खंडवा विसर्जन हादसा – एक ही वक्त में जली 11 चिताएं, 8 साल की चंदा के शव के पास खेलती रहीं बहनें !

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खंडवा, 3 अक्टूबर: खंडवा जिले में दुर्गा विसर्जन के दौरान हुए हादसे में जान गंवाने वाले 11 लोगों का शुक्रवार को अंतिम संस्कार किया गया। गुरुवार को शोभायात्रा के दौरान सभी लोग डीजे पर नाच-गाना कर रहे थे, लेकिन आज पूरे गांव में शोक का माहौल है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

8 साल की चंदा की मौत से परिवार में मातम

हादसे में 8 साल की बच्ची चंदा का शव सबसे आखिरी में पानी से निकाला गया। चंदा की दो छोटी बहनें अपने घर के पास खेल रही थीं और उन्हें इस बात का पता नहीं है कि उनकी बड़ी बहन अब इस दुनिया में नहीं रही। हादसे में जान गंवाने वालों की उम्र 8 साल से लेकर 25 साल तक थी।

हादसे की पूरी घटना

गुरुवार को दुर्गा विसर्जन के दौरान डैम के बैकवाटर में ट्रैक्टर-ट्रॉली पलट गई थी। ट्रॉली में दुर्गा प्रतिमा के साथ लगभग 30 लोग सवार थे। हादसे में कुल 11 लोगों की मौत हुई।

प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था

  • पंधाना सिविल अस्पताल से शवों को एक-एक करके एम्बुलेंस से गांव लाया गया।
  • संवेदनशील स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने पाडला फाटा में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया।
  • एडिशनल एसपी महेंद्र तारणेकर और डीएसपी हेडक्वार्टर अनिल सिंह चौहान भी मौके पर मौजूद रहे।

राजनीतिक हस्तक्षेप और मदद का आश्वासन

  • मंत्री विजय शाह ने पाडला फाटा में मृतकों के परिजनों से घर-घर जाकर मुलाकात की और उन्हें सरकार की ओर से हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
  • कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी भी गांव पहुंचे और परिजनों से मिलकर उनका हाल जाना। उन्होंने कहा कि मृतकों में कई इकलौती संतान थी और यह घटना बेहद विभत्स है।
  • जीतू पटवारी ने मांग की कि पीड़ित परिवारों को एक-एक करोड़ रुपए मुआवजा दिया जाए। उन्होंने प्रशासन से यह भी कहा कि पीड़ितों के घरों तक भोजन की व्यवस्था तुरंत की जाए क्योंकि कई परिवार दो दिन से भूखे थे।

मुख्यमंत्री की आने की तैयारी

भाजपा जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह तोमर ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शाम 5 बजे तक गांव पहुंचेंगे और मृतकों के परिजनों से मुलाकात करेंगे। इसके लिए पुलिस और प्रशासन ने गांव के बाहर हैलीपेड बनाने की तैयारी शुरू कर दी है।

परिस्थितियों का हाल

गांव में शोक का माहौल है। परिजन अपने खोए हुए प्रियजनों की याद में संवेदनशील स्थिति में हैं। प्रशासन और पुलिस प्रशासनिक कार्रवाई में जुटे हैं, जबकि राजनीतिक हस्तक्षेप से पीड़ितों को मदद मिलने की उम्मीद है।

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