जैन साध्वियों की मौत के विरोध में चार शहरों में निकला मौन जुलूस: SIT जांच और हत्या का केस दर्ज करने की मांग !

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बीना।
रीवा में जैन साध्वियों की सड़क हादसे में हुई मौत के विरोध में सोमवार को बीना, खुरई, मालथौन और बांदरी में सकल जैन समाज एकजुट होकर सड़कों पर उतरा। समाज के लोगों ने मौन जुलूस निकालकर घटना के प्रति गहरा आक्रोश जताया और इसे साधारण सड़क दुर्घटना मानने से इनकार करते हुए सुनियोजित हत्या बताया। प्रदर्शनकारियों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच, दोषियों पर हत्या की धाराओं में केस दर्ज करने तथा विहाररत जैन संतों और साध्वियों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रोटोकॉल लागू करने की मांग की।

चारों शहरों में निकाले गए मौन जुलूसों में बड़ी संख्या में समाजजन, महिलाएं, युवा और बुजुर्ग शामिल हुए। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराया। समाजजनों ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर न्याय की मांग की।

बीना में इटावा मंदिर से सर्वोदय चौक तक निकला जुलूस

बीना में दिगंबर जैन समाज द्वारा मौन जुलूस इटावा दिगंबर जैन मंदिर से प्रारंभ हुआ। जुलूस शहर के प्रमुख मार्गों से होता हुआ सर्वोदय चौक पहुंचा, जहां समाज के प्रतिनिधियों ने तहसीलदार अंबरपंथी को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में मांग की गई कि रीवा की घटना की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। समाजजनों का कहना था कि उपलब्ध वीडियो क्लिप और घटनास्थल की परिस्थितियां यह संकेत देती हैं कि मामला केवल दुर्घटना का नहीं हो सकता। उन्होंने इस घटना को गंभीर साजिश बताते हुए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की।

बीना विधायक निर्मला सप्रे ने भी दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि संत समाज की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और घटना की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

खुरई में प्राचीन मंदिर से एसडीएम कार्यालय तक प्रदर्शन

खुरई में दिगंबर जैन समाज ने प्राचीन जैन मंदिर से मौन जुलूस निकाला, जो एसडीएम कार्यालय पहुंचकर समाप्त हुआ। यहां समाज के प्रतिनिधियों ने नायब तहसीलदार शिवमूर्ति सरल को ज्ञापन सौंपा।

समाज के लोगों ने प्रशासन से मांग की कि विहाररत मुनिराजों और आर्यिका माताओं के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं दोबारा न हों।

मालथौन और बांदरी में भी उठा विरोध का स्वर

मालथौन में जैन समाज ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया कि रीवा पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। समाजजनों ने कहा कि यदि शुरुआत से ही निष्पक्ष कार्रवाई की जाती, तो लोगों में आक्रोश की स्थिति उत्पन्न नहीं होती।

उन्होंने घटना में शामिल अन्य संदिग्धों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए हत्या की धाराओं में केस दर्ज करने की मांग की। समाज ने कहा कि केवल दुर्घटना मानकर मामले को सीमित करना उचित नहीं होगा।

वहीं बांदरी में भी दिगंबर जैन मंदिर से थाना परिसर तक मौन जुलूस निकाला गया। यहां राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर संत समाज की सुरक्षा के लिए ठोस नीति बनाने की मांग की गई।

“संतों की सुरक्षा समाज और शासन दोनों की जिम्मेदारी”

विरोध प्रदर्शन के दौरान एडवोकेट अशोक जैन ने कहा कि जैन समाज संवैधानिक मर्यादाओं में विश्वास रखता है और उनका उद्देश्य किसी प्रकार का तनाव उत्पन्न करना नहीं है। उन्होंने कहा कि समाज केवल यह चाहता है कि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और संत समाज की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने कहा कि जैन संत और साध्वियां अहिंसा, त्याग और तपस्या का संदेश देते हैं। ऐसे तपस्वी संतों के साथ हुई घटना ने पूरे समाज को आहत किया है। इसलिए मामले में पारदर्शी जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई बेहद जरूरी है।

समाज ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी

चारों शहरों में हुए प्रदर्शन के दौरान जैन समाज ने एकजुटता दिखाते हुए चेतावनी दी कि यदि संतों की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए और घटना की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

समाजजनों ने कहा कि यह केवल एक समुदाय का मुद्दा नहीं, बल्कि देश की आध्यात्मिक और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा विषय है। इसलिए शासन को गंभीरता के साथ कार्रवाई करनी चाहिए।

मौन जुलूस के दौरान पूरे मार्ग में अनुशासन और शांति का वातावरण बना रहा। बड़ी संख्या में पुलिस बल भी तैनात रहा ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। प्रदर्शन के बाद समाजजनों ने शांतिपूर्वक कार्यक्रम समाप्त किया, लेकिन न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया।

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