टाटा ग्रुप की नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) टाटा कैपिटल ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर–दिसंबर) में शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी का शुद्ध मुनाफा 39% की सालाना बढ़त के साथ ₹1,285 करोड़ पहुंच गया है। एक साल पहले इसी तिमाही में यह मुनाफा ₹922 करोड़ था।
कंपनी की कुल कमाई में भी 7% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में कंपनी की आय ₹5,786 करोड़ रही, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹5,375 करोड़ थी। मजबूत रिटेल लोन डिमांड, ब्याज से बढ़ी कमाई और बेहतर एसेट क्वालिटी ने नतीजों को सहारा दिया।

टाटा कैपिटल रिजल्ट की 3 बड़ी बातें
1) कुल बिजनेस ₹2.34 लाख करोड़ के पार
टाटा कैपिटल के एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में सालाना आधार पर 26% की बढ़ोतरी हुई है। अब कंपनी ₹2,34,114 करोड़ का फंड मैनेज कर रही है। इसमें करीब 60% हिस्सा रिटेल लोन (होम लोन, पर्सनल लोन आदि) का है, जो स्थिर और विविध पोर्टफोलियो को दर्शाता है।
2) ब्याज से होने वाली कमाई में तेज उछाल
कंपनी की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) यानी ब्याज से शुद्ध कमाई 26% बढ़कर ₹2,936 करोड़ हो गई है। यह बढ़ोतरी लोन बुक के विस्तार और बेहतर यील्ड्स की वजह से आई है।
3) लोन की क्वालिटी मजबूत
एसेट क्वालिटी के मोर्चे पर कंपनी की स्थिति स्थिर बनी हुई है।
- ग्रॉस NPA: 1.6%
- नेट NPA: 0.6%
इसका मतलब है कि कंपनी की कर्ज वसूली मजबूत है और जोखिम नियंत्रण में है।

टाटा संस की 93% हिस्सेदारी
टाटा संस, टाटा कैपिटल की होल्डिंग कंपनी है और इसके पास करीब 93% हिस्सेदारी है। शेष हिस्सेदारी टाटा ग्रुप की अन्य कंपनियों और ट्रस्टों के पास है। टाटा कैपिटल को RBI से ‘अपर लेयर NBFC’ का दर्जा प्राप्त है, जो इसके आकार और सिस्टमेटिक महत्व को दर्शाता है।
कंपनी का सफर
टाटा कैपिटल लिमिटेड की स्थापना 8 मार्च 1991 को हुई थी। शुरुआती नाम ‘प्राइमल इन्वेस्टमेंट्स एंड फाइनेंस लिमिटेड’ था। कंपनी ने सितंबर 2007 से सक्रिय रूप से ऋण कारोबार शुरू किया।
साल 2025 में कंपनी का IPO आया और इसके शेयर 13 अक्टूबर 2025 को भारतीय शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुए।
आगे की तस्वीर
विशेषज्ञों के मुताबिक रिटेल लोन में मजबूत मांग, नियंत्रित जोखिम और ब्याज आय में निरंतर वृद्धि के चलते टाटा कैपिटल की ग्रोथ ट्रैक पर बनी रह सकती है। मजबूत बैलेंस शीट और टाटा ग्रुप का भरोसा कंपनी के लिए दीर्घकालिक मजबूती का संकेत देता है।