूप से आयकर रिटर्न दाखिल करते थे और उनके पास स्थायी व्यवसाय थे। उन्होंने यह भी बताया कि परिवार पूरी तरह मृतकों की आय पर निर्भर थे और उनकी मृत्यु से परिवार की आर्थिक स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हुई है।
बीमा कंपनी की आपत्ति खारिज
सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने यह तर्क दिया कि केवल आयकर रिटर्न पर्याप्त प्रमाण नहीं है और आय के अन्य दस्तावेज भी पेश किए जाने चाहिए। लेकिन अदालत ने इस आपत्ति को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि जब नियमित रूप से दाखिल किए गए IT रिटर्न उपलब्ध हैं, तो अतिरिक्त आय प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती।
कोर्ट ने कहा कि आयकर रिटर्न एक आधिकारिक और विश्वसनीय दस्तावेज है, जो किसी व्यक्ति की आय को साबित करने के लिए पर्याप्त माना जा सकता है।
परिजनों की आर्थिक स्थिति
कोर्ट में प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार, सभी मृतक अपने परिवारों के मुख्य कमाने वाले सदस्य थे।
- मो. आसिफ मंसूरी के परिवार में पत्नी, छोटा बेटा और मां पूरी तरह उन पर निर्भर थे।
- अब्दुल मन्नान के परिवार में पत्नी, बच्चा और बुजुर्ग पिता आश्रित थे।
- इमरान मंसूरी के परिवार में पत्नी और दो बच्चे उन पर निर्भर थे।
- समीद खान के परिवार में पत्नी, तीन बेटे और बुजुर्ग मां आश्रित थीं।
परिजनों ने बताया कि मृतकों का अच्छा कारोबार था और वे नियमित रूप से टैक्स भी भरते थे।

मुआवजे की मांग और अदालत का फैसला
परिजनों ने अलग-अलग मामलों में 1.90 करोड़ से 3.90 करोड़ रुपये तक मुआवजे की मांग की थी। कोर्ट ने साक्ष्यों और आयकर रिटर्न के आधार पर अंतिम मुआवजा तय किया।
अदालत ने आदेश दिया कि—
- मो. आसिफ मंसूरी के परिवार को 1.06 करोड़ रुपये
- अब्दुल मन्नान के परिवार को 98 लाख रुपये
- इमरान मंसूरी के परिवार को 65 लाख रुपये
- समीद खान के परिवार को 15 लाख रुपये
इन सभी राशियों पर 6% वार्षिक ब्याज भी दिया जाएगा।
घायलों को भी राहत
हादसे में घायल हुए मो. ओसामा और मो. जुबेर को भी मुआवजा दिया गया। ओसामा को इलाज खर्च और अन्य मदों में 14.43 लाख रुपये दिए जाएंगे, जबकि जुबेर को 50 हजार रुपये का मुआवजा मिला है।

फैसले का कानूनी महत्व
यह फैसला कानूनी दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आधुनिक समय में जहां अधिकतर कारोबारी और पेशेवर आयकर रिटर्न दाखिल करते हैं, वहां इसे आय का विश्वसनीय और पर्याप्त प्रमाण माना जा सकता है।
इस निर्णय से भविष्य में बीमा कंपनियों द्वारा अनावश्यक दस्तावेजों की मांग पर रोक लगने की संभावना है और पीड़ित परिवारों को मुआवजा पाने में आसानी होगी।
कुल मिलाकर, इंदौर कोर्ट का यह फैसला न केवल पीड़ित परिवारों के लिए बड़ी राहत है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण न्यायिक उदाहरण भी बन गया है। यह स्पष्ट करता है कि आयकर रिटर्न को आय का मजबूत और मान्य प्रमाण माना जाएगा, जिससे न्याय प्रक्रिया और अधिक सरल और प्रभावी बन सकेगी।