इंदौर, 7 सितंबर 2025: इंदौर के एमवाय अस्पताल (MYH) में हाल ही में हुई एक दर्दनाक घटना ने शहर और आसपास के क्षेत्रों में सनसनी फैला दी है। अस्पताल के NICU (Neonatal Intensive Care Unit) में 28 अगस्त को भर्ती धार निवासी नवजात बच्ची की मौत हुई। लेकिन इस मामले की सबसे भयावह और दिल दहला देने वाली बात यह सामने आई कि बच्ची की चार उंगलियां चूहों ने खा ली थीं।
घटना के बाद अस्पताल में नाराजगी और प्रदर्शन की लहर उठी। शनिवार को नवजात के माता-पिता और जय आदिवासी संगठन (जयस) के नेता अस्पताल पहुंचे और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद रात में अस्पताल प्रबंधन ने नवजात का शव माता-पिता को सौंपा। लेकिन शव पारदर्शी प्लास्टिक में पैक कर बॉक्स में रखा गया था।
परिवार धार जिले के रूपवाड़ा गांव पहुंचे और अंतिम संस्कार से पहले जब बॉक्स खोला, तो हकीकत सामने आई। मां मंजू बेसुध हो गई। देर रात गांववालों की मौजूदगी में बच्ची का अंतिम संस्कार किया गया

घटना की पृष्ठभूमि और अस्पताल की कथित लापरवाही
एमवाय अस्पताल में यह पहला मामला नहीं है। अस्पताल में दो नवजातों की मौत चूहों के काटने के कारण हुई थी, लेकिन प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन ने शुरुआती जांच में इन मौतों को सामान्य और प्राकृतिक बताया। चूहों के काटने की बात को पूरी तरह खारिज कर दिया गया।
इस मामले में राजनीति भी गरमा गई। कांग्रेस और जयस दोनों ने अस्पताल प्रबंधन पर तीव्र आरोप लगाते हुए घटना की गंभीरता को उजागर किया। राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी तक इस मामले की जानकारी दी गई।
28 अगस्त को NICU में भर्ती हुई धार निवासी मंजू की नवजात बच्ची की मौत के बाद अस्पताल ने परिवार को पांच दिन तक इस गंभीर सूचना से वंचित रखा।

परिवार का दर्द और आरोप
परिवार का कहना है कि उन्हें बच्ची की मौत की खबर 5 दिन तक नहीं दी गई। माता-पिता ने बताया कि उन्हें बार-बार फोन करने पर ही जानकारी दी जाएगी और उन्हें अस्पताल से तुरंत जाने के लिए कहा गया।
साजिद, जो दूसरी नवजात की पिता हैं, कहते हैं:
“हम अपनी बेटी को बहुत अच्छी नीयत से एमवाय अस्पताल ले गए थे। हम उम्मीद कर रहे थे कि वह ठीक होकर घर आएगी, लेकिन उसे बहुत दर्दनाक मौत मिली। जब हमने शव घर ले जाकर देखा, तो हथेली पर चूहों के काटने के निशान साफ दिखाई दे रहे थे।”
साजिद ने बेटी के शव का पोस्टमॉर्टम कराने से भी इनकार कर दिया। उनका आरोप है कि अस्पताल ने दोष छिपाने के लिए सच्चाई को तोड़-मरोड़ कर पेश किया।

प्रदर्शन और मुआवजे की मांग
शनिवार को कांग्रेस और जयस नेताओं की मौजूदगी में अस्पताल में छह घंटे तक प्रदर्शन चला। इस दौरान परिजनों ने 1-1 करोड़ रुपए मुआवजे की मांग की। हालांकि, रेडक्रॉस सोसाइटी की ओर से धार निवासी परिवार को मात्र 5 लाख रुपए की सहायता राशि दी गई, जबकि देवास निवासी उस दंपती को, जिनके नवजात की भी मौत हुई थी, कोई आर्थिक मदद नहीं मिली।
परिवार और संगठन इस घटना को केवल स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही नहीं, बल्कि असामान्य प्रशासनिक अनदेखी के रूप में देख रहे हैं।

अस्पताल प्रबंधन का पक्ष
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि दोनों बच्चों की मौत चूहों के काटने से नहीं हुई, बल्कि उनकी हालत पहले से ही गंभीर थी। हालांकि, घटनास्थल और शव पर चूहों के निशान के स्पष्ट सबूत सामने आने के बाद इस दावे पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

निष्कर्ष
यह घटना केवल एक अस्पताल की लापरवाही का मामला नहीं है। यह जनस्वास्थ्य, नवजात सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही के गंभीर सवाल को सामने रखती है। परिजनों के आंसू और न्याय की मांग के बीच शहर में स्वास्थ्य व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठता है।
एमवाय अस्पताल के NICU में हुई इस त्रासदी ने यह स्पष्ट कर दिया कि नवजातों की सुरक्षा के लिए केवल नाममात्र की निगरानी और व्यवस्था पर्याप्त नहीं है।