छतरपुर के भीमकुंड में मिला अज्ञात शव, SDRF ने किया रेस्क्यू; तीन साल पुराने डूबे युवक का अब तक नहीं मिला सुराग, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल !

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छतरपुर जिले के प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थल भीमकुंड में गुरुवार को उस समय सनसनी फैल गई जब कुंड के पानी में एक अज्ञात व्यक्ति का शव तैरता हुआ दिखाई दिया। घटना की सूचना मिलते ही बक्सवाहा तहसीलदार भरत पांडे और बाजना थाना प्रभारी अयोध्या प्रसाद यादव पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।

भीमकुंड की अत्यधिक गहराई और दुर्गम संरचना के कारण शुरुआती स्तर पर पुलिस और स्थानीय गोताखोरों द्वारा शव निकालने का प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। शव को बाहर निकालने के लिए कांटे और रस्सियों की मदद ली गई, परंतु गहराई अधिक होने के कारण शव और नीचे चला गया, जिससे रेस्क्यू कार्य में कठिनाई बढ़ गई।

इसके बाद जिला प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य आपदा आपातकालीन प्रतिक्रिया बल (SDERF) की टीम को मौके पर बुलाया। SDRF की टीम ने शुक्रवार को कई घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद शव को सुरक्षित रूप से बाहर निकाल लिया। हालांकि, शव की शिनाख्त अभी तक नहीं हो सकी है, जिसके लिए पुलिस आसपास के गांवों में पूछताछ कर रही है और गुमशुदगी के मामलों से मिलान किया जा रहा है।

स्थानीय प्रशासन के अनुसार, शव की स्थिति और कुंड की गहराई को देखते हुए यह एक चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन था। फिलहाल शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, ताकि मौत के कारणों का पता लगाया जा सके।

गौरतलब है कि भीमकुंड में यह कोई पहली घटना नहीं है। करीब तीन साल पहले भी एक युवक कुंड में डूब गया था, जिसका शव आज तक बरामद नहीं हो सका है। इस घटना के बाद भी प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कई कदम उठाए गए थे।

हाल ही में जिला कलेक्टर पार्थ जैसवाल के निर्देश पर भीमकुंड क्षेत्र के चारों ओर बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई थी। इसके बावजूद इस तरह की घटना का सामने आना सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों की ओर इशारा करता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि भीमकुंड एक गहरा और खतरनाक जल क्षेत्र है, जहां पर्यटकों की आवाजाही पर सख्त नियंत्रण और निगरानी जरूरी है। उनका यह भी कहना है कि बैरिकेडिंग के बावजूद लोग कई बार प्रतिबंधित क्षेत्रों तक पहुंच जाते हैं, जिससे हादसों का खतरा बढ़ जाता है।

इस घटना के बाद क्षेत्र में एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि भीमकुंड जैसे संवेदनशील स्थानों पर स्थायी निगरानी, चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और मृतक की पहचान स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं यह घटना एक बार फिर इस बात को उजागर करती है कि धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा उपायों को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है।

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