जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास मंगलवार देर रात एक बार फिर पाकिस्तानी ड्रोन मंडराता हुआ देखा गया। ड्रोन के नजर आते ही भारतीय सेना ने तत्काल एंटी-ड्रोन सिस्टम सक्रिय कर दिया, जिसके बाद ड्रोन पाकिस्तान की ओर लौट गया। इस घटना ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि पिछले 10 दिनों में यह ड्रोन दिखने की पांचवीं घटना है।
सेना के सूत्रों के मुताबिक, यह ड्रोन नियमित निगरानी के दौरान पकड़ा गया। ड्रोन की गतिविधि को देखते हुए इलाके में सतर्कता बढ़ा दी गई है और सभी यूनिट्स को अलर्ट पर रखा गया है। फिलहाल ड्रोन के उद्देश्य और तकनीकी विवरण को लेकर जांच जारी है।
10 दिन में ड्रोन की सिलसिलेवार घटनाएं
पिछले कुछ दिनों में सीमा और लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के पास ड्रोन गतिविधियों में तेजी देखी गई है।
- 21 जनवरी (मंगलवार देर रात): कठुआ जिले में भारत-पाक बॉर्डर के पास ड्रोन देखा गया।
- 17 जनवरी: LoC से सटे रामगढ़ सेक्टर में ड्रोन स्पॉट किया गया, सेना की कार्रवाई के बाद ड्रोन वापस लौट गया।
- 15 जनवरी: रामगढ़ सेक्टर में एक बार फिर ड्रोन की मौजूदगी दर्ज की गई।
- 13 जनवरी: राजौरी जिले में दो बार ड्रोन देखे गए।
- 11 जनवरी: नौशेरा, धरमसाल सेक्टर, रियासी, सांबा और पुंछ के मंकोट सेक्टर में एक साथ पांच ड्रोन नजर आए।
लगातार हो रही इन घटनाओं के बाद सेना और सुरक्षा एजेंसियों ने LoC और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर निगरानी और चौकसी कई गुना बढ़ा दी है।

11 जनवरी की घटना: सबसे बड़ी ड्रोन गतिविधि
ड्रोन घुसपैठ का सिलसिला पहली बार 11 जनवरी को गंभीर रूप से सामने आया, जब एक ही शाम में पांच अलग-अलग इलाकों में ड्रोन देखे गए।
न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार:
- राजौरी के नौशेरा सेक्टर में शाम करीब 6:35 बजे गनिया-कलसियां गांव के ऊपर ड्रोन देखा गया, जिस पर जवानों ने मीडियम और लाइट मशीन गन से फायरिंग की।
- उसी समय तेरियाथ के खब्बर गांव में एक और ड्रोन नजर आया, जो धर्मसाल गांव से भरख की ओर बढ़ा।
- सांबा के रामगढ़ सेक्टर में चक बबरल गांव के ऊपर शाम करीब 7:15 बजे ड्रोन जैसी वस्तु कुछ मिनट तक मंडराती दिखी।
- पुंछ के मंकोट सेक्टर में शाम 6:25 बजे तैन से टोपा की ओर ड्रोन जैसी चीज जाती हुई देखी गई।
ड्रोन से हथियार गिराने की आशंका
इससे पहले 9 जनवरी को सांबा जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास घगवाल के पालूरा गांव में हथियारों की खेप बरामद हुई थी। जांच में सामने आया कि यह खेप पाकिस्तान से आए ड्रोन के जरिए गिराई गई थी। बरामद सामग्री में:
- 2 पिस्तौल
- 3 मैगजीन
- 16 जिंदा कारतूस
- 1 ग्रेनेड
शामिल थे।
इस घटना के बाद सुरक्षा बलों को शक है कि पाकिस्तान ड्रोन के जरिए आतंकियों के लिए हथियार, गोला-बारूद और नशीले पदार्थ भेजने की कोशिश कर रहा है।

गणतंत्र दिवस से पहले हाई अलर्ट
गणतंत्र दिवस को देखते हुए जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही कड़ी है। लगातार ड्रोन गतिविधियों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है। आशंका जताई जा रही है कि इन ड्रोन्स का इस्तेमाल:
- भारतीय सेना की पोजिशन की रेकी
- आतंकियों के लिए हथियार या ड्रग्स गिराने
- घुसपैठ की तैयारी
के लिए किया जा रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी सख्ती
सेना की ड्रोन पर सख्त नजर ऐसे समय में है, जब ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है।
यह ऑपरेशन 7 मई 2025 को शुरू किया गया था, जो 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले (जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी) के जवाब में किया गया था।
ऑपरेशन सिंदूर के तहत:
- पाकिस्तान और PoK में
- जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के
- बहावलपुर, मुरीदके समेत 9 आतंकी ठिकानों पर
लगभग 25 मिनट में एयर स्ट्राइक कर उन्हें तबाह किया गया था।
सेना प्रमुख का सख्त संदेश
सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि पाकिस्तान अगर आतंकी हमला या घुसपैठ की कोशिश करता है तो भारत पूरी ताकत से जवाब देगा।
हालात पर पैनी नजर
लगातार ड्रोन घटनाओं के मद्देनजर:
- बॉर्डर और LoC पर हाई-टेक सर्विलांस बढ़ाया गया है
- एंटी-ड्रोन सिस्टम को लगातार सक्रिय रखा जा रहा है
- खुफिया एजेंसियां इन गतिविधियों के पीछे की साजिश की जांच कर रही हैं
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि किसी भी सूरत में सीमा पार से होने वाली साजिशों को नाकाम किया जाएगा और हालात पर 24×7 कड़ी नजर रखी जा रही है।