कृषि विभाग का जागरूकता कार्यक्रम: किसानों को मिली आधुनिक और टिकाऊ खेती की जानकारी !

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सागर विकासखंड के ग्राम पंचायत पगारा में कृषि विभाग द्वारा किसानों को आधुनिक, पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करने हेतु एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को नई तकनीकों से जोड़कर उनकी कृषि उत्पादकता और आय में वृद्धि करना रहा।


कृषि विशेषज्ञों ने दी महत्वपूर्ण जानकारी

कार्यक्रम में कृषि विस्तार अधिकारी आसमा कुर्मी, निशि जैन और प्रवीण साहू ने किसानों को खेती से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। उन्होंने किसानों को बताया कि आज की खेती में वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग करना बेहद जरूरी है, जिससे उत्पादन बढ़े और लागत कम हो सके।


नरवाई प्रबंधन पर विशेष जोर

अधिकारियों ने किसानों को विशेष रूप से नरवाई प्रबंधन के प्रति जागरूक किया। उन्होंने बताया कि फसल अवशेषों को जलाना न केवल मिट्टी की उर्वरता को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि वायु प्रदूषण का भी बड़ा कारण बनता है।

इसके स्थान पर उन्होंने किसानों को सलाह दी कि नरवाई को खेत में ही मिलाकर प्राकृतिक खाद तैयार की जाए। इससे मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है और आगामी फसल की उत्पादकता भी बढ़ती है।


मिट्टी परीक्षण और सॉइल हेल्थ कार्ड की अहमियत

कार्यक्रम में किसानों को मिट्टी परीक्षण (Soil Testing) और सॉइल हेल्थ कार्ड की उपयोगिता के बारे में भी विस्तार से समझाया गया। अधिकारियों ने बताया कि मिट्टी की जांच से यह पता चलता है कि भूमि में किन पोषक तत्वों की कमी है, जिससे किसान संतुलित मात्रा में ही उर्वरक का उपयोग कर सकते हैं।

इससे न केवल अनावश्यक खर्च कम होता है, बल्कि फसल की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता में भी सुधार होता है।


ई-टोकन प्रणाली की जानकारी

कृषि अधिकारियों ने किसानों को उपार्जन प्रक्रिया को सरल बनाने वाली ई-टोकन प्रणाली के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस प्रणाली के माध्यम से किसान अपनी उपज को आसानी से निर्धारित समय पर बेच सकते हैं, जिससे उन्हें अनावश्यक भीड़ और परेशानी से राहत मिलती है।


जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा

कार्यक्रम में किसानों को भविष्य की खेती के रूप में जैविक और प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह दी गई। अधिकारियों ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों के बजाय जैविक खाद जैसे गोबर खाद, जीवामृत और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने से—

  • खेती की लागत कम होती है
  • भूमि की उर्वरता बनी रहती है
  • फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है
  • और पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलती है

किसानों की सक्रिय भागीदारी

इस जागरूकता कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय किसान उपस्थित रहे। किसानों ने कृषि अधिकारियों से विभिन्न तकनीकी प्रश्न पूछे और खेती से जुड़ी नई जानकारियां प्राप्त कीं। पगारा केंद्र के अधिकारियों ने भी कार्यक्रम के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


ग्रामीण कृषि विकास की दिशा में कदम

यह कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि विकास और तकनीकी जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ऐसे आयोजनों से किसानों को नई तकनीकों की जानकारी मिलती है, जिससे वे अपनी खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बना सकते हैं।


ग्राम पंचायत पगारा में आयोजित यह कृषि जागरूकता कार्यक्रम किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हुआ। इसमें दी गई जानकारियों से स्पष्ट है कि यदि किसान आधुनिक तकनीक, जैविक खेती और सरकारी योजनाओं को अपनाएं, तो वे न केवल अपनी आय बढ़ा सकते हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

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