सागर। बदलते सामाजिक और शैक्षणिक परिवेश में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए जीवन कौशल शिक्षा को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी उद्देश्य से शासकीय विद्यालयों के शिक्षकों के लिए आयोजित तीन दिवसीय जीवन कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास पर विस्तार से चर्चा की।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में जीवन कौशल विषय की विशेषज्ञ सुश्री सोना चौबे ने कहा कि तनावमुक्त जीवन और प्रभावी शिक्षा के लिए जीवन कौशल एक महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा कि जीवन कौशल के माध्यम से विद्यार्थियों को जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करने, सही निर्णय लेने और अपने लक्ष्यों को हासिल करने की क्षमता मिलती है। यह कौशल विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास के साथ उनके मानसिक सशक्तिकरण में भी सहायक होते हैं।
उन्होंने बताया कि जीवन कौशल में अपने विचारों और भावनाओं को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने की क्षमता, समस्याओं का विश्लेषण कर उनका समाधान ढूंढना, समय का प्रभावी प्रबंधन करना तथा सकारात्मक सोच विकसित करना शामिल है। इन कौशलों के माध्यम से विद्यार्थी अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का भी बेहतर तरीके से ध्यान रख सकते हैं।
प्रशिक्षण के दौरान यह भी बताया गया कि आज के तेजी से बदलते सामाजिक और तकनीकी दौर में केवल शैक्षणिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों और युवाओं के समग्र विकास के लिए जीवन कौशल अत्यंत आवश्यक हो गए हैं। जीवन कौशल व्यक्ति को व्यक्तिगत, सामाजिक और व्यावसायिक जीवन की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने में सक्षम बनाते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार जीवन कौशल में आत्म-जागरूकता, निर्णय क्षमता, समस्या समाधान, रचनात्मक सोच, भावनाओं का प्रबंधन, सहानुभूति और प्रभावी संवाद जैसे गुण शामिल होते हैं। कई शिक्षण संस्थानों ने विद्यार्थियों में इन गुणों को विकसित करने के लिए समूह चर्चा, परियोजना कार्य, नेतृत्व गतिविधियाँ और सामाजिक कार्यक्रमों को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया है, जिससे विद्यार्थियों में व्यवहारिक समझ और आत्मविश्वास बढ़ सके।
प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में केवल डिग्री होना ही पर्याप्त नहीं है। कंपनियाँ ऐसे युवाओं को प्राथमिकता देती हैं जिनमें टीमवर्क, नेतृत्व क्षमता, समय प्रबंधन और बेहतर संवाद कौशल हो। इसलिए जीवन कौशल युवाओं को रोजगार के अवसर दिलाने के साथ उन्हें जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बनने में भी मदद करते हैं।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि यदि बच्चों को प्रारंभिक स्तर से ही जीवन कौशल सिखाए जाएँ, तो वे भविष्य में संवेदनशील, जिम्मेदार और सामाजिक रूप से जागरूक नागरिक बन सकते हैं। जीवन कौशल शिक्षा समाज में सहयोग, सहिष्णुता और सकारात्मक बदलाव लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

इस अवसर पर श्री दिनेश कुमार सेन, श्री रमाकांत पांडे, शिक्षिका श्रीमती मनोरमा ठाकुर, श्रीमती विनीता नेमा और श्री शिवाकांत अहिरवार ने भी जीवन कौशल के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए और इसकी विशेषताओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
तीन दिवसीय इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के 65 से अधिक शिक्षकों ने भाग लेकर जीवन कौशल से संबंधित विभिन्न पहलुओं का प्रशिक्षण प्राप्त किया। कार्यक्रम के अंत में शिक्षकों ने यह संकल्प लिया कि वे विद्यालयों में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए जीवन कौशल शिक्षा को प्रभावी ढंग से लागू करेंगे।