ग्रामीणों ने जनपद प्रतिनिधि पर लगाए कब्जे और मारपीट के आरोप !

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सागर जिले के ग्राम सरेड़ी में जमीन विवाद का मामला सामने आया है, जिसने अब प्रशासनिक स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है। ग्रामीणों ने जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि पृथ्वी सिंह ठाकुर पर कृषि भूमि पर जबरन कब्जा करने और मारपीट करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

मामले को लेकर विरोध जताते हुए ग्रामीण बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉली के माध्यम से जिला मुख्यालय पहुंचे और पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने एसपी के नाम ज्ञापन सौंपते हुए निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की। इसके साथ ही ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यालय में भी अपनी शिकायत प्रस्तुत की है।

ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम सरेड़ी में उनकी पैतृक कृषि भूमि है, जिस पर पिछले डेढ़ वर्ष से लगातार कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। उनका आरोप है कि 15 अप्रैल की रात जब वे अपने खेत में पिलाऊ (खेती संबंधी कार्य) करने जा रहे थे, तब पृथ्वी सिंह ठाकुर और उनके साथियों ने उन्हें रोकते हुए मारपीट की। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि उन्होंने इस घटना की शिकायत बहेरिया थाने में की, लेकिन उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई।

इस पूरे घटनाक्रम से नाराज ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि कब्जा की गई जमीन उन्हें वापस दिलाई जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि समय पर न्याय नहीं मिला तो वे आगे भी आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

मामले में पुलिस की ओर से प्रारंभिक प्रतिक्रिया देते हुए गोपालगंज थाना प्रभारी घनश्याम शर्मा ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि शिकायत की निष्पक्ष जांच की जाएगी और तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

वहीं दूसरी ओर, जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि पृथ्वी सिंह ठाकुर ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि यह आरोप पूरी तरह झूठे और निराधार हैं। उन्होंने दावा किया कि संबंधित भूमि सरकारी है, जिस पर जनपद पंचायत द्वारा पौधरोपण का प्रस्ताव पहले ही पारित किया जा चुका है।

उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व में संबंधित स्थान का निरीक्षण प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा किया गया था और वहां पौधरोपण की योजना बनाई गई थी। उनके अनुसार, शिकायत करने वाले ग्रामीण स्वयं उस सरकारी भूमि पर पिलाऊ कार्य कर रहे थे, जिसे रोकने पर उन्होंने यह विवाद खड़ा किया है।

इस प्रकार, एक ही मामले में दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं, जिससे स्थिति जटिल बनी हुई है। एक ओर ग्रामीण अपने अधिकारों की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जनप्रतिनिधि सरकारी भूमि के संरक्षण की बात कर रहे हैं।

अब यह मामला प्रशासन और पुलिस की जांच पर निर्भर करता है कि वास्तविक स्थिति क्या है। निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि भूमि किसकी है और आरोपों में कितनी सच्चाई है।

फिलहाल, इस विवाद ने क्षेत्र में तनाव की स्थिति पैदा कर दी है, और सभी की नजरें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यदि समय रहते उचित समाधान नहीं निकाला गया, तो यह विवाद और अधिक गंभीर रूप ले सकता है।

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