मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के साथ अपने व्यक्तिगत और राजनीतिक संबंधों को लेकर कई भावुक और प्रेरणादायक बातें साझा कीं। उन्होंने बताया कि मोदी केवल एक राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं और सहयोगियों के सुख-दुख में साथ खड़े रहने वाले संवेदनशील व्यक्तित्व भी हैं।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जब वे मुख्यमंत्री रहते हुए कोरोना संक्रमित हो गए थे, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोन आया था। मोदी ने न केवल उनके स्वास्थ्य की चिंता की, बल्कि परिवार का ध्यान रखने की भी बात कही। शिवराज ने बताया कि उनके पिता के निधन के समय भी प्रधानमंत्री ने फोन कर संवेदना व्यक्त की थी।

उन्होंने एक और निजी अनुभव साझा करते हुए बताया कि जब वे अपने बेटे की शादी का निमंत्रण देने प्रधानमंत्री के पास पहुंचे थे, तब उन्हें लगा था कि मुलाकात केवल पांच मिनट की औपचारिक बातचीत तक सीमित रहेगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शिवराज के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी ने पूरे आत्मीय भाव से परिवार और रिश्तेदारी की जानकारी ली। उन्होंने यह भी पूछा कि रिश्ता कहां तय हुआ, परिवार क्या करता है, डेयरी कैसे चलती है और कितना दूध कलेक्ट होता है। शिवराज ने कहा कि इतने व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद प्रधानमंत्री का इस तरह विस्तार से बात करना उनके मानवीय स्वभाव को दर्शाता है।
“मैं प्रशंसा से नहीं, काम से प्रसन्न होता हूं”
शिवराज सिंह चौहान ने एक राजनीतिक प्रसंग का जिक्र करते हुए बताया कि एक बार वे किसी बैठक के सिलसिले में प्रधानमंत्री मोदी से मिलने गए थे। बातचीत के दौरान उन्होंने सहज रूप से कहा कि पहले वे मोदी का आदर करते थे, लेकिन अब देश के लिए हो रहे कार्यों को देखकर उनके मन में श्रद्धा पैदा हो गई है।
इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने तुरंत जवाब दिया—

“शिवराज, मैं और नेताओं की तरह प्रशंसा से प्रसन्न नहीं होता। मैं केवल काम से प्रसन्न होता हूं। काम करो, परिणाम दो, मैं कंधों पर बिठाकर नचाऊंगा। मुझे केवल देश के लिए काम चाहिए।”
शिवराज ने कहा कि यह बात उनके मन में हमेशा के लिए बैठ गई। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री की कार्यशैली और सोच का सबसे बड़ा उदाहरण बताया। उनके अनुसार मोदी के लिए राजनीति का मतलब केवल भाषण या प्रशंसा नहीं, बल्कि जमीन पर परिणाम देना है।
2023 चुनाव और बयान का संदर्भ
शिवराज सिंह चौहान ने 2023 के मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के समय दिए गए अपने एक बयान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वे लाड़कुई गए थे, जहां कई विकास कार्य हुए थे। उसी दौरान भावुक होकर उन्होंने कह दिया था कि “जब हम चले जाएंगे तो बहुत याद आएंगे।”

उन्होंने संकेत दिया कि उस वक्त उनके कुछ बयान चर्चा का विषय बने थे, लेकिन उनका उद्देश्य केवल जनता से भावनात्मक जुड़ाव व्यक्त करना था।
शिवराज के इन बयानों को राजनीतिक हलकों में प्रधानमंत्री मोदी और उनके बीच मजबूत संबंधों तथा भाजपा की कार्यसंस्कृति के संदर्भ में देखा जा रहा है। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि भाजपा नेतृत्व में व्यक्तिगत प्रशंसा से ज्यादा कार्य और परिणामों को महत्व दिया जाता है।