खुरई के शहरी थाना क्षेत्र अंतर्गत मूड़री गांव में शुक्रवार रात एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां खेत में बनी एक मजदूर परिवार की झोपड़ी में अचानक आग लग गई। इस घटना में एक महिला और उसकी बेटी झुलस गईं, जिन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मजदूर नन्नू आदिवासी अपने परिवार के साथ खेत में बनी अस्थायी झोपड़ी में रह रहा था। वह सतना से मजदूरी करने के लिए अपने परिवार सहित यहां आया था और किसान के खेत में फसल कटाई का काम कर रहा था। शुक्रवार को दिनभर काम करने के बाद पूरा परिवार रात में झोपड़ी में सो गया था।
रात के दौरान अचानक झोपड़ी में आग लग गई। आग लगने के कारण झोपड़ी के अंदर तेज गर्मी फैलने लगी, जिससे नन्नू आदिवासी की नींद खुल गई। जब उसने देखा कि झोपड़ी में आग भड़क चुकी है, तो उसने तुरंत सतर्कता दिखाते हुए टीन टप्पर हटाकर अपनी पत्नी बेलाबाई और बेटी निराशा को बाहर निकालने का प्रयास किया।

हालांकि बाहर निकलते समय दोनों आग की चपेट में आ गईं, जिससे उनके हाथ-पैर झुलस गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास के लोगों ने भी मदद की और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची और घायल मां-बेटी को तत्काल सिविल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार दोनों की स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
इस आगजनी की घटना में मजदूर परिवार की झोपड़ी पूरी तरह जलकर खाक हो गई। झोपड़ी में रखा सारा घरेलू सामान, कपड़े और जरूरी वस्तुएं भी आग में नष्ट हो गईं। अब परिवार के पास केवल वही कपड़े बचे हैं, जो उन्होंने उस समय पहन रखे थे।

प्रारंभिक तौर पर आग लगने के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल सका है, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि यह हादसा किसी चिंगारी या गर्मी के कारण हुआ हो सकता है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
यह घटना मजदूर परिवारों की असुरक्षित जीवन परिस्थितियों को भी उजागर करती है, जहां वे अस्थायी झोपड़ियों में रहकर काम करते हैं और इस तरह के हादसों का खतरा हमेशा बना रहता है। स्थानीय प्रशासन से उम्मीद की जा रही है कि प्रभावित परिवार को राहत और सहायता प्रदान की जाएगी |