जबलपुर के मानस भवन में आयोजित चतुर्थ वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जहाँ अंधकार है, वहां प्रकाश फैलाना ही सनातन संस्कृति का मूल उद्देश्य है। उन्होंने संतों के योगदान को सराहते हुए कहा कि संतों ने सनातन धर्म और रामकथा की महिमा को जीवित रखा और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाया।
मुख्यमंत्री का संदेश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा—
- प्रभु श्रीराम और श्रीकृष्ण के नाम से भारत की पूरी दुनिया में पहचान है।
- भगवान श्रीराम के जीवन और चरित्र से हर प्रश्न का उत्तर मिलता है।
- रामकथा श्रवण का अवसर तब ही मिलता है जब कई जन्मों का पुण्य एकत्रित होता है।

उन्होंने कहा कि रामकथा का श्रवण केवल धार्मिक अनुभव नहीं, बल्कि जीवन को नैतिक और आध्यात्मिक दिशा देने वाला मार्गदर्शन है।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज की अपील
कार्यक्रम में जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज ने श्रीरामचरित मानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की मांग रखी। उनका कहना था कि रामकथा केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्य का सशक्त दस्तावेज है।
केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत का संदेश
केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा—
- भारत को भारत बनाए रखने में तुलसीदास की रामचरित मानस का विशेष योगदान है।
- राम के चरित्र को केवल पढ़ना नहीं, बल्कि अपने जीवन में उतारना जरूरी है।
उन्होंने इस अवसर पर सुझाव दिया कि जबलपुर के साथ-साथ अन्य प्रमुख शहरों में भी वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस आयोजित की जानी चाहिए, ताकि रामकथा और भारतीय संस्कृति का संदेश और व्यापक रूप में फैल सके।
कार्यक्रम की अध्यक्षता
कार्यक्रम की अध्यक्षता लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने की। कार्यक्रम में संत, विद्वान, धार्मिक और सामाजिक कार्यकर्ता, तथा छात्रों की भी बड़ी संख्या में भागीदारी रही।
महत्व और उद्देश्य
वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य—
- रामकथा और तुलसीदास के संदेश को वैश्विक स्तर पर पहुँचाना
- भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों का प्रचार-प्रसार करना
- युवाओं को नैतिक और आध्यात्मिक शिक्षा देना
मुख्यमंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने इस अवसर पर रामकथा को जीवन में उतारने और सनातन संस्कृति को सहेजने पर जोर दिया।