मध्यप्रदेश शासन द्वारा जारी सख्त निर्देशों के अनुपालन एवं शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता व अनुशासन सुनिश्चित करने के लक्ष्य के साथ जिले के समस्त सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की ई-हाजिरी (ई-अटेंडेंस) प्रणाली को शत-प्रतिशत लागू कराने हेतु कलेक्टर श्री संदीप जी आर ने कड़ा निर्देश जारी किया है। कलेक्टर ने कहा कि यह कदम केवल उपस्थिति दर्ज कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पढ़ाई के घंटे बचाने, शिक्षण गुणवत्ता में सुधार और विद्यालयी व्यवस्थाओं में जवाबदेही सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।

प्रमुख निर्देश और अपेक्षित कृत्य
- ई-अटेंडेंस अनिवार्य:
सभी नियमित एवं अतिथि शिक्षकों के लिए “हमारे शिक्षक” ऐप के माध्यम से ई-अटेंडेंस का रीयल-टाइम रिकॉर्ड अनिवार्य किया गया है। विद्यालय खोलने के एक घंटे के भीतर और विद्यालय बंद होने के 30 मिनट बाद तक दोनों समय पर जीपीएस-आधारित सेल्फी के साथ हाजिरी दर्ज करना शिक्षक का दायित्व होगा। - समयबद्धता और कड़ी कार्रवाई:
समयसीमा का पालन न करने, गलत स्थान/सेंसर वाली हाजिरी देने, या किसी भी प्रकार की मनमानी करने पर विद्यालय प्रबंधन/शिक्षक के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि पहली बार चेतावनी के बाद भी अनियमितता बनी रहने पर वेतन कटौती, सेवा सम्बन्धी नोटिस या अन्य सख्त कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है। - निगरानी व अभियान:
जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) श्री अरविंद जैन को निर्देशित किया गया है कि वे तत्काल प्रभाव से जिले के प्रत्येक विकास खंड में विशेष निगरानी अभियान आरम्भ कराएँ। इस अभियान के अंतर्गत ब्लॉक स्तरीय निरीक्षण, आकस्मिक विजिट और डेटा ऑडिट सम्मिलित होंगे ताकि ऐप में दर्ज उपस्थिति का सत्यापन संभव हो सके। - जागरूकता व प्रशिक्षण:
सभी विद्यालयों में शिक्षक एवं प्रशासनिक स्टाफ के लिए ऐप उपयोग, जीपीएस-सेल्फी और उपस्थिति रिकॉर्डिंग के सम्बन्ध में ट्रेनिंग सत्र आयोजित किए जाएँगें। कलेक्टर ने कहा कि प्राथमिक स्तर से लेकर माध्यमिक तक प्रत्येक कॉलेज/विद्यालय में कम से कम एक ट्रेनर नियुक्त किया जाए जो सहकर्मी ट्रेनिंग दे सके। - तकनीकी सहायता और समन्वय:
जिन विद्यालयों में इंटरनेट/नेटवर्क की समस्या आने वाली है, वहाँ ब्लॉक-स्तर पर बैकअप योजना (ऑफलाइन रिकॉर्डिंग और समय-सीमित पुर्नअपलोड) लागू की जाएगी। डीईओ कार्यालय तकनीकी सहायता टीम के साथ समन्वय करके जल्द से जल्द नेटवर्क समस्याओं का निवारण सुनिश्चित करेगा। - डेटा विश्लेषण और मासिक रिपोर्टिंग:
प्रत्येक स्कूल की मासिक उपस्थिति रिपोर्ट डीईओ कार्यालय को भेजी जाएगी। जिलास्तरीय समन्वय समिति द्वारा इन रिपोर्टों का विश्लेषण कर आवश्यक सुधारात्मक सुझाव और ईमानदारी से अनुपस्थित रहने वाले मामलों की पहचान कर उनकी रिपोर्ट कलेक्टर कार्यालय को प्रस्तुत की जाएगी।
कलेक्टर का कथन
कलेक्टर श्री संदीप जी आर ने कहा, “शिक्षक हमारे समाज का आधार हैं — उनकी नियमित उपस्थिति से ही बच्चों की पढ़ाई संभव है और हमारे विद्यालय जिले में शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनेंगे। ई-अटेंडेंस सिर्फ एक तकनीकी उपाय नहीं, बल्कि विश्वास, जवाबदेही और विद्यार्थियों के भविष्य के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।”

डीईओ का कदम और अपेक्षित समयसीमा
डीईओ श्री अरविंद जैन को निर्देश है कि वे सात कार्यदिवस के भीतर ब्लॉक-स्तरीय निगरानी अभियान का कार्ययोजना प्रस्तुत करें। साथ ही प्रत्येक विद्यालय के प्रधानाचार्य को निर्देशित किया गया है कि वे 15 दिनों के भीतर संपूर्ण स्टाफ के लिए ऐप प्रशिक्षण आयोजित कर प्रशिक्षित कर्मचारियों की सूची डीईओ कार्यालय में भेजें।
जिलास्तरीय समर्थन और शिकायत निवारण
शिकायतों और तकनीकी दिक्कतों के लिए जिला शिक्षा कार्यालय में एक समन्वयक टीम स्थापित की जाएगी। विद्यालय स्तर पर अनुपस्थितियों/गलत हाजिरी के संदर्भ में मांगी जा सकने वाली दस्तावेज़ी प्रमाणिकता के लिये प्राचार्य जिम्मेदार होंगे। जनता और अभिभावक भी किसी गम्भीर शिकायत के मामले में सीधे डीईओ कार्यालय से संपर्क कर सकेंगे।
उद्देश्य और अपेक्षित लाभ
- शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित कर पढ़ाई के घंटों में वृद्धि।
- स्कूल संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार।
- अनुपस्थिति के कारण होने वाले सीखने के नुकसान को कम करना।
- डिजिटल रिकॉर्डिंग के माध्यम से बेहतर योजना और संसाधन प्रबंधन संभव बनाना।
कलेक्टर के निर्देशानुसार, सभी संबंधित अधिकारियों, प्राचार्यों और शिक्षकों से अपेक्षा की जाती है कि वे शासन की नीति के अनुरूप तत्परता और ईमानदारी से इस योजना को लागू करें। जिला प्रशासन समय-समय पर समीक्षा बैठकें करेगा और आवश्यकतानुसार और सख्ती से कदम उठाएगा।