“जब-जब क्षत्रिय विभाजित हुए, देश गुलाम बना” — कुरवाई में युवा नेता अविराज सिंह का ओजस्वी संबोधन, क्षत्रिय युवाओं में भरा जोश !

Spread the love


कुरवाई विधानसभा क्षेत्र के उत्सव गार्डन में आयोजित भव्य युवा क्षत्रिय सम्मेलन में हजारों की संख्या में जुटे युवाओं को संबोधित करते हुए युवा नेता अविराज सिंह ने ओजपूर्ण वाणी में कहा कि “जब-जब क्षत्रिय विभाजित हुए, देश गुलाम बना।” उन्होंने वीरता, संघर्ष और बलिदान के गौरवशाली इतिहास को याद दिलाते हुए युवाओं को एकजुट होने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि क्षत्रिय समाज की एकता का सपना महाराणा सांगा ने देखा था, और अब समय आ गया है कि इस सपने को साकार किया जाए।

अपने जोशीले और भावनात्मक भाषण में अविराज सिंह ने क्षत्रिय युवाओं को प्रेरणा देते हुए कहा कि जीवन में सफलता उम्र नहीं, प्रयास से तय होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि महाराणा प्रताप ने अपना पहला युद्ध 14 वर्ष में, राणा सांगा ने 20 वर्ष में, और वीर शिवाजी व महाराजा छत्रसाल ने 15 वर्ष की आयु में लड़ा। इन योद्धाओं ने अपने संघर्ष से इतिहास रचा और अमर हो गए। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे भी अपने भीतर छिपे हुए शौर्य और क्षमता को पहचानें और देश, धर्म तथा समाज की रक्षा में अग्रणी भूमिका निभाएं।

अविराज सिंह ने इतिहास की मिसाल देते हुए बताया कि 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में जिन 44 सैनिकों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ बगावत की, उनमें 34 सैनिक क्षत्रिय थे। करगिल युद्ध में वीरगति को प्राप्त 437 सैनिकों में से 142 क्षत्रिय समाज से थे, यह तथ्य आज भी क्षत्रियों के शौर्य और बलिदान की गवाही देता है। उन्होंने कहा, “हम बहती नदी की धार बनें और अपने कुल की रक्षा में खार बनें।”

युवा नेता ने अपने भाषण में महाराणा प्रताप की हल्दीघाटी की लड़ाई का जिक्र करते हुए बताया कि किस प्रकार उन्होंने 15,000 सैनिकों के साथ अकबर की 80,000 की विशाल मुगल सेना का डटकर मुकाबला किया। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप जैसे योद्धा आज के युवाओं के आदर्श हैं जिन्होंने धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए जीवन अर्पण कर दिया। उन्होंने रामायण का उल्लेख करते हुए बताया कि भगवान राम के वनवास के समय माता कौशल्या ने उन्हें जो आशीर्वाद दिया था — “धर्म तुम्हारा रक्षक होगा” — वह आज भी क्षत्रिय धर्म की आत्मा है।

अविराज सिंह ने युवाओं से आधुनिक तकनीक के सदुपयोग की अपील करते हुए कहा कि मोबाइल फोन चलाना जरूरी है, लेकिन उसे चलाने वाली अंगुली हमारी होनी चाहिए — तकनीक का उपभोग हम करें, वह हमें न निगल जाए। उन्होंने कहा कि एक्सीलेंस और योग्यता के पीछे भागो, सफलता अपने आप पीछे आएगी। उनकी इस बात पर युवाओं में गूंजते नारों और तालियों की बारिश ने माहौल को और ऊर्जावान बना दिया।

सम्मेलन की शुरुआत उन्होंने बर्री टौरिया धाम के श्रीराम और हनुमानजी के जयकारों से की, जिससे पूरे कार्यक्रम में धार्मिक ऊर्जा का संचार हुआ। आयोजन में कृष्ण पाल सिंह ने स्वागत भाषण दिया, जबकि वीरेंद्र सिंह ने सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत की। मंच संचालन संजीव सिंह ने किया और संदीप सिंह गंजबासौदा ने आभार प्रदर्शन किया। सम्मेलन में जिलेभर से क्षत्रिय समाज के युवा, वरिष्ठजन व जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे जिनमें गोविन्द सिंह तमोईया, भारत सिंह विशनपुर, अजीत सिंह चीलपहाड़ी, सहित अनेक प्रमुख जन शामिल थे।

युवा नेता अविराज सिंह के स्वागत की भी भव्य तैयारी की गई थी। सागर से कुरवाई तक उनके काफिले में शुरुआत में 10 वाहनों के साथ निकले अविराज सिंह के साथ अंत तक यह काफिला 150 से अधिक वाहनों में बदल गया, जो उनकी लोकप्रियता और युवाओं में उनके प्रति उत्साह को दर्शाता है। खुरई बायपास तिराहा, हिरनक्षिपा गांव सहित अनेक स्थानों पर उनका पारंपरिक स्वागत किया गया। सम्मेलन स्थल पर उनका तुलादान फलों से किया गया, और जगह-जगह स्वागत द्वार, पंडाल, गाजे-बाजे और आतिशबाजी से आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप दिया गया।

अविराज सिंह का यह प्रेरणादायक संबोधन न केवल क्षत्रिय समाज के युवाओं के लिए जोश और जागरूकता का संदेश था, बल्कि समस्त समाज के लिए यह एक चेतावनी भी थी कि इतिहास को भूलना, अपनी शक्ति को बांटना, गुलामी की ओर पहला कदम है। इस सम्मेलन ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि जब युवा जागता है, तब बदलाव अवश्य आता है।

ब्यूरो रिपोर्ट रिपब्लिक सागर मीडिया !

संवाददाता – अर्पित सेन
7806077338, 9109619237

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *