जनजातीय विकास को नई दिशा देने की तैयारी, विभागीय परामर्श समिति की बैठक में मंत्री डॉ. विजय शाह ने दिए महत्वपूर्ण निर्देश !

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भोपाल। जनजातीय समाज के समग्र विकास, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सशक्तिकरण को लेकर जनजातीय कार्य विभाग की विभागीय परामर्श समिति की महत्वपूर्ण बैठक मंगलवार को वल्लभ भवन में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने की। बैठक में जनजातीय क्षेत्रों में संचालित योजनाओं की समीक्षा की गई तथा शिक्षा, छात्रावास व्यवस्था, विशेष पिछड़ी जनजातियों के उत्थान और वनाधिकार से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा करते हुए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए।

बैठक में मंत्री डॉ. विजय शाह ने स्पष्ट कहा कि जनजातीय क्षेत्रों के दूरस्थ और बिखरे हुए गांवों में संचालित छात्रावासों का युक्तियुक्तकरण कर उन्हें ब्लॉक मुख्यालयों पर व्यवस्थित किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण, संसाधन और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कई ब्लॉक मुख्यालयों में कॉलेज स्थापित हो चुके हैं, लेकिन दूरस्थ जनजातीय गांवों से विद्यार्थियों, विशेष रूप से छात्राओं, को आने-जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसे देखते हुए ब्लॉक स्तर पर बस सुविधा प्रारंभ किए जाने की आवश्यकता है।

बैठक में मौजूद विधायकों ने मंत्री डॉ. विजय शाह द्वारा अपने क्षेत्र में जनजातीय छात्राओं के लिए प्रारंभ की गई बस सुविधा की सराहना की। सदस्यों ने कहा कि इस पहल से बड़ी संख्या में छात्राओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सहायता मिली है। साथ ही विभिन्न कन्या छात्रावासों का नामकरण रानी दुर्गावती और शबरी माता के नाम पर किए जाने को भी जनजातीय गौरव और सांस्कृतिक सम्मान से जोड़ते हुए सराहा गया।

बैठक के दौरान फर्जी जाति प्रमाण पत्रों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। समिति के सदस्यों ने कहा कि जनजातीय वर्ग के नाम पर बनाए गए फर्जी जाति प्रमाण पत्रों की जांच शीघ्रता से पूरी की जानी चाहिए। सदस्यों का मत था कि इस प्रकार के मामलों के कारण वास्तविक पात्र जनजातीय युवाओं के अधिकार प्रभावित होते हैं। मंत्री डॉ. विजय शाह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों की गंभीरता से जांच कर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

बैठक में यह भी तय किया गया कि विशेष पिछड़ी जनजातियों — सहारिया, बैगा और भारिया — के समग्र विकास के लिए विशेष रणनीति बनाई जाएगी। मंत्री डॉ. विजय शाह ने कहा कि इन समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए अलग से योजनाएं लागू करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बैगा जनजाति के लिए उमरिया, सहारिया जनजाति के लिए शिवपुरी तथा भारिया जनजाति के लिए छिंदवाड़ा में विशेष विद्यालय प्रारंभ किए जाएंगे।

मंत्री डॉ. शाह ने विशेष रूप से भारिया जनजाति में घटती जन्मदर को गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने निर्देश दिए कि विभाग विशेषज्ञों के माध्यम से इस विषय का अध्ययन कराए और शोध रिपोर्ट तैयार कराए, ताकि इसके पीछे के कारणों का पता लगाकर आवश्यक कदम उठाए जा सकें। उन्होंने कहा कि किसी भी जनजाति की सामाजिक और जनसंख्या संरचना का संरक्षण बेहद महत्वपूर्ण है और इसके लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण से कार्य करने की आवश्यकता है।

बैठक में पातालकोट क्षेत्र के भारिया बहुल गांवों के विकास को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। मंत्री डॉ. विजय शाह ने कहा कि पातालकोट जैसे दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय परिवारों तक शासन की सभी योजनाओं का लाभ पहुंचाना प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विभागीय परामर्श समिति के सदस्यों और स्थानीय विधायकों के सहयोग से सहारिया, बैगा और भारिया जनजातियों के एक-एक गांव को आदर्श गांव के रूप में विकसित किया जाएगा। इन गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल, आवास और रोजगार सहित सभी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी।

बैठक में छात्रावासों और आश्रमों की व्यवस्थाओं को लेकर भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए। सदस्यों ने कहा कि छात्रावासों में विद्यार्थियों को चादर और अन्य सामग्री खरीदने के लिए डीबीटी के माध्यम से राशि देने के बजाय सीधे सामग्री उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके और विद्यार्थियों को समय पर आवश्यक सुविधाएं मिल सकें। इसके अलावा छात्रावासों और आश्रमों में अधीक्षकों की अलग से भर्ती किए जाने की मांग भी उठी। सदस्यों का कहना था कि वर्तमान में शिक्षकों को अतिरिक्त जिम्मेदारी दी जाती है, जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित होता है। इसलिए पृथक अधीक्षक नियुक्त कर शिक्षकों को केवल अध्यापन कार्य में लगाया जाना चाहिए।

वनाधिकार से जुड़े मामलों में भी बैठक में महत्वपूर्ण चर्चा हुई। वनवासियों को भूमि पट्टे देने की प्रक्रिया में सैटेलाइट इमेज को प्रमाण के रूप में मान्य किए जाने की पहल की सराहना की गई। मंत्री डॉ. विजय शाह ने कहा कि इससे दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले वनवासियों को अपने अधिकार प्राप्त करने में आसानी होगी और वास्तविक पात्र परिवारों को लाभ मिल सकेगा।

बैठक में मंत्री डॉ. शाह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभाग के सभी संभागीय अधिकारी संबंधित विधायकों और जिला कलेक्टरों के साथ संयुक्त बैठकें आयोजित करें, ताकि जनजातीय क्षेत्रों की स्थानीय आवश्यकताओं और समस्याओं के अनुसार योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा सके। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों की सहभागिता से योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन अधिक बेहतर ढंग से संभव हो सकेगा।

मंत्री डॉ. विजय शाह ने यह भी कहा कि वे जल्द ही प्रदेश के अंतिम छोर पर स्थित सीधी जिले का दौरा करेंगे और वहां जनजातीय क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा कर आवश्यक निर्णय लेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि प्रदेश के हर जनजातीय परिवार तक विकास की रोशनी पहुंचे और उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तथा सम्मानजनक जीवन के अवसर उपलब्ध कराए जाएं।

बैठक में विधायक कुंवर सिंह टेकाम, जयसिंह मरावी, फुंदेलाल सिंह मार्को, गंगा सज्जन सिंह उइके, राजन मंडलोई, प्रमुख सचिव गुलशन बामरा तथा आयुक्त तरुण राठी सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

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