सागर। जिले में संचालित पेयजल एवं जल आपूर्ति परियोजनाओं में देरी और लापरवाही को लेकर कलेक्टर प्रतिभा पाल ने सख्त रुख अपनाया है। सोमवार को आयोजित जिला जल एवं स्वच्छता समिति की बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि 30 जून तक अधूरे कार्य पूर्ण नहीं करने वाली निर्माण एजेंसियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाए। साथ ही कार्यों की निगरानी में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।
बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) और जल निगम द्वारा संचालित विभिन्न जल परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान कई कार्यों की धीमी प्रगति और अधूरे निर्माण कार्यों पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के इस दौर में पेयजल योजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही आमजन के लिए बड़ी समस्या बन सकती है, इसलिए सभी एजेंसियां तय समय सीमा में कार्य पूर्ण करें।

30 जून के बाद होगी सख्त कार्रवाई
कलेक्टर प्रतिभा पाल ने बैठक में दो टूक शब्दों में कहा कि 15 जून से 30 जून के बीच यदि कार्यों की प्रगति संतोषजनक नहीं मिली, तो संबंधित निर्माण एजेंसियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जो ठेकेदार कार्य में रुचि नहीं ले रहे हैं या लगातार देरी कर रहे हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से ब्लैकलिस्ट किया जाए।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि ऐसे ठेकेदारों के खराब प्रदर्शन का रिकॉर्ड उनके कार्य अनुभव में दर्ज किया जाए, ताकि भविष्य में वे अन्य शासकीय निविदाओं में भाग नहीं ले सकें। कलेक्टर ने कहा कि सरकारी योजनाओं में लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पाइपलाइन के बाद सड़कें हों पूर्व स्थिति में
बैठक में पाइपलाइन बिछाने के लिए खोदी गई सड़कों के रेस्टोरेशन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिन स्थानों पर पाइपलाइन कार्य के कारण सड़कें खोदी गई हैं, वहां निर्धारित समय सीमा में रेस्टोरेशन कार्य पूरा किया जाए, ताकि आमजन को आवागमन में परेशानी न हो।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि निर्माण एजेंसियां यह सुनिश्चित करें कि सड़कें पहले जैसी स्थिति में वापस लाई जाएं। यदि इसमें लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित एजेंसी के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
गर्मी को देखते हुए वैकल्पिक जल स्रोतों की व्यवस्था
भीषण गर्मी और बढ़ती जल समस्या को देखते हुए कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जहां आवश्यकता हो, वहां वैकल्पिक जल स्रोतों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी गांव या शहरी क्षेत्र में पेयजल संकट की स्थिति नहीं बननी चाहिए।
इसके लिए स्थानीय स्तर पर हैंडपंप, टैंकर और अन्य वैकल्पिक स्रोतों का उपयोग करने के निर्देश दिए गए, ताकि लोगों को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जा सके।
“अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे योजना का लाभ”
बैठक में जल निगम की विभिन्न योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने ‘सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट’ (SIA) पर विशेष जोर देते हुए कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ट्रीटेड वॉटर सप्लाई जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं का उद्देश्य केवल निर्माण कार्य पूरा करना नहीं, बल्कि लोगों तक गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुंचाना है। इसलिए योजनाओं के संचालन और रखरखाव पर भी विशेष ध्यान दिया जाए।
पंचायतों के माध्यम से यूजर चार्ज वसूली पर जोर
कलेक्टर प्रतिभा पाल ने पंचायतों के माध्यम से यूजर चार्जेस की वसूली और जल समितियों को सक्रिय बनाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि जल योजनाओं के सफल संचालन के लिए स्थानीय सहभागिता बेहद जरूरी है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्राम स्तर पर जल समितियों को सक्रिय कर उनकी जिम्मेदारियां तय की जाएं, ताकि योजनाओं का संचालन व्यवस्थित तरीके से हो सके और ग्रामीणों को नियमित जल आपूर्ति मिलती रहे।

लंबित बिलों के भुगतान के निर्देश
बैठक में यह मुद्दा भी सामने आया कि कई निर्माण एजेंसियों के भुगतान लंबित होने के कारण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इस पर कलेक्टर ने कार्यपालन यंत्रियों (ईई) को निर्देश दिए कि वे स्वयं परीक्षण कर ठेकेदारों के लंबित वाजिब बिलों का भुगतान सात दिनों के भीतर सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा कि यदि एजेंसियों के वैध भुगतान लंबित रहेंगे तो कार्यों की गति प्रभावित होगी, इसलिए भुगतान प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न की जाए।
अधिकारियों को दी जवाबदेही तय करने की चेतावनी
कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि यदि कार्यों की निगरानी में अधिकारियों की लापरवाही सामने आती है, तो उनके विरुद्ध निलंबन सहित कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि अधिकारी नियमित रूप से फील्ड विजिट करें और कार्यों की गुणवत्ता तथा प्रगति की सतत निगरानी सुनिश्चित करें।
बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विवेक के वी, जल निगम, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
जिला प्रशासन की इस सख्ती को जल परियोजनाओं में पारदर्शिता और समयबद्ध कार्य सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।