छतरपुर में सरकारी कार्यालय में रिश्वतखोरी का सनसनीखेज खुलासा !

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छतरपुर। नए साल के अवसर पर जिला आयुष कार्यालय में चल रही न्यू ईयर पार्टी के बीच सागर लोकायुक्त ने जिला आयुष अधिकारी डॉ. निर्मला कुशवाहा और सहायक ग्रेड-2 बाबू अनिल साहू को 5,000 रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई उस समय की गई जब कार्यालय में कार्यक्रम चल रहा था।

रिश्वत की मांग का मामला
लोकायुक्त टीम के अनुसार, डॉ. निर्मला कुशवाहा ने अपने विभाग के चपरासी अविनाश चंद्र मिश्रा से 20 दिन की छुट्टी स्वीकृत करने के एवज में 5,000 रुपए की मांग की थी। चपरासी की शिकायत पर लोकायुक्त ने ट्रेपिंग की और ऑफिस में ही कार्रवाई अंजाम दी।

अविनाश चंद्र मिश्रा का बयान
पीड़ित चपरासी अविनाश चंद्र मिश्रा ने बताया, “मैडम मेरी छुट्टी और वेतन स्वीकृत करने के एवज में 5,000 रुपए मांग रही थीं। आज मैंने पैसे दिए और इसी दौरान लोकायुक्त टीम ने रंगे हाथों पकड़ लिया।”

डॉ. निर्मला का बचाव
जिला आयुष अधिकारी डॉ. निर्मला कुशवाहा ने कहा कि यह चपरासी पिछले डेढ़ महीने से लगातार परेशान कर रहा था। उन्होंने दावा किया, “मैंने कभी रिश्वत नहीं मांगी। आज पर्स में जबरन 5,000 रुपये डालकर भागा। ऑफिस में न्यू ईयर पार्टी का कार्यक्रम चल रहा था, सब हंसी-मजाक में था। मुझे फंसाया गया है।”

सहायक का पक्ष
सहायक ग्रेड-2 बाबू अनिल साहू ने कहा कि पैसे अधिकारी ने मांगे थे, उनका इसमें कोई रोल नहीं था। उन्होंने बताया कि वे केवल अधिकारी और चपरासी के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे थे।

लोकायुक्त का बयान
लोकायुक्त निरीक्षक कमल सिंह ने बताया कि चपरासी की शिकायत पर ट्रेपिंग की गई और कार्रवाई में जिला आयुष अधिकारी और सहायक को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कहा कि दोनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

यह मामला छतरपुर में सरकारी अधिकारियों में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की सजग कार्रवाई को उजागर करता है। न्यू ईयर के अवसर पर कार्यालय में हुई गिरफ्तारी ने प्रशासनिक पदों पर जवाबदेही और पारदर्शिता की आवश्यकता पर सवाल खड़ा कर दिया है।

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