एमपी में बम धमकी के ईमेल से दहशत, ‘डिजिटल हमलावर’ अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर !

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मध्य प्रदेश, खासकर भोपाल में बीते एक महीने से बम धमकियों के सिलसिले ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। अस्पतालों, न्यायालयों और सरकारी दफ्तरों को लगातार धमकी भरे ईमेल मिल रहे हैं, जिनमें RDX, सायनाइड और पाकिस्तानी ड्रोन जैसे खतरनाक शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि राहत की बात यह है कि अब तक सभी धमकियां झूठी साबित हुई हैं, लेकिन इन घटनाओं ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—आखिर ये धमकियां दे कौन रहा है और पुलिस अब तक उसे पकड़ क्यों नहीं पाई?

इस पूरे मामले की शुरुआत 19 फरवरी 2026 को हुई, जब पीपुल्स कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंस के डीन को एक धमकी भरा ईमेल मिला। सुबह करीब 9:50 बजे आए इस मेल में कॉलेज को सायनाइड बम से उड़ाने की चेतावनी दी गई थी। उस समय कॉलेज परिसर में करीब एक हजार छात्र, फैकल्टी और स्टाफ मौजूद थे। ईमेल मिलते ही हड़कंप मच गया और पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पूरे कैंपस को खाली करा लिया।

इसके बाद मार्च के पहले 20 दिनों में ही कई बड़े संस्थानों को इसी तरह के ईमेल मिलने लगे। 2 मार्च को एम्स भोपाल और पीपुल्स यूनिवर्सिटी को सायनाइड बम की धमकी दी गई। ईमेल में दावा किया गया कि दोपहर 12:15 बजे विस्फोट होगा। इस सूचना के बाद अस्पताल के वार्ड तक खाली कराए गए। डॉक्टरों को इलाज बीच में छोड़ना पड़ा और कई गंभीर मरीजों को बाहर निकालना पड़ा। घंटों की तलाशी के बाद कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला।

17 मार्च को एक और मामला सामने आया, जब भोपाल के नाप-तौल विभाग को ईमेल मिला कि पाकिस्तानी ड्रोन के जरिए 4 RDX बम रखे गए हैं, जो दोपहर 2 बजे फटेंगे। इस सूचना के बाद पूरा दफ्तर खाली कराया गया और बम निरोधक दस्ते ने जांच की, लेकिन यह भी अफवाह निकली।

सबसे ज्यादा असर 18 मार्च को देखने को मिला, जब एक ही दिन में कई संस्थानों को धमकी भरे ईमेल भेजे गए। इनमें जेके हॉस्पिटल, एलएन मेडिकल कॉलेज, जिला न्यायालय, अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय, पासपोर्ट कार्यालय और वाणिज्यिक कर विभाग शामिल थे। हर जगह एक जैसा दृश्य देखने को मिला—लोगों में दहशत, अफरा-तफरी और घंटों तक चलने वाली जांच। इसी दिन इंदौर में भी कुछ सरकारी दफ्तरों को ऐसी ही धमकियां मिलीं।

यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। 20 मार्च को सतना जिला न्यायालय को 15 बमों से उड़ाने की धमकी मिली। हालांकि उस दिन अवकाश होने के कारण बड़ा नुकसान टल गया। जांच में यहां भी कोई विस्फोटक नहीं मिला।

इन सभी मामलों में एक समान पैटर्न सामने आया है। धमकी भरे ईमेल में RDX, सायनाइड, जहरीली गैस और पाकिस्तानी ड्रोन जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया। कुछ ईमेल में धार्मिक नारों का जिक्र किया गया, तो कुछ में अजीबोगरीब कारण दिए गए। इससे साफ है कि मकसद सिर्फ दहशत फैलाना है।

संजय कुमार के अनुसार, लगातार भोपाल के संस्थानों को निशाना बनाए जाने से यह किसी स्थानीय शरारती तत्व की हरकत लगती है। उनका कहना है कि धमकियों में एक जैसा पैटर्न है, जिससे लगता है कि इसके पीछे एक ही व्यक्ति या समूह हो सकता है।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि पुलिस अब तक आरोपी तक क्यों नहीं पहुंच पाई? साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, ईमेल ट्रेस करना संभव तो है, लेकिन प्रक्रिया काफी जटिल होती है। हर ईमेल के ‘हेडर’ से उसके स्रोत का पता लगाया जा सकता है, लेकिन आरोपी अक्सर VPN और प्रॉक्सी सर्वर का इस्तेमाल करते हैं। इससे उनका असली IP एड्रेस छिप जाता है और वह किसी दूसरे देश का दिखाई देता है।

ऐसी स्थिति में जांच एजेंसियों को अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत पड़ती है, जिसमें समय लगता है। इसके अलावा, अपराधी फर्जी ईमेल आईडी और अलग-अलग सर्वर का इस्तेमाल करते हैं, जिससे उनकी पहचान करना और मुश्किल हो जाता है। हालांकि, तकनीकी रूप से हर डिवाइस की एक यूनिक पहचान होती है, जिसे ट्रैक कर आरोपी तक पहुंचा जा सकता है, लेकिन इसके लिए समय और सटीक विश्लेषण जरूरी होता है।

इन धमकियों का असर केवल सुरक्षा एजेंसियों तक सीमित नहीं है, बल्कि आम जनता भी इससे प्रभावित हो रही है। अस्पतालों को खाली कराने से स्वास्थ्य सेवाएं बाधित हो रही हैं। कई गंभीर मरीजों का इलाज रुक रहा है, ऑपरेशन टल रहे हैं और इमरजेंसी सेवाओं पर दबाव बढ़ रहा है।

वहीं, न्यायालय और सरकारी दफ्तरों के कामकाज पर भी इसका सीधा असर पड़ा है। हर धमकी के बाद घंटों तक काम बंद रहता है, जिससे आम लोगों को परेशानी होती है। पुलिस, बम स्क्वॉड और डॉग स्क्वॉड को बार-बार सक्रिय करना पड़ता है, जिससे संसाधनों की भी भारी बर्बादी होती है।

रिटायर्ड आईपीएस अधिकारियों का मानना है कि इन धमकियों को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। भले ही अब तक ये अफवाह साबित हुई हों, लेकिन भविष्य में यह किसी गंभीर साजिश का रूप भी ले सकती हैं। इसलिए जरूरी है कि पुलिस और साइबर एजेंसियां मिलकर इस ‘डिजिटल हमलावर’ तक जल्द से जल्द पहुंचें।

कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश में लगातार मिल रही ये बम धमकियां केवल अफवाह नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी हैं। जब तक आरोपी की पहचान कर उसे पकड़ा नहीं जाता, तब तक इस तरह की घटनाओं का सिलसिला रुकना मुश्किल नजर आता है।

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