जबलपुर में नकली किन्नरों का पर्दाफाश: ट्रेन में बधाई के नाम पर वसूली;

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जबलपुर। रेलवे यात्रियों से जुड़ी एक गंभीर समस्या का जबलपुर आरपीएफ ने भंडाफोड़ किया है। लंबे समय से यात्रियों को परेशान कर रहे नकली किन्नरों के गिरोह का पर्दाफाश करते हुए गुरुवार देर रात मदनमहल स्टेशन के पास दो शातिर युवकों को पकड़ा गया। ये युवक महिलाओं का वेश धारण कर ट्रेनों में चढ़ते और बधाई के नाम पर यात्रियों से जबरन पैसे वसूलते थे। पैसे न देने पर मारपीट और अभद्रता उनकी पहचान बन गई थी।

घटना की शुरुआत: यात्री से मारपीट की शिकायत

आरपीएफ प्रभारी सुजीत कुमार को रेल कंट्रोल से सूचना मिली कि वेरावल-जबलपुर सोमनाथ एक्सप्रेस में दो किन्नरों ने एक यात्री से पैसे मांगते हुए विवाद किया और उसके साथ मारपीट की। शिकायतकर्ता यात्री विनोद जैन (नरसिंहपुर निवासी) ने बताया कि ये किन्नर नरसिंहपुर से ट्रेन में सवार हुए थे और लगातार यात्रियों से वसूली कर रहे थे।

शातिर तरीका: ट्रेन के बाथरूम में बदलते थे कपड़े

पकड़े गए आरोपी उमेश कुमार दहायत और उसका भाई रजनीश कुमार दहायत, दोनों पन्ना जिले के रहने वाले हैं। ये घर से साधारण पुरुष के कपड़े पहनकर निकलते थे और ट्रेन में चढ़ने के बाद बाथरूम में जाकर महिलाओं के कपड़े पहन लेते थे। मेकअप कर किन्नरों की तरह तालियां बजाकर यात्रियों से बधाई मांगते और धमकाकर पैसे ऐंठते थे।

सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि जैसे ही ट्रेन में आरपीएफ या पुलिसकर्मी नजर आते, ये तुरंत फिर से बाथरूम में जाकर पुरुषों के कपड़े पहन लेते और आम यात्री बन जाते थे। इस कारण इन पर लंबे समय तक संदेह भी नहीं हुआ।

गिरफ्तारी और खुलासे

आरपीएफ की टीम — एसआई महावीर सिंह, एसआई प्रवीण कुमार मिश्रा, प्रधान आरक्षक धीरेंद्र सिंह और आरक्षक रूपा गर्ग — ने मदनमहल स्टेशन पर सर्च अभियान चलाया। शुरू में आरोपी आसानी से स्टेशन से बाहर निकल गए, लेकिन शक होने पर जब पीछा किया गया तो उनके बैग से महिलाओं के कपड़े बरामद हुए। पूछताछ में आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

नरसिंहपुर में किराए का ठिकाना

जांच में पता चला कि दोनों भाई नरसिंहपुर जिले के रौसरा गांव में शैलू कुचबंदिया नामक व्यक्ति के घर में किराए से रहते थे। वहीं से वे अपने गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ लंबी दूरी की ट्रेनों में चढ़ते और यात्रियों से वसूली करते थे।

गिरोह का नेटवर्क और गुरू का रैकेट

पकड़े गए आरोपियों ने बताया कि उनके साथ गंगा किन्नर और काजल किन्नर भी इस काम में शामिल हैं। इन सबका गुरू पायल किन्नर है। ट्रेन में चढ़ने और बधाई वसूली करने के एवज में पायल प्रतिदिन उनसे 500 रुपए वसूलता था। यानी यह पूरा काम एक संगठित रैकेट की तरह चल रहा था।

यात्रियों में राहत, पुलिस की बड़ी कार्रवाई

आरपीएफ की इस कार्रवाई से यात्रियों ने राहत की सांस ली है। जबलपुर-इटारसी रेलखंड पर नकली किन्नरों का यह गिरोह लंबे समय से यात्रियों को परेशान कर रहा था। अब आरपीएफ उनके बाकी साथियों की तलाश कर रही है।

यह घटना न केवल यात्रियों को सावधान करती है बल्कि यह भी बताती है कि संगठित गिरोह किस तरह धार्मिक और सामाजिक पहचान का गलत फायदा उठाकर लोगों को ठगते हैं। असली किन्नरों की छवि भी ऐसे अपराधियों की वजह से खराब होती है।

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