सागर/रहली। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और रहली से 9 बार विधायक रह चुके गोपाल भार्गव एक बार फिर अपने बयान को लेकर राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में आ गए हैं। सोमवार को रहली विधानसभा क्षेत्र में आयोजित विकास कार्यों के भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान मंच से दिया गया उनका बयान न केवल सियासी हलकों में बल्कि संगठन के भीतर भी कई सवाल खड़े कर रहा है।
अपने संबोधन में पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव ने कांग्रेस से ऑफर मिलने की बात सार्वजनिक रूप से स्वीकार करते हुए अपने राजनीतिक संघर्ष, पार्टी के प्रति निष्ठा और उपेक्षा की पीड़ा को खुलकर रखा। उन्होंने कहा कि राजनीति में उपेक्षा किसी भी व्यक्ति को भीतर से तोड़ देती है। अगर कोई व्यक्ति लगातार अपनी बात सरकार तक पहुंचाने की कोशिश करता रहे, संघर्ष करता रहे, लेकिन उसकी बात नहीं सुनी जाए, तो उसका मनोबल टूटना स्वाभाविक है।

“20 साल मन को बांधकर रखा”
गोपाल भार्गव ने कहा कि उन्होंने 20 वर्षों तक मन को बांधकर रखा। उन्होंने मंच से बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें पार्टी में आने का प्रस्ताव दिया था। भार्गव ने कहा—
“दिग्विजय सिंह कहते थे कि गोपालजी, बीजेपी में क्या रखा है? आप हमारे पास आ जाइए, मैं आपको अच्छे विभाग का मंत्री बना दूंगा। लेकिन मैंने साफ कहा कि राजा साहब, ये माल टिकाऊ है, बिकाऊ नहीं है।”

उन्होंने कहा कि आज के समय में जहां लोग 20 महीने में राजनीतिक पाला बदल लेते हैं, वहीं उन्होंने 20 साल तक धैर्य और निष्ठा के साथ पार्टी का साथ निभाया।
जनता के भरोसे से विकास कार्य
पूर्व मंत्री भार्गव ने कहा कि उन्होंने हमेशा यह विश्वास रखा कि जब उनकी सरकार आएगी, तब वे अपने क्षेत्र का विकास जरूर कराएंगे। उन्होंने जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि रहली विधानसभा क्षेत्र की जनता ने हर परिस्थिति में उनका साथ दिया, और उसी जनसमर्थन के चलते आज क्षेत्र में विकास कार्य संभव हो पा रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान वे कई विकास कार्यों के भूमिपूजन में शामिल हुए और स्थानीय जनता को संबोधित किया।
संगठन के भीतर स्थिति की ओर इशारा
गोपाल भार्गव का यह बयान केवल व्यक्तिगत अनुभव तक सीमित नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे मौजूदा राजनीतिक हालात और संगठन के भीतर की परिस्थितियों से जोड़कर देखा जा रहा है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव की वर्तमान कैबिनेट में गोपाल भार्गव को मंत्री पद नहीं दिया गया, जबकि वे भाजपा के सबसे वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं में शामिल हैं।
इसके बाद से ही उनके बयानों में नाराजगी, पीड़ा और उपेक्षा के संकेत लगातार सामने आते रहे हैं। इससे पहले भी वे एक बयान में कह चुके हैं कि ब्राह्मण समाज के खिलाफ नियम-कानून बनाए जा रहे हैं और उन्हें योजनाबद्ध तरीके से पीछे धकेला जा रहा है, जिसे लेकर भी सियासी हलकों में काफी चर्चा हुई थी।
9 बार विधायक, मजबूत राजनीतिक कद
गौरतलब है कि गोपाल भार्गव सागर जिले की रहली विधानसभा सीट से अब तक 9 बार विधायक चुने जा चुके हैं। वे लोक निर्माण विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास सहित कई अहम विभागों के मंत्री रह चुके हैं। प्रशासनिक अनुभव, जमीनी पकड़ और संगठन में लंबे समय से सक्रिय भूमिका के चलते उन्हें भाजपा का मजबूत स्तंभ माना जाता रहा है।
उनका ताजा बयान आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति और भाजपा के आंतरिक समीकरणों पर क्या असर डालेगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।