खुरई गोशाला में सांड की मौत पर बवाल: भोजन न मिलने के आरोप में चक्काजाम, प्रशासन के आश्वासन पर खुला रास्ता !

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मध्यप्रदेश के खुरई में नगर पालिका की हनौता गोशाला से जुड़ा एक मामला शुक्रवार को बड़ा विवाद बन गया, जब एक सांड की मौत के बाद लोगों का गुस्सा सड़क पर फूट पड़ा। ‘लालू’ नाम के इस सांड की मौत को लेकर गोसेवकों और स्थानीय नागरिकों ने गोशाला प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। घटना ने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, बल्कि पशुओं की देखरेख को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।

जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम पीपल चौराहा क्षेत्र में ‘लालू’ सांड की अचानक मौत हो गई। जैसे ही यह खबर फैली, आसपास के लोग और गोसेवक मौके पर इकट्ठा हो गए। गुस्साए लोगों ने सांड के शव को एक पिकअप वाहन में रखकर परसा चौराहे पर ले जाकर सड़क के बीचों-बीच खड़ा कर दिया और चक्काजाम कर दिया। इस दौरान नगर पालिका और गोशाला प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।

करीब एक घंटे तक चले इस प्रदर्शन के कारण ट्रैफिक पूरी तरह बाधित हो गया। चौराहे पर लंबी कतारों में वाहन फंस गए, जिससे आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और प्रशासन को तुरंत मौके पर पहुंचना पड़ा।

गोसेवकों का आरोप है कि नगर पालिका शहर से आवारा मवेशियों को पकड़कर गोशाला में तो भेज देती है, लेकिन वहां उनके लिए पर्याप्त भोजन और देखभाल की व्यवस्था नहीं होती। गौसेवक दिव्यांश सिंघई ने बताया कि ‘लालू’ सांड को लगभग 15 दिन पहले टैगोर वार्ड से पकड़कर गोशाला भेजा गया था। वहां उसे केवल भूसा दिया जाता था, जिससे उसकी हालत धीरे-धीरे खराब हो गई।

आरोप यह भी है कि जब सांड की हालत बिगड़ने लगी, तो गोशाला प्रबंधन ने जिम्मेदारी लेने के बजाय उसे वापस टैगोर वार्ड में छोड़ दिया। वहीं उसकी तबीयत और बिगड़ी और अंततः उसकी मौत हो गई। इस पूरे घटनाक्रम ने गोशाला की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना की सूचना मिलते ही थाना प्रभारी योगेंद्र सिंह दांगी और नायब तहसीलदार मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे लोगों से बातचीत की और उन्हें शांत करने का प्रयास किया। काफी समझाइश के बाद प्रशासन ने गोशाला की व्यवस्थाओं में सुधार का आश्वासन दिया, जिसके बाद लोगों ने जाम समाप्त किया।

गोसेवकों ने नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते हुए गोशाला में पशुओं के लिए उचित भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द सुधार नहीं किया गया, तो आगे और बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

जाम समाप्त होने के बाद स्थानीय लोगों ने सांड ‘लालू’ की अंतिम यात्रा निकाली और उसे विधिवत दफनाया। इस दौरान कई लोग भावुक भी नजर आए, जो इस घटना को केवल एक पशु की मौत नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की अनदेखी मान रहे थे।

यह घटना साफ तौर पर दर्शाती है कि पशु संरक्षण और देखभाल के नाम पर बनाई गई व्यवस्थाएं कई बार कागजों तक ही सीमित रह जाती हैं। यदि गोशालाओं में सही ढंग से भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जाती, तो ऐसे हादसे दोहराए जाना तय है।

प्रशासन के लिए यह एक चेतावनी है कि वह केवल आश्वासन देने तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई करे। गोशालाओं की नियमित जांच, पारदर्शी व्यवस्था और जिम्मेदारी तय करना जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी भी बेजुबान को इस तरह की पीड़ा का सामना न करना पड़े।

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