सागर — किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने और नवाचारों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र सागर में आयोजित कृषक संगोष्ठी उत्साहपूर्ण वातावरण में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। इस संगोष्ठी में बड़ी संख्या में प्रगतिशील कृषकों, अधिकारियों एवं प्रशिक्षणार्थियों ने भाग लेकर कृषि के नए आयामों को समझने का अवसर प्राप्त किया।
कार्यक्रम का आयोजन प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. के. एस. यादव के मार्गदर्शन में किया गया। संगोष्ठी में लगभग 60 प्रशिक्षणार्थियों, अधिकारियों और कर्मचारियों की सक्रिय सहभागिता रही। जन अभियान परिषद की ओर से जयसिंह ठाकुर, ब्लॉक समन्वयक सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।
संगोष्ठी के दौरान डॉ. के. एस. यादव ने उद्यानिकी क्षेत्र में हो रहे नवीनतम नवाचारों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने हाईटेक उद्यानिकी, फल पौधों में रोगों की पहचान और उनके प्रबंधन के प्रभावी उपायों पर प्रकाश डाला। साथ ही नर्सरी प्रबंधन और उन्नत उत्पादन तकनीकों के बारे में भी किसानों को जागरूक किया गया, जिससे वे अपनी खेती को अधिक लाभकारी बना सकें।

डॉ. यादव ने औषधीय एवं पोषणीय महत्व वाली फसलों की खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि इन फसलों की बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है और इनके माध्यम से किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। इसके अलावा उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र में संचालित विभिन्न गतिविधियों जैसे प्रक्षेत्र परीक्षण, विस्तार गतिविधियां, प्रशिक्षण कार्यक्रम, लाइव टेलीकास्ट और प्रदर्शन इकाइयों की जानकारी भी विस्तार से दी।
मृदा स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित करते हुए डॉ. यादव ने मृदा परीक्षण की विधियों, जैव उर्वरकों के उपयोग और संतुलित उर्वरकों के नियमित प्रयोग के बारे में बताया। उन्होंने किसानों को यह भी समझाया कि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना दीर्घकालीन कृषि उत्पादन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम में श्री मयंक मेहरा ने किसानों को आय के वैकल्पिक स्रोतों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने लघु एवं कुटीर उद्योगों के माध्यम से आय सृजन के विभिन्न अवसरों पर प्रकाश डालते हुए मशरूम उत्पादन, फल एवं सब्जी प्रसंस्करण तथा मूल्य संवर्धित उत्पादों की संभावनाओं को विस्तार से समझाया। उन्होंने पोषण सुरक्षा और संतुलित आहार के महत्व पर भी चर्चा की, जिससे किसानों और उनके परिवारों का स्वास्थ्य बेहतर हो सके।
संगोष्ठी में मोटे अनाज (मिलेट्स) के महत्व को भी रेखांकित किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि मिलेट्स पोषण से भरपूर होने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन के अनुकूल फसलें हैं, जिनका उपयोग दैनिक आहार में बढ़ाया जाना चाहिए। इससे न केवल स्वास्थ्य लाभ मिलेगा, बल्कि किसानों को बेहतर बाजार अवसर भी प्राप्त होंगे।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रतिभागियों को कृषि विज्ञान केंद्र की विभिन्न प्रदर्शन इकाइयों का भ्रमण कराया गया। इनमें एजोला उत्पादन, न्यूट्रिशन किचन गार्डन, वर्मीकम्पोस्ट, नर्सरी प्रबंधन और प्राकृतिक खेती से जुड़ी इकाइयों को शामिल किया गया। इस भ्रमण के दौरान किसानों को तकनीकों का प्रत्यक्ष अवलोकन करने और उन्हें समझने का अवसर मिला, जिससे वे इन्हें अपने खेतों में अपनाने के लिए प्रेरित हुए।

संगोष्ठी के दौरान वैज्ञानिकों ने समसामयिक कृषि विषयों पर चर्चा करते हुए किसानों की समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया। इससे किसानों को उनकी समस्याओं के व्यावहारिक समाधान प्राप्त हुए और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा।
यह कृषक संगोष्ठी किसानों के लिए ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई। कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, नवाचारों और अतिरिक्त आय के अवसरों की जानकारी मिली, जिससे वे अपनी खेती को अधिक उत्पादक और लाभकारी बना सकेंगे।
इस प्रकार सागर में आयोजित यह संगोष्ठी कृषि क्षेत्र में नवाचारों को बढ़ावा देने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।