भोपाल। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने मध्यप्रदेश सरकार और राज्य के नगर निगमों को प्लास्टिक प्रदूषण और माइक्रोप्लास्टिक्स के खतरे से निपटने के लिए विशेष निर्देश जारी किए हैं। एनजीटी की केंद्रीय क्षेत्र पीठ में न्यायमूर्ति श्यौ कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि भोपाल में 50 से अधिक अवैध प्लास्टिक रीसाइक्लिंग यूनिटें लगभग 2 लाख नागरिकों के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर रही हैं।
एनजीटी ने राज्यों और नगरीय निकायों को प्लास्टिक और माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण कम करने के लिए कई सुझाव और निर्देश जारी किए हैं।
एनजीटी के निर्देशों में शामिल प्रमुख बातें:
1. नई तकनीकों का विकास और परीक्षण
- वायु, जल और मिट्टी से माइक्रोप्लास्टिक हटाने के लिए आधुनिक तकनीकों का परीक्षण और मूल्यांकन किया जाए।
- वस्त्र, टायर, डिटर्जेंट, सड़क सतह और अन्य उत्पादों में टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल डिजाइन को बढ़ावा दिया जाए।

2. व्यक्तिगत देखभाल और घरेलू उपाय
- कॉस्मेटिक उत्पादों में माइक्रोप्लास्टिक का इस्तेमाल प्रतिबंधित किया जाए।
- वॉशिंग मशीन में माइक्रोफाइबर फिल्टर का उपयोग अनिवार्य किया जाए।
3. अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार
- प्लास्टिक और ठोस अपशिष्ट का बेहतर प्रबंधन किया जाए ताकि रिसाव कम हो।
- बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा दिया जाए।
- नदियों, वेटलैंड और समुद्र तटों की नियमित सफाई की जाए।
- सीवेज और वर्षा जल प्रणालियों में फिल्टर या स्क्रीन लगाएं।
- नगर निगम वर्ष में दो बार जल आपूर्ति और वेटलैंड में माइक्रोप्लास्टिक की निगरानी करें।
4. स्वास्थ्य और जोखिम मूल्यांकन
- वर्ल्ड हेल्थ रिपोर्ट के अनुसार माइक्रोप्लास्टिक का सेवन मानव स्वास्थ्य के लिए अभी कम चिंता का विषय है, लेकिन लंबी अवधि के अध्ययन आवश्यक हैं।
- इस संबंध में CPCB, ICMR और अन्य विशेषज्ञ संस्थान मानक विकसित करें और शोध जारी रखें।
5. अवैध प्लास्टिक यूनिटों पर कार्रवाई
- अवैध प्लास्टिक रीसाइक्लिंग यूनिटों को बंद किया जाए या औद्योगिक क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जाए।
- गैर-बायोडिग्रेडेबल मल्टी-लेयर प्लास्टिक (MLP) को बायोडिग्रेडेबल विकल्प से बदलने का निर्देश।
कार्रवाई और रिपोर्टिंग की समय सीमा
एनजीटी ने कहा है कि राज्य और जिला स्तर की समितियां प्लास्टिक कचरा और माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण की निगरानी करें।
राज्य पर्यावरण सचिव को चार सप्ताह के भीतर, यानी 27 मार्च तक, पूरी कार्रवाई की रिपोर्ट एनजीटी में जमा करनी होगी।
मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, क्षेत्रीय अधिकारी, और भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, रीवा व उज्जैन नगर निगमों को इस मामले को गंभीरता से लेने और निर्देशों का पालन करने का आदेश दिया गया है।
एनजीटी का यह कदम पर्यावरण सुरक्षा और नागरिकों की स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय पर उचित कदम नहीं उठाए गए, तो प्लास्टिक प्रदूषण से होने वाले खतरे बढ़ सकते हैं।