बागेश्वर धाम में मंगलवार को आरती के दौरान बिहार निवासी 46 वर्षीय महिला मंगला देवी की साड़ी में आग लग गई, जिससे वह गंभीर रूप से झुलस गईं। घटना के तुरंत बाद उन्हें जिला अस्पताल के बर्न वार्ड में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में जारी है।
जानकारी के अनुसार, मंगला देवी, करियाघाट गांव (थाना पठिया) की रहने वाली हैं और अपने पति महेंद्र व अन्य परिजनों के साथ बागेश्वर धाम दर्शन के लिए आई थीं। आरती के समय गदा स्थल के पास नीचे जमीन पर दीपक रखे गए थे। इसी दौरान महिला की साड़ी दीपक की लौ की चपेट में आ गई और आग तेजी से फैल गई।
महिला की साड़ी में आग लगते ही धाम परिसर में अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद श्रद्धालु और धाम के सेवादार तुरंत मदद के लिए आगे आए। उन्होंने कंबल और अन्य उपलब्ध साधनों की मदद से आग पर काबू पाया और मंगला देवी को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर जिला अस्पताल भेजा। सेवादारों की तत्परता ने महिला की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
डॉक्टरों ने बताया कि आग लगने से महिला के हाथ, पैर और शरीर के कई हिस्से गंभीर रूप से झुलस गए हैं। फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है और उन्हें बर्न वार्ड में विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में रखा गया है। इलाज के दौरान महिला की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
स्थानीय प्रशासन और धाम प्रबंधन ने घटना के तुरंत बाद सुरक्षा और राहत कार्यों को सुनिश्चित किया। यह हादसा यह दर्शाता है कि धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा उपायों का पालन न होने पर गंभीर हादसे हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आरती या किसी धार्मिक अनुष्ठान के दौरान खुली आग के आसपास सतर्कता और सुरक्षित दूरी बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।

घटना ने बागेश्वर धाम में सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। श्रद्धालुओं और आगंतुकों को आग से सुरक्षित रखने के लिए धाम प्रबंधन ने हालात का आंकलन किया है और भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए अतिरिक्त सावधानियां बरतने की योजना बनाई है। इसमें दीपक रखने की जगह को सुरक्षित बनाना और आग बुझाने के उपकरण की उपलब्धता सुनिश्चित करना शामिल है।
स्थानीय लोग और परिवारजन भी इस हादसे से स्तब्ध हैं। परिजनों का कहना है कि यदि धाम के सेवादार और आसपास मौजूद लोग समय पर मदद के लिए नहीं आते, तो परिणाम और भी गंभीर हो सकता था। उन्होंने प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था और आग से बचाव के उपायों को कड़ा करने की मांग की है।
बागेश्वर धाम में आरती के दौरान यह हादसा एक चेतावनी के रूप में सामने आया है कि धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा नियमों का पालन बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि आग, दीपक और अन्य ज्वलनशील वस्तुओं के आसपास सतर्कता बरतना जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस घटना से यह भी स्पष्ट हुआ कि आपातकालीन परिस्थितियों में तुरंत प्रतिक्रिया और प्रशिक्षित कर्मियों की मौजूदगी कितनी महत्वपूर्ण होती है। मंगला देवी के जीवन को बचाने में धाम के सेवादारों की तत्परता सराहनीय रही और उनकी जान सुरक्षित रही।
धाम प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। सुरक्षा उपकरणों की संख्या बढ़ाई जाएगी और आग से संबंधित संभावित खतरों के प्रति श्रद्धालुओं को जागरूककिया जाएगा।