ग्वालियर।
जीवाजी विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट हॉस्टल में एक गंभीर घटना सामने आई है, जिसमें फार्मेसी के छात्रों ने बीकॉम एलएलबी के 10वें सेमेस्टर के छात्र सुधांशु अस्थाना को लात-घूंसों से पीट दिया। घटना 2 फरवरी की शाम की है।
घटना का विवरण
सुधांशु अस्थाना ने बताया कि वह शाम को हॉस्टल के बाहर टहल रहे थे। उसी समय फार्मेसी थर्ड और फोर्थ ईयर के छात्र हिमांशु शुक्ला, अनंत प्रताप सिंह, आनंद चतुर्वेदी, सौरभ गुर्जर, निखिल कुशवाह, गौरव जाट और सौरभ तिवारी हॉस्टल में शराब पार्टी कर रहे थे।
सुधांशु के मुताबिक, पार्टी के दौरान फार्मेसी छात्र शोर मचा रहे थे और गाली-गलौज कर रहे थे। जब उन्होंने इसे रोकने का प्रयास किया और गाली देने से मना किया, तो ये छात्र हॉस्टल से नीचे उतर आए और सुधांशु पर मारपीट शुरू कर दी।
इस हमले में सुधांशु को मोच और राइट हैंड का शोल्डर डैमेज जैसी गंभीर चोटें आईं। घटना का CCTV फुटेज भी मौजूद है।

पहले भी उठे हैं रैगिंग और शराब पार्टी के मामले
सुधांशु अस्थाना ने बताया कि यह पहली घटना नहीं है। हॉस्टल में कई बार रैगिंग और असभ्य व्यवहार की शिकायतें हो चुकी हैं, लेकिन विश्वविद्यालय प्रबंधन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
उन्होंने कहा:
“2021 से इस हॉस्टल में रह रहा हूं। फार्मेसी के कुछ छात्र आने के बाद माहौल बिगड़ गया है। ये जूनियर होने के बावजूद अभद्र व्यवहार करते हैं, पास से गुजरते समय कमेंट करते हैं और शोर मचाते हैं।”
पूर्व में रैगिंग की शिकायतों पर 8 सीनियर छात्रों को परीक्षा से वंचित भी किया गया, इसके बावजूद ऐसी घटनाएं जारी हैं।

पीड़ित ने की शिकायत, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं
सुधांशु ने UGC, जीवाजी विश्वविद्यालय प्रबंधन और पुलिस से शिकायत की, लेकिन उनका कहना है कि कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसके कारण उन्होंने कोर्ट में इस्तेगासा दायर किया है।
विश्वविद्यालय का बयान
जीवाजी विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. विमलेन्द्र सिंह राठौर ने कहा:
“यह मामला रैगिंग है या आपसी विवाद, इसकी जांच की जाएगी। हॉस्टल के बाहर छात्रों में विवाद हुआ, जिसमें लॉ के छात्र को फार्मेसी छात्रों ने पीटा। कुलगुरु से शिकायत की गई है और फार्मेसी संस्थान से मारपीट में शामिल छात्रों की जानकारी मांगी गई है। जांच समिति बनाएंगे और तथ्य सामने आने पर कार्रवाई होगी।”
घटना की गंभीरता
इस घटना ने न केवल हॉस्टल में छात्रों की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं, बल्कि रैगिंग और शराब पार्टी जैसी गतिविधियों के खिलाफ विश्वविद्यालय की व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि सख्त और समय पर कार्रवाई न होने से ऐसे मामले बार-बार सामने आ रहे हैं।