छतरपुर जिले के दौधन गांव में केन-बेतवा लिंक परियोजना से जुड़े अतिक्रमण हटाने के दौरान एक गंभीर हादसा सामने आया है। प्रशासनिक कार्रवाई के बीच एक आदिवासी परिवार का मकान गिरने से पति-पत्नी और दो बच्चे मलबे में दबकर घायल हो गए। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया और ग्रामीणों ने जमकर विरोध किया।
घटना के बाद प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या घर गिराने से पहले अंदर मौजूद लोगों की स्थिति की ठीक से जांच की गई थी या नहीं।

कार्रवाई के दौरान घर पर चला बुलडोजर
जानकारी के अनुसार, दौधन गांव में केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत अतिक्रमण हटाने के लिए पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम पहुंची थी। टीम के साथ जेसीबी मशीनें और भारी पुलिस बल मौजूद था।
इसी दौरान आदिवासी परिवार के घर पर भी कार्रवाई शुरू कर दी गई। आरोप है कि मकान के अंदर परिवार मौजूद था, इसके बावजूद जेसीबी से ढांचा गिरा दिया गया।
मलबे में दबा परिवार, वीडियो में चीख-पुकार
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जैसे ही मकान गिरा, पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घर के अंदर मौजूद परिवार मलबे में दब गया। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू कर उन्हें बाहर निकाला।
पीड़ित परिवार को गंभीर हालत में बाहर निकाला गया, जिसमें पति-पत्नी खून से लथपथ थे और एक बच्चा बेहोश अवस्था में मिला। घटना के वीडियो में परिवार मदद की गुहार लगाते हुए दिखाई दे रहा है।
ग्रामीणों का गुस्सा, पथराव और हिंसा
घटना की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध करने लगे। स्थिति तेजी से बिगड़ गई और ग्रामीणों ने पथराव शुरू कर दिया।
पथराव में प्रशासनिक वाहनों को नुकसान पहुंचा, जिसमें एडिशनल एसपी की गाड़ी, तहसीलदार का वाहन और एक जेसीबी मशीन शामिल है। कई गाड़ियों के शीशे टूट गए और स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।
इसके बाद प्रशासनिक टीम को पीछे हटना पड़ा।
गांव में पुलिस बल तैनात, स्थिति तनावपूर्ण
घटना के बाद पूरे इलाके को पुलिस छावनी में बदल दिया गया है। अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।

प्रशासन का कहना है कि पथराव और हिंसा में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और आगे कार्रवाई की जाएगी।
केन-बेतवा परियोजना के तहत चल रही थी कार्रवाई
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई केन-बेतवा लिंक परियोजना से जुड़े क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के लिए की जा रही थी।
अधिकारियों का कहना है कि पहले से नोटिस और समझाइश दी गई थी, और यह कार्रवाई कानून व्यवस्था बनाए रखने के तहत की गई।
ग्रामीणों के आरोप और प्रशासन पर सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि कार्रवाई जल्दबाजी में की गई और यह सुनिश्चित नहीं किया गया कि मकान खाली है या नहीं। उनका कहना है कि यदि परिवार अंदर मौजूद था तो बुलडोजर चलाना गंभीर लापरवाही है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या प्रशासन ने सुरक्षा मानकों का पालन किया और क्या बिना जांच के घर गिराने की कार्रवाई उचित थी।
जांच की मांग तेज
घटना के बाद स्थानीय लोग और सामाजिक संगठन प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और जिनकी लापरवाही से यह हादसा हुआ है, उन पर कार्रवाई की जाए।
फिलहाल इलाके में तनाव बना हुआ है और पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए है।