दमोह।
दमोह कलेक्ट्रेट में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान उस समय हड़कंप मच गया, जब एक युवक ने पंचायत सचिव पद पर नियुक्ति नहीं मिलने से नाराज होकर कलेक्टर को खुली चेतावनी दे डाली। युवक ने आरोप लगाया कि पात्र होने और अधिक अंक प्राप्त करने के बावजूद उसे नौकरी नहीं दी गई, जबकि कम अंक वाले सामान्य वर्ग के उम्मीदवार की नियुक्ति कर दी गई। आक्रोशित युवक ने कहा कि यदि उसे न्याय नहीं मिला तो वह कानून अपने हाथ में लेने और परिवार सहित आत्मदाह करने के लिए मजबूर होगा।

जानकारी के अनुसार समन्ना गांव निवासी लक्ष्मण प्रसाद अहिरवार मंगलवार को जनसुनवाई में अपनी शिकायत लेकर पहुंचे थे। उन्होंने कलेक्टर प्रताप नारायण यादव को आवेदन सौंपते हुए आरोप लगाया कि वर्ष 2007 में ग्राम पंचायत समन्ना में पंचायत सचिव पद के लिए भर्ती निकाली गई थी।
“SC वर्ग को प्राथमिकता देने का था नियम”
लक्ष्मण प्रसाद अहिरवार का कहना है कि भर्ती विज्ञापन में स्पष्ट उल्लेख था कि अनुसूचित जाति वर्ग के उम्मीदवार को प्राथमिकता दी जाएगी और चयन मेरिट अंकों के आधार पर होना था। उन्होंने दावा किया कि उनके 48.15 अंक थे, जबकि चयनित उम्मीदवार प्रमोद कुमार बचकैया के 47.3 अंक थे।

युवक का आरोप है कि इसके बावजूद अधिकारियों की मिलीभगत से सामान्य वर्ग के उम्मीदवार प्रमोद कुमार बचकैया को नियुक्त कर दिया गया। उन्होंने इसे नियमों के विपरीत और अन्यायपूर्ण बताया।
हाईकोर्ट का आदेश होने का दावा
आवेदक ने बताया कि नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितता को लेकर उन्होंने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। उनके अनुसार वर्ष 2017 में न्यायालय ने आदेश दिया था कि यदि उनके अंक अधिक हैं, तो उन्हें नियुक्ति दी जाए।
हालांकि, युवक का आरोप है कि न्यायालय के आदेश के बाद भी प्रशासनिक अधिकारियों ने उनकी नियुक्ति नहीं की और लगातार मामले को टालते रहे। उन्होंने कहा कि वर्षों से न्याय के लिए भटकने के बावजूद उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला है।
“पढ़ा-लिखा हूं, फिर भी मजदूरी करने को मजबूर”
जनसुनवाई के दौरान युवक भावुक भी नजर आया। उसने कहा कि वह पढ़ा-लिखा होने के बावजूद बेरोजगार है और मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करने को मजबूर है।
उसने कहा कि नौकरी नहीं मिलने के कारण उसके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है। युवक ने आरोप लगाया कि अधिकारी उसकी बात सुनने के बजाय लगातार उसे नजरअंदाज कर रहे हैं।
जनसुनवाई में दी खुली चेतावनी
आक्रोशित युवक ने कलेक्टर के सामने ही चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उसे पंचायत सचिव पद पर नियुक्त नहीं किया गया तो वह कानून अपने हाथ में लेने को मजबूर हो जाएगा। उसने परिवार सहित आत्मदाह करने तक की बात कही।
जनसुनवाई के दौरान युवक की बातों से वहां मौजूद अधिकारियों और लोगों में कुछ देर के लिए तनाव की स्थिति बन गई। हालांकि कलेक्टर ने उसे शांत कराने का प्रयास किया।
कलेक्टर ने जांच का दिया आश्वासन
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने युवक को समझाते हुए कहा कि उसकी शिकायत को गंभीरता से सुना जाएगा और पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने युवक से शांतिपूर्वक अपनी बात रखने की अपील की।

इसके बाद कलेक्टर ने युवक का आवेदन स्वीकार कर लिया और मामले की जांच कराने की बात कही। हालांकि युवक इस आश्वासन से संतुष्ट नजर नहीं आया और अपना आक्रोश जताते हुए कलेक्ट्रेट परिसर से बाहर चला गया।
प्रशासन पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पंचायत सचिव भर्ती प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। यदि युवक के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता का मामला बन सकता है।
वहीं, जनसुनवाई जैसे सार्वजनिक मंच पर युवक द्वारा दी गई धमकी ने प्रशासनिक व्यवस्था और लंबे समय से लंबित मामलों के प्रति लोगों की नाराजगी को भी उजागर किया है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले की जांच किस दिशा में करता है और युवक की शिकायत पर क्या कार्रवाई होती है।